प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक के बाद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री सौदान सिंह ने पार्टी के सातों मोर्चा के प्रदेश अध्यक्षों तथा महामंत्रियों के साथ बैठक की. उन्होंने कहा कि हमारे मोर्चे मोर्चा शब्द के अनुकूल किसी भी प्रकार का मोर्चा लेने में समर्थ हैं. हमारा एक-एक मोर्चा इतना सामर्थ्यवान है कि यदि अकेला ही तय कर ले तब भी सरकार बनाने से हमें कोई नहीं रोक सकता. इसके लिए कुछ मोर्चा को लोकसभा स्तर को इकाई मानकर बड़े-बड़े सम्मेलन करने की आवश्यकता है और सम्मेलनों के माध्यम से मोर्चे से संबंधित समाज को यह बताये जाने की आवश्यकता है कि जो काम कांग्रेस ने 70 सालों के शासन में नहीं किये उससे कई अधिक कार्य हमारी सरकारों ने केवल 14-15 वर्षों में कर दिखाये हैं. मध्यप्रदेश 2003 से पहले एक बीमारू राज्य था, जो आज विकासशील राज्य के बाद विकसित राज्य की श्रेणी में खड़ा हो रहा है. इन बड़े-बड़े सम्मेलनों में यह बात बताई जाना आवश्यक है कि विकास की यह यात्रा कितनी तय की जा चुकी है. बैठक में युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, अनुसूचित जाति और जनजाति मोर्चा, पिछड़ा वर्ग मोर्चा एवं किसान मोर्चा आदि ने पूरे उत्साह के साथ इस प्रकार के बड़े सम्मेलन कर सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच में ले जाने पर अपनी सहमति दी. मोर्चा अध्यक्षों ने कहा कि वे संगठन की अपेक्षा से भी बड़े सम्मेलन लोकसभा स्तर पर करने का प्रयत्न करेंगे. इस अवसर पर सभी मोर्चा अध्यक्षों ने पिछले 3 महीनों का कार्य प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया.
सोमवार, 26 मार्च 2018
सम्मेलन कर उपलब्धियां बताएं मोर्चा
प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक के बाद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री सौदान सिंह ने पार्टी के सातों मोर्चा के प्रदेश अध्यक्षों तथा महामंत्रियों के साथ बैठक की. उन्होंने कहा कि हमारे मोर्चे मोर्चा शब्द के अनुकूल किसी भी प्रकार का मोर्चा लेने में समर्थ हैं. हमारा एक-एक मोर्चा इतना सामर्थ्यवान है कि यदि अकेला ही तय कर ले तब भी सरकार बनाने से हमें कोई नहीं रोक सकता. इसके लिए कुछ मोर्चा को लोकसभा स्तर को इकाई मानकर बड़े-बड़े सम्मेलन करने की आवश्यकता है और सम्मेलनों के माध्यम से मोर्चे से संबंधित समाज को यह बताये जाने की आवश्यकता है कि जो काम कांग्रेस ने 70 सालों के शासन में नहीं किये उससे कई अधिक कार्य हमारी सरकारों ने केवल 14-15 वर्षों में कर दिखाये हैं. मध्यप्रदेश 2003 से पहले एक बीमारू राज्य था, जो आज विकासशील राज्य के बाद विकसित राज्य की श्रेणी में खड़ा हो रहा है. इन बड़े-बड़े सम्मेलनों में यह बात बताई जाना आवश्यक है कि विकास की यह यात्रा कितनी तय की जा चुकी है. बैठक में युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, अनुसूचित जाति और जनजाति मोर्चा, पिछड़ा वर्ग मोर्चा एवं किसान मोर्चा आदि ने पूरे उत्साह के साथ इस प्रकार के बड़े सम्मेलन कर सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच में ले जाने पर अपनी सहमति दी. मोर्चा अध्यक्षों ने कहा कि वे संगठन की अपेक्षा से भी बड़े सम्मेलन लोकसभा स्तर पर करने का प्रयत्न करेंगे. इस अवसर पर सभी मोर्चा अध्यक्षों ने पिछले 3 महीनों का कार्य प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया.
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