राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने कहा कि मीडिया का एक बड़ा धड़ा देश हित और राष्ट्रीय एकता की कीमत समझता है और उसकी बात भी करता है.लेकिन एक वर्ग ऐसा भी है जो सैनिकों के खिलाफ दिखता है और नक्सलियों पर चुप्पी साध लेता है.उन्होंने कहा कि मीडिया के उस वर्ग को देश के लिए चिंता करने की जरूरत है.कुमार भारत की सुरक्षा मीडिया, विज्ञान एवं तकनीकी की भूमिका विषय पर भोपाल के विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी परिषद् संस्थान में आयोजित दो दिवसीय मीडिया महोत्सव 2018 में बोल रहे थे.यह कार्यक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा मंच, वैज्ञानिक एवं आद्योगिक अनुसंधान परिषद्, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, कम्यूनिकेशन एवं इंफरमेशन रिसोर्सेज (निस्केयर), विवेकानंद केंद्र भोपाल, विश्व संवाद केंद्र, विश्वविद्यालयों और गैर सरकारी संगठन संपदन द्वारा आयोजित किया गया हैं.
कुमार का कहना था कि 2010 के बाद से मीडिया में भी कुछ सकारात्मक बदलाव भी आए है और लोग अब खुलकर देशहित की बातें करने लगे है.उन्होंने कहा कि मीडिया महोत्सव इतिहास बनाने का एक महत्वपूर्ण जरिया है.हमारा देश भारत ने सोने की चिडिया कहलाने का तमगा तो भ्रष्टाचार और लूट खसोट के चलते खो दिया, लेकिन संस्कृति और सभ्यता के लिए दुनिया आज भी भारत का ही मुंह ताकती है, जो भारत के लिए अत्यंत गौरवशाली बात है.इसके अलावा उन्होंने कहा कि जिस देश ने 1857 से 1947 तक अंग्रेजो से बहादुरी से लड़ने वाले 2 करोड़ 72 लाख लोग और जहर खाकर अपनी अस्मत बचाने वाली 4 लाख बहन-बेटियों को खोया हो उस देश को कांग्रेस ने आजाद कराने के बजाए विभाजन की आग में झोक दिया था.इसके साथ ही इंद्रेश कुमार ने राम मंदिर, तीन तलाक, कश्मीर समस्या जैसे विषयों पर भी अपनी राय रखी।
मीडिया महोत्सव के पहले सत्र में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा कि मीडिया वर्तमान समय में पूर्व की अपेक्षा अधिक सचेत और जागरुक हुई है.लेकिन अभी भी उसकी सोच इतनी व्यापक नही है कि उसका प्रचार किया जाए.शुक्ला ने कहा कि पठानकोट हमले पर भारतीय मीडिया द्वारा की गई सकारात्मक रिपोर्टिंग का ही नतीजा है कि नापाक पाकिस्तान की पोल आज पूरी दुनिया के सामने खुल गई है.शायद इसी का परिणाम है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की अमेरिका के एयरपोर्ट पर कपड़े उतारकर चैकिंग की जाती है.
कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार उदय माहुरकर ने कहा कि वीर सावरकर का क्रांतिकारी और हिंदु राष्ट्रवादी होने के अलावा भविष्यवेत्ता के रुप में उनका एक और स्वरूप भी था.उन्होंने 1930 में ही बांग्लादेश की और से नॉर्थ ईस्ट में हो रहे अवैध घुसपेठ को एक खतरे के रुप में देखा था, जो आज वास्तव में देश की सुरक्षा के लिए गंभीर समस्या बन चुकी हैं।.इसके पहले कार्यक्रम के आरंभ में यंग्स थियेटर फाउडेशन के कलाकारों द्वारा वंदे मातरम् के साथ ही कवियों की रचनाओं की प्रस्तुति दी गई.कार्यक्रम में मीडिया महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री एसके राउत, मप्र विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी परिषद् के महानिदेशक नवीन चंद्रा, कार्यक्रम के समन्वयक अनिल सौमित्र, प्रसिद्ध ब्लागर एवं पत्रकार प्रकाश हिंदुस्तानी भी थे.
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