मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी डकैती के आरोपी सिमी आतंकियों अबू फैजल और इकरार को भोपाल जिला कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. डकैती, आतंक के लिए फंड जुटाने और षड्यंत्र के तीन अलग-अलग मामलों में अलग-अलग उम्रकैद की सजा सुनाई गई है.
2009 में मणप्पुरम गोल्ड फाइनेंस में हुई डकैती के आरोपी सिमी आतंकियों ने लूटा साढ़े 12 किलो सोना लूटा था. आठ में से 2 आरोपी अभी भी फरार हैं. गिरफ्तार 6 आतंकियों में से 4 मारे जा चुके हैं जबकि जेल में बंद अबू फैजल और इकरार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. अबु फैजल कितना खतरनाक आतंकी है. दरअसल, अबु फैजल पर खुफिया एजेंसियों की नजर सबसे पहले 2006 में पड़ी थी. इंदौर पुलिस ने वर्ष 2006 में बस स्टैंड के पास एक होटल से सिमी के 11 आतंकियों को गिरफ्तार करने का दावा किया था. इनमें अबु फैजल भी शामिल था. जमानत पर छूटने के बाद से अबु फरार हो गया था और उसने देश में कई बड़े बम धमाकों और बैंक डकैती की वारदात को अंजाम दिया.
डकैती से जुटा रहे थे धन
सफदर नागौरी की गिरफ्तारी के बाद संगठन कमजोर हुआ, तो उसे मजबूत करने के लिए उसने एक गैंग बनाई थी. ये गैंग डकैती की बड़ी वारदातों को अंजाम देती थी. एनआईए की पूछताछ में अबु फैजल ने स्वीकार किया था कि उसने मध्य प्रदेश में लूट और डकैती की पांच बड़ी वारदातों को अंजाम दिया था. इनमें भोपाल में मणप्पुरम गोल्ड नामक एक वित्तीय संस्था में वर्ष 2010 में डाका डाल कर करीब ढ़ाई करोड़ रुपये के स्वर्णाभूषण उड़ाने का मामला भी शामिल है.
गौरतलब है कि भोपाल की सेंट्रल जेल से प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े आठ विचाराधीन कैदी 31 अक्टूबर 2017 की अलसुबह भोपाल सेंट्रल जेल में कांस्टेबल की हत्या कर फरार हो गए थे. करीब 9 घंटे बाद पुलिस ने एनकाउंटर में सभी आठ कैदियों को मार गिराया था.
आठ कैदियों के भागने के दौरान आतंकी अबु फैजल भी जेल में ही मौजूद था. वो जेल से भागा तो नहीं, लेकिन उसे जेल ब्रेक का मास्टरमाइंड माना जाता है. ये आशंका जताई जाती है कि उसने ही इस पूरी साजिश को अंजाम दिया था. हत्या के दो मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा यह आतंकी देश में कई बड़ी आतंकी वारदातों में शामिल रहा है.
अबु फैजल को ढाई साल पहले तिहाड़ जेल से भोपाल सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया था. उसे दो साल पहले 30 अक्टूबर के दिन ही एटीएस सिपाही सीतराम यादव की हत्या का दोषी करार दिया था, जबकि एक दिन बाद 31 अक्टूबर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. पिछले साल सिमी कैदियों ने भोपाल जेल ब्रेक के लिए 30 और 31 अक्टूबर की रात ही चुनी थी.
सफदर की गिरफ्तारी के बाद संभाली कमान
इंदौर के श्याम नगर में वर्ष 2008 में सफदर नागौरी सहित सिमी के 13 बड़े आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद अबु फैजल ने सिमी की कमान संभाल ली. नागौरी की गिरफ्तारी पर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए अबु ने देश के कई शहरों में बम धमाकों को अंजाम दिया था.
2009 में मणप्पुरम गोल्ड फाइनेंस में हुई डकैती के आरोपी सिमी आतंकियों ने लूटा साढ़े 12 किलो सोना लूटा था. आठ में से 2 आरोपी अभी भी फरार हैं. गिरफ्तार 6 आतंकियों में से 4 मारे जा चुके हैं जबकि जेल में बंद अबू फैजल और इकरार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. अबु फैजल कितना खतरनाक आतंकी है. दरअसल, अबु फैजल पर खुफिया एजेंसियों की नजर सबसे पहले 2006 में पड़ी थी. इंदौर पुलिस ने वर्ष 2006 में बस स्टैंड के पास एक होटल से सिमी के 11 आतंकियों को गिरफ्तार करने का दावा किया था. इनमें अबु फैजल भी शामिल था. जमानत पर छूटने के बाद से अबु फरार हो गया था और उसने देश में कई बड़े बम धमाकों और बैंक डकैती की वारदात को अंजाम दिया.
डकैती से जुटा रहे थे धन
सफदर नागौरी की गिरफ्तारी के बाद संगठन कमजोर हुआ, तो उसे मजबूत करने के लिए उसने एक गैंग बनाई थी. ये गैंग डकैती की बड़ी वारदातों को अंजाम देती थी. एनआईए की पूछताछ में अबु फैजल ने स्वीकार किया था कि उसने मध्य प्रदेश में लूट और डकैती की पांच बड़ी वारदातों को अंजाम दिया था. इनमें भोपाल में मणप्पुरम गोल्ड नामक एक वित्तीय संस्था में वर्ष 2010 में डाका डाल कर करीब ढ़ाई करोड़ रुपये के स्वर्णाभूषण उड़ाने का मामला भी शामिल है.
गौरतलब है कि भोपाल की सेंट्रल जेल से प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े आठ विचाराधीन कैदी 31 अक्टूबर 2017 की अलसुबह भोपाल सेंट्रल जेल में कांस्टेबल की हत्या कर फरार हो गए थे. करीब 9 घंटे बाद पुलिस ने एनकाउंटर में सभी आठ कैदियों को मार गिराया था.
आठ कैदियों के भागने के दौरान आतंकी अबु फैजल भी जेल में ही मौजूद था. वो जेल से भागा तो नहीं, लेकिन उसे जेल ब्रेक का मास्टरमाइंड माना जाता है. ये आशंका जताई जाती है कि उसने ही इस पूरी साजिश को अंजाम दिया था. हत्या के दो मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा यह आतंकी देश में कई बड़ी आतंकी वारदातों में शामिल रहा है.
अबु फैजल को ढाई साल पहले तिहाड़ जेल से भोपाल सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया था. उसे दो साल पहले 30 अक्टूबर के दिन ही एटीएस सिपाही सीतराम यादव की हत्या का दोषी करार दिया था, जबकि एक दिन बाद 31 अक्टूबर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. पिछले साल सिमी कैदियों ने भोपाल जेल ब्रेक के लिए 30 और 31 अक्टूबर की रात ही चुनी थी.
सफदर की गिरफ्तारी के बाद संभाली कमान
इंदौर के श्याम नगर में वर्ष 2008 में सफदर नागौरी सहित सिमी के 13 बड़े आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद अबु फैजल ने सिमी की कमान संभाल ली. नागौरी की गिरफ्तारी पर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए अबु ने देश के कई शहरों में बम धमाकों को अंजाम दिया था.

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