शनिवार, 31 मार्च 2018

गूंज की मदद से मिला पानी

इंसान की बुनियादी जरुरत हैं रोटी कपड़ा और मकान.हम इन तीन चीजों के लिए ही जी जान से मेहनत करते हैं.ऐसी ही जरूरतों को पूरा कर हर मुश्किल को आसान करने का नाम ही ‘‘गूंज‘‘ हैं दरअसल मध्यप्रदेष के खंडवा जिले के आदिवासी ब्लॉक खालवा में आने वाले ग्राम मामाडोह में हर साल जल संकट की वजह से यहाँ के ग्रामीण गांव छोड़ कर पलायन कर जाते हैं.इस समस्या को समाज सेवी संस्था ‘‘गूंज‘‘ ने अपने क्लॉथ  फॉर वर्क प्रोग्राम के जरिए दूर किया.अब  ग्रांम मामाडोह में रहने वाले आदिवासियों ने पानी की समस्या को दूर कर खुद का वॉटर सप्लाय सिस्टम स्थापित किया.जो अब पुरे क्षेत्र  चर्चा का विषय बना हुआ हैं.
मधयपदेश के खंडवा जिले में पड़ने वाले आदिवासी ब्लॉक खालवा तहत आने वाली धावड़ी पंचायत का ग्राम मामाडोह.मामाडोह में रहने वाले आदिवासी पानी की बढ़ती समस्या  से इतने परेशान  गए थे की उन्हें अपना गांव तक छोड़ना पड़ता था.इतना ही नहीं इन्हें अपने मवेशी भी औने पौने दामों पर बेचने लिए मजबूर होना पड़ता था.ऐसे में मामाडोह के रहने वाले करण सिंह ने अपनी समस्या स्पंदन समाज सेवा समिति के सामने रखी .स्पंदन के प्रभारी सीमा प्रकाश ने गूंज संस्था से संपर्क कर  इस समस्या को साझा किया.गूंज संस्था ने ग्रामीणों को कपड़े और अनाज के बदले काम करने का प्रस्ताव दिया.
इस समस्या से निजात पाने के लिए जब ग्रामीणों से पूछा गया की कैसे इस विकट समस्या को दूर किया जा सकता हैं तो  गांव के लोगों से कहा कि गांव के पास में ही एक कुँवा है अगर इसे ही सही कर दिया जाए तो पानी की समस्सया से निजात मिल सकती है.बस यही से गांव में खुशियां लौटना शुरू हुई .ग्रामीणों ने करण सिंह के कुएं से गाद निकल कर उसे फिर से जीवित किया.कुँए में पानी आने के बाद करण सिंह ने ग्राम पंचायत के सहयोग से कुँए में मोटर डाल पूरे गांव में पाइप लाइन बिछा दी .अब गांव के लगभग 80 घरों में से 50 घर के सामने नाल लगे है जिसमे सुबह और शाम 2 से 3 घंटे पानी आता है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें