मधयपदेश के खंडवा जिले में पड़ने वाले आदिवासी ब्लॉक खालवा तहत आने वाली धावड़ी पंचायत का ग्राम मामाडोह.मामाडोह में रहने वाले आदिवासी पानी की बढ़ती समस्या से इतने परेशान गए थे की उन्हें अपना गांव तक छोड़ना पड़ता था.इतना ही नहीं इन्हें अपने मवेशी भी औने पौने दामों पर बेचने लिए मजबूर होना पड़ता था.ऐसे में मामाडोह के रहने वाले करण सिंह ने अपनी समस्या स्पंदन समाज सेवा समिति के सामने रखी .स्पंदन के प्रभारी सीमा प्रकाश ने गूंज संस्था से संपर्क कर इस समस्या को साझा किया.गूंज संस्था ने ग्रामीणों को कपड़े और अनाज के बदले काम करने का प्रस्ताव दिया.
इस समस्या से निजात पाने के लिए जब ग्रामीणों से पूछा गया की कैसे इस विकट समस्या को दूर किया जा सकता हैं तो गांव के लोगों से कहा कि गांव के पास में ही एक कुँवा है अगर इसे ही सही कर दिया जाए तो पानी की समस्सया से निजात मिल सकती है.बस यही से गांव में खुशियां लौटना शुरू हुई .ग्रामीणों ने करण सिंह के कुएं से गाद निकल कर उसे फिर से जीवित किया.कुँए में पानी आने के बाद करण सिंह ने ग्राम पंचायत के सहयोग से कुँए में मोटर डाल पूरे गांव में पाइप लाइन बिछा दी .अब गांव के लगभग 80 घरों में से 50 घर के सामने नाल लगे है जिसमे सुबह और शाम 2 से 3 घंटे पानी आता है।
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