मध्यप्रदेश के बुरहानपुर शहर में कमल तिराहे पर पूर्वोत्तर राज्यों क्रमश: असम, मेघालय, त्रिपुरा, नागालैण्ड, अरूणाचल प्रदेश, मिजोरम तथा सिक्किम की नृत्य प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. एक ही मंच पर करीब 140 से अधिक कलाकारों ने 7 राज्यों की नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से क्षेत्र की जनता को भारत की विविधता से रूबरू कराया. इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस भी मुख्य रूप से उपस्थित रही. मंत्री चिटनिस ने दर्शकों के बीच बैठकर लोक कला की रंगारंग प्रस्तुति को देखा. उन्होंने उपस्थितजनों को लोक कलाओं का महत्व बताया. देश की संस्कृति और परंपरा मंच पर अवतरित हुई. पारंपरिक परिधानों के साथ 140 से अधिक कलाकारों ने अपनी कला का जादू बिखेरा. पूर्वोत्तर राज्यों क्रमश: असम, मेघालय, त्रिपुरा, नागालैण्ड, अरूणाचल प्रदेश, मिजोरम तथा सिक्किम की नृत्य प्रस्तुतियों से हमारी परंपराओं एवं संस्कृति का वास्तविक चित्रण देखने को मिला है. मेघालय की गारों जनजाति के वांगला नृत्य में हंड्रेड ड्रम फेस्टिवल का दर्शकों ने आनंद लिया और नागालैण्ड के थोटसे नृत्य में महिलाओं की एकता, सामर्थय और शक्ति को प्रदर्शित किया गया. पूर्वोत्तर राज्यों के नृत्य प्रस्तुति में मयूर पंख सहित अन्य पक्षियों के पंखों से किए गए श्रृंगार, नृत्य में सहजता के साथ मंद गति से तीव्रतम रूप से गतिशील होते कलाकारों ने दर्शकों को नया अनुभव प्रदान किया. असम की ओर से भोरताल नृत्य में गुरूर ब्रम्हा, गुरूर विष्णु की प्रार्थना और बिहु नृत्य में प्रदर्शित उल्लास ने जनसमुदाय को आकर्षित किया. प्रस्तुति के दौरान पुनुंग नृत्य की प्रस्तुति उपस्थितजनों में विशेष आकर्षण का केन्द्र रही. भावनाओं और कृतज्ञता को अभिव्यक्त करते हुए यह नृत्य दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ गए. पूर्णिमा की रात को अरूणाचल प्रदेश में होने वाले पुनुंग नृत्य में हरियाली और प्रकृति की सुंदरता का वर्णन किया जाता हैं. इस नृत्य के माध्यम से भगवान को अच्छी फसल और हरियाली के लिए आभार व्यक्त किया जाता है. इसी प्रकार मिजोरम का चेरउ नृत्य सुख के माहौल में किया जाने वाला नृत्य है.
मणीपुर के मार्शल आर्ट का प्रदर्शन करते हुए कलाकारों ने हैरतअंगेज तलवारबाजी के करतब दिखाए. मणीपुर के लाइ हरोबा नृत्य ने दर्शकों में आनंद का संचार कर दिया. यह नृत्य भगवान को आनंद देने वाला नृत्य माना जाता हैं. मणीपुर के लोग सुख-शांति की कामना करते हुए यह नृत्य करते है. कार्यक्रम में त्रिपुरा राज्य की त्रिपुरी जनजाति के लेबांग बुमानी नृत्य के द्वारा चैत्र ऋतु में होने वाले कीड़े को आकर्षित किया जाता हैं. मान्यता है कि इस नृत्य में डंडा बजाने की आवाज से यह कीड़ा आकर्षित होता हैं. त्रिपुरा के युवक-युवतियों में इस कीडे़ का विशेष आकर्षण हैं.
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