दो वर्षो से गांव में नहीं हुआ अपराध
मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में एक न्यारा-सा गांव है, जिसका नाम है सिहोदा. यह गांव कई मायनों में दूसरे गांवों से भिन्न है. पूरे गांव में कोई भी शराब नही पीता, न ही इस गांव में अरसे से कोई अपराध हुआ है. इतना ही नहीं, सरकार की लगभग सभी कल्याणकारी योजनाओं का ग्रामवासियों को लाभ मिला है. लोक कल्याण के क्षेत्र में स्थानीय सरपंच की पहल से ग्राम पंचायत में कई नवाचार भी किए गए हैं.
सिहोदा की सरपंच हैं मीरा बाई पटेल. वे बताती हैं कि पिछले दो वर्षो से इस गांव में कोई भी अपराध नही हुआ है. गांव में जो भी लोग शराब पीते थे, उन सभी ने शराब से हमेशा के लिए तौबा कर ली है. गांव के लोगों को इन बुराईयों से मुक्त होने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले टी.आई. भेड़ाघाट एम.डी. नागोतिया भी गांव में पिछले दो वर्षोड्ड के दौरान किसी भी प्रकार का अपराध कायम न होने की पुष्टि करते हैं.
महिला सरपंच मीराबाई पटेल पूरे गांव में शराबखोरी के खिलाफ ऐसा माहौल बनाने में कामयाब हुर्इं, जिसमें शराबियों को हीन दृष्टि से देखा जाने लगा था. यही नहीं, शराब पिए हुए पाए जाने पर अथवा किसी प्रकार के अपराध से जुड़े होने की स्थिति में ऐसे लोगों को तमाम शासकीय योजनाओं के लाभों से वंचित कर िदए जाने की चेतावनी दी गई. इस प्रकार के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और नैतिक दबाव के चलते गांव में एक तरह की क्रांति हुई. आज गांव का कोई भी व्यक्ति शराब को हाथ तक नहीं लगाता. पंचायत के 57 वर्षीय कुंवरलाल कोरी बताते हैं कि वे पिछले 35 वर्षो से शराब पीते आ रहे थे, पर लोगों की समझाइश और भगवान की कृपा से उनकी शराब छूट गई.
सरपंच बताती हैं कि सिहोदा में ग्राम कन्यादान योजना भी आरंभ की गई है. इसके अन्तर्गत गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए गांव के हनुमान मंदिर में होने वाली आरती से एकत्र राशि दी जाती है. सरपंच गर्वू से बताती हैं कि नर्मदा सेवा यात्रा से लौटते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रात्रि 12 बजे भी पर्ची निकालने का उनका अनुरोध मानते हुए अपने हाथों से पर्ची निकाली. मुख्यमंत्री ने योजना की सराहना भी की. सिहोदा को जबलपुर जिले का पहला खुले में शौच से मुक्त गांव होने का श्रेय प्राप्त है.
दिलचस्प यह हैं कि ग्रामीणों की प्रबल इच्छाशक्ति के बल पर यह काम तीन माह से पहले ही पूरा कर लिया गया. गांव का सरकारी स्कूल स्वच्छता के मामले में जिले में पहले स्थान पर है. ग्राम पंचायत को निर्मल ग्राम पंचायत पुरस्कार मिल चुका है और गांव की आंगनबाड़ी स्मार्टू आंगनबाड़ी के रूप में पुरस्कृत हो चुकी है. गांव के 99 फीसदी घरों में उज्ज्वला गैस कनेक्शन उपलब्ध हैं और अप्रैल माह तक यह आंकड़ा 100 फीसदी हो जाएगा. प्रधानमंत्री आवास योजना में 110 आवास का निर्माण किया गया है. ग्रामवासी दिसंबर माह तक गांव को पूरी तरह खपरैल मुक्त बनाने के लिए प्रयासरत हैं. सिहोदा में हर चौराहे पर रोशनी के इंतजाम हैं. सरपंच की योजना है कि गांव के घर की छत पर सोलर पैनल लगाए जाएं ताकि गांव में ही बिजली का उत्पादन हो सके.
मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में एक न्यारा-सा गांव है, जिसका नाम है सिहोदा. यह गांव कई मायनों में दूसरे गांवों से भिन्न है. पूरे गांव में कोई भी शराब नही पीता, न ही इस गांव में अरसे से कोई अपराध हुआ है. इतना ही नहीं, सरकार की लगभग सभी कल्याणकारी योजनाओं का ग्रामवासियों को लाभ मिला है. लोक कल्याण के क्षेत्र में स्थानीय सरपंच की पहल से ग्राम पंचायत में कई नवाचार भी किए गए हैं.
सिहोदा की सरपंच हैं मीरा बाई पटेल. वे बताती हैं कि पिछले दो वर्षो से इस गांव में कोई भी अपराध नही हुआ है. गांव में जो भी लोग शराब पीते थे, उन सभी ने शराब से हमेशा के लिए तौबा कर ली है. गांव के लोगों को इन बुराईयों से मुक्त होने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले टी.आई. भेड़ाघाट एम.डी. नागोतिया भी गांव में पिछले दो वर्षोड्ड के दौरान किसी भी प्रकार का अपराध कायम न होने की पुष्टि करते हैं.
महिला सरपंच मीराबाई पटेल पूरे गांव में शराबखोरी के खिलाफ ऐसा माहौल बनाने में कामयाब हुर्इं, जिसमें शराबियों को हीन दृष्टि से देखा जाने लगा था. यही नहीं, शराब पिए हुए पाए जाने पर अथवा किसी प्रकार के अपराध से जुड़े होने की स्थिति में ऐसे लोगों को तमाम शासकीय योजनाओं के लाभों से वंचित कर िदए जाने की चेतावनी दी गई. इस प्रकार के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और नैतिक दबाव के चलते गांव में एक तरह की क्रांति हुई. आज गांव का कोई भी व्यक्ति शराब को हाथ तक नहीं लगाता. पंचायत के 57 वर्षीय कुंवरलाल कोरी बताते हैं कि वे पिछले 35 वर्षो से शराब पीते आ रहे थे, पर लोगों की समझाइश और भगवान की कृपा से उनकी शराब छूट गई.
सरपंच बताती हैं कि सिहोदा में ग्राम कन्यादान योजना भी आरंभ की गई है. इसके अन्तर्गत गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए गांव के हनुमान मंदिर में होने वाली आरती से एकत्र राशि दी जाती है. सरपंच गर्वू से बताती हैं कि नर्मदा सेवा यात्रा से लौटते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रात्रि 12 बजे भी पर्ची निकालने का उनका अनुरोध मानते हुए अपने हाथों से पर्ची निकाली. मुख्यमंत्री ने योजना की सराहना भी की. सिहोदा को जबलपुर जिले का पहला खुले में शौच से मुक्त गांव होने का श्रेय प्राप्त है.
दिलचस्प यह हैं कि ग्रामीणों की प्रबल इच्छाशक्ति के बल पर यह काम तीन माह से पहले ही पूरा कर लिया गया. गांव का सरकारी स्कूल स्वच्छता के मामले में जिले में पहले स्थान पर है. ग्राम पंचायत को निर्मल ग्राम पंचायत पुरस्कार मिल चुका है और गांव की आंगनबाड़ी स्मार्टू आंगनबाड़ी के रूप में पुरस्कृत हो चुकी है. गांव के 99 फीसदी घरों में उज्ज्वला गैस कनेक्शन उपलब्ध हैं और अप्रैल माह तक यह आंकड़ा 100 फीसदी हो जाएगा. प्रधानमंत्री आवास योजना में 110 आवास का निर्माण किया गया है. ग्रामवासी दिसंबर माह तक गांव को पूरी तरह खपरैल मुक्त बनाने के लिए प्रयासरत हैं. सिहोदा में हर चौराहे पर रोशनी के इंतजाम हैं. सरपंच की योजना है कि गांव के घर की छत पर सोलर पैनल लगाए जाएं ताकि गांव में ही बिजली का उत्पादन हो सके.

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