सड़कों, अट्टालिकाओं व उद्योगों से किसी शहर व देश को भव्य तो बनाया जा सकता है पर दिव्य नहीं. भौतिकता भव्य होती है और संस्कृति दिव्यता प्रदान करती है.उक्त आशय के विचार उच्च शिक्षा एवं लोक सेवा प्रबंधन मंत्री जयभान सिंह पवैया ने व्यक्त किए. पवैया ग्वालियर में भारतीय संस्कृति से ओत-प्रोत एवं अनूठे महोत्सव नव संवत्सर-विजयोत्सव कार्यक्रम में मौजूद जन समूह को संबोधित कर रहे थे. नई पीढ़ी को भारतीय नव वर्ष के इतिहास से परिचित कराने के उद्देश्य से यह आयोजन उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया की पहल पर वीरांगना लक्ष्मीबाई बलिदान स्मारक समिति व मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार की सांध्यबेला में यहाँ कोटेश्वर मैदान पर आयोजित किया गया.विक्रम विजयोत्सव-2075 के तहत मैं हूँ नव संवत्सर नाट्य मंचन हुआ. साथ ही अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के सुविख्यात कवियों ने काव्यपाठ किया. उच्च शिक्षा मंत्री पवैया ने कहा कि देश को प्रगति के पथ पर ले जाने और सुकून बनाए रखने के लिए एक हाथ में विकास और एक हाथ में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद होना चाहिए. इसी उद्देश्य को लेकर विक्रम विजयोत्सव का आयोजन किया गया है. संभवत: इस तरह का देश का यह पहला आयोजन है.
मैं हूं नव संवत्सर की प्रस्तुति
विधाता द्वारा श्रृष्टि रचना, दुर्योधन के वध के बाद धर्मराज युद्धिष्ठर का राज्याभिषेक व विदेशी आक्रांता शकों पर विजय के बाद सम्राट विक्रमादित्य का राज्याभिषेक का जीवंत मंचन किया. चंद्रपाल सिंह सिकरवार के निर्देशन में वंदे मातरम समूह के लगभग 80 कलाकारों ने घोड़ा-रथ व बग्घियों के साथ किए गए मंचन से विक्रम विजयोत्सव के भव्य मंच पर भारतीय संस्कृति जीवंत हो उठी. इस महानाट्य से पहले वंदे मातरम समूह व माइकल ड्रांस ग्रुप के कलाकारों ने गणेश वंदना व लोक नृत्य प्रस्तुत कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत की.
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