अजा, अजजा वर्ग के लिए सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा लिए फैसले के विरोध में मध्यप्रदेश कांग्रेस द्वारा कल 28 मार्च को जिला स्तर पर धरना देकर प्रदर्शन किया जाएगा. इस दौरान कांग्रेस द्वारा राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा जाएगा.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरूण यादव ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुभाष काशीनाथ महाजन विरूद्ध स्टेट आॅफ महाराष्ट्र प्रकरण में हाल ही में दिये गये फैसले के बाद अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों के समक्ष गंभीर संकट पैदा हो गया है. इसके बाद उन पर हो रहे अत्याचारों से उन्हें खुद को बचाने में अधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि केंद्र ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा के दबाव में न्यायालय के समक्ष अपना तर्क सम्मत पक्ष नहीं रखा, क्योंकि अनुसूचित जाति तथा जनजाति से संबद्ध लोगों की आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर करने की संघ कबीले की शुरू से ही नीति रही है और यही कारण है कि वह इस वर्ग के हितों को संरक्षण देने वाले मौजूदा कानून को खत्म करने का षडयंत्र कर रही है.
यादव ने कहा कि 20 मार्च को पारित इस आदेश के बाद अजा-अजजा वर्ग के लोगों के अधिकारों पर कुठाराघात हुआ है. लिहाजा, केंद्र सरकार को इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष समीक्षा याचिका दायर करना चाहिए अथवा कानून में संशोधन करना चाहिए. इस वर्ग के अधिकारों, सम्मान और संरक्षण के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार 1989 में कानून बनाकर लायी थी, किंतु नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली मौजूदा केंद्र सरकार संघ परिवार के गुप्त एजेंडे के तहत एक नियोजित षड्यंत्र के तहत इस वर्ग को प्रताड़ित करने की नीति को अंजाम दे रही है, जिसका हमें डटकर विरोध करना है. यादव ने जिला, शहर कांग्रेस अध्यक्षों को निर्देश दिये हैं कि वे इस फैसले के विरोध में 28 मार्च को सभी जिला, शहर, ब्लाक कांग्रेस कमेटियां अपनी सुविधानुसार जिला कलेक्टर कार्यालयों पर धरना-प्रदर्शन, मशाल, कैंडल मार्च, रैलियां और राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन देकर अपना विरोध दर्ज कराएं.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरूण यादव ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुभाष काशीनाथ महाजन विरूद्ध स्टेट आॅफ महाराष्ट्र प्रकरण में हाल ही में दिये गये फैसले के बाद अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों के समक्ष गंभीर संकट पैदा हो गया है. इसके बाद उन पर हो रहे अत्याचारों से उन्हें खुद को बचाने में अधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि केंद्र ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा के दबाव में न्यायालय के समक्ष अपना तर्क सम्मत पक्ष नहीं रखा, क्योंकि अनुसूचित जाति तथा जनजाति से संबद्ध लोगों की आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर करने की संघ कबीले की शुरू से ही नीति रही है और यही कारण है कि वह इस वर्ग के हितों को संरक्षण देने वाले मौजूदा कानून को खत्म करने का षडयंत्र कर रही है.
यादव ने कहा कि 20 मार्च को पारित इस आदेश के बाद अजा-अजजा वर्ग के लोगों के अधिकारों पर कुठाराघात हुआ है. लिहाजा, केंद्र सरकार को इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष समीक्षा याचिका दायर करना चाहिए अथवा कानून में संशोधन करना चाहिए. इस वर्ग के अधिकारों, सम्मान और संरक्षण के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार 1989 में कानून बनाकर लायी थी, किंतु नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली मौजूदा केंद्र सरकार संघ परिवार के गुप्त एजेंडे के तहत एक नियोजित षड्यंत्र के तहत इस वर्ग को प्रताड़ित करने की नीति को अंजाम दे रही है, जिसका हमें डटकर विरोध करना है. यादव ने जिला, शहर कांग्रेस अध्यक्षों को निर्देश दिये हैं कि वे इस फैसले के विरोध में 28 मार्च को सभी जिला, शहर, ब्लाक कांग्रेस कमेटियां अपनी सुविधानुसार जिला कलेक्टर कार्यालयों पर धरना-प्रदर्शन, मशाल, कैंडल मार्च, रैलियां और राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन देकर अपना विरोध दर्ज कराएं.

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