भोपाल जेल में बंद 31 विचारधीन कैदियों के साथ बर्बरता पूर्वक व्यवहार कर उन्हें टॉचर करने की शिकायतें सहीं पाई गई हैं.राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की है.
यह आरोप पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टी की माधुरी ने आज शनिवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में लगाए हैं.माधुरी ने प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि भोपाल की सेंट्रल जेल में बंद 21 विचारधीन कैदियों के परिजनों ने बीते 24 मई 2017 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से मुलाकात की और विचारधीन कैदियों के प्रताड़ित करने की शिकायत दर्ज करवाई.
मानवाधिकार कमीशन ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अपनी एक टीम को जून 2017 में जांच के लिए भेजा था.जांच दल ने कैदियों, परिवार के सदस्यों, जेल अधिकारियों, वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से बात की.कुछ समय थमने के बाद प्रताड़ना फिर तेज होने की शिकायत पर आयोग ने दिसंबर 2017 में फॉलोअप जांच के लिए फिर एक दल भेजा गया था.
माधुरी का आरोप है कि एनएचआरसी टीम की जांच रिपोर्ट अब उपब्लध है.टॉर्चर, मारपीट और प्रताड़ना की शिकायतें ज्यादातर सही पाई गई हैं.टीम ने यह भी पाया कि जेल स्टॉफ द्वारा कैदियों को एनएचआरसी से शिकायत न करने की धमकी भी दी गई थी.माधुरी का आरोप है कि भोपाल जेल में बंद 21 विचाराधीन और 10 गुजरात से भोपाल जेल शिफ्ट किए गए समेत कुल 31 कैदियों को अवैध एकांत कारावास में रखा जा रहा है.उनके साथ जेल कर्मचारियों द्वारा बर्बर मारपीट की जा रही है.साथ ही उन्हें रात भर सोने भी नहीं दिया जा रहा है.माधुरी ने अपने संगठन की ओर से मांग की है कि जेल में बंद सिमी के विचाराधीन कैदियों को प्रताड़ित करने वाले जेल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.साथ ही कैदियों के साथ बर्बरता पूर्वक व्यवहार को बंद किया जाए.

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