किसान संगठन भी खफा, कहा दमनकारी नीति न अपनाए सरकार
मध्यप्रदेश में एक बार फिर सरकार की चिंता को किसान संगठनों ने बढ़ाया है. 1 जून से शुरु किए जा रहे आंदोलन को हिंसक होने से रोकने के लिए सरकार पूरी तैयारी कर रही है. वहीं किसान संगठनों को सरकार के द्वारा उठाए जा रहे सुरक्षा के कदमों से नाराजगी है. किसान से भराए जा रहे बांडों को लेकर किसान संगठन और कांग्रेस दोनों ही विरोध कर रहे हैं, जबकि सरकार इसे प्रतिबंधात्मक नोटिस बताकर यह संदेश दे रही है कि नोटिस केवल इसलिए जारी किए गए हैं ताकि लोग कानून को अपने हाथ में न लें. कांग्रेस ने सरकार के इस कदम को प्रदेश में अराजकता फैलाने वाला बताया है.
मध्यप्रदेश में 22 राज्यों के किसान संगठनों के साथ 1 जून से शुरु हो रहे गांव बंद आंदोलन को लेकर सरकार की चिंता बढ़ती जा रही है. सरकार ने आंदोलन को लेकर सुरक्षा के हर इंतजाम किए हैं. लगातार पुलिस महानिदेशक ऋषिकुमार शुक्ला और राज्य के मुख्य सचिव बी.पी.सिंह खुद जिलों से सुरक्षा की जानकारी ले रहे हैं. सरकार को अब तक मिले फीड बेक के बाद सरकार ने यह प्रयास किया है कि दलित आंदोलन और पिछले किसान आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा जैसी स्थिति निर्मित न हो. सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों खासकर मालवा के जिलों में इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है. सरकार द्वारा उठाए जा रहे सुरक्षा के कदमों को लेकर विरोध भी शुरु हो गय है. किसान संगठनों के अलावा कांग्रेस द्वारा इसका खासा विरोध किया जा रहा है. राष्ट्रीय मजदूर किसान महासभा के अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा कक्काजी ने सरकार द्वारा लोगों से भराए जा रहे बांडों का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा यह दमनकारी नीति के तहत किया जा रहा है. सरकार को इसे बंद करना चाहिए. इसके गंभीर परिणाम होंगे. कक्काजी ने कहा कि अगर सरकार ने इस दमनकारी नीति को नहीं रोका तो इससे खफा होकर किसान विद्रोह भी कर सकता है.
वहीं कांग्रेस ने इस मुद्दे पर विरोध जताया है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि किसान आंदोलन और राहुल गांधी की सभा मे किसानों को जाने से रोकने के लिए पूरी सरकार मैदान में है, यदि सरकार ने किसानों के हित मे काम किए है तो बौखलाहट क्यों है. उन्होंने कहा कि 80 साल के बुजुर्ग किसान से भी बांड भरवाया जा रहा है. गोली से मृत किसान के भाई को भी नोटिस दिया गया है. हजारों किसानों को ,व्यापारियों को भी शांति भंग के नोटिस दिए गए हैं. सरकार का यह कदम उचित नहीं है. सरकार खुद अराजकता का माहौल बना रही है. सरकार के इस कदम से माहौल बिगड़ भी सकता है.
तैनात की 89 कंपनिया, 5 हजार जवान
प्रदेश सरकार आंदोलन के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति नियंत्रित रहे, इसके लिए पूरे प्रदेश में विशेष रूप से उन स्थानों पर जहां किसान आंदोलन की खबरें मिल रही थी. वहां पर पुलिस और जिला प्रशासन को किसानों के साथ सीधा संवाद करने और उनकी परेशानियों को दूर करने का काम किया जा रहा है. इसके अलावा सरकार ने किसान आंदोलन से निपटने के लिए एसएएफ की 89 कंपनियां और लगभग 5000 जवानों को विभिन्न स्थानों पर तैनात किया गया है. पुलिस बल को डंडे, हेलमेट, बॉडी, ट्राली और कार्बोनेट शील्ड की व्यवस्था की गई है. ताकि सुरक्षा बल अपनी सुरक्षा करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से किसानों के आंदोलन का नियंत्रित कर सके.
मध्यप्रदेश में एक बार फिर सरकार की चिंता को किसान संगठनों ने बढ़ाया है. 1 जून से शुरु किए जा रहे आंदोलन को हिंसक होने से रोकने के लिए सरकार पूरी तैयारी कर रही है. वहीं किसान संगठनों को सरकार के द्वारा उठाए जा रहे सुरक्षा के कदमों से नाराजगी है. किसान से भराए जा रहे बांडों को लेकर किसान संगठन और कांग्रेस दोनों ही विरोध कर रहे हैं, जबकि सरकार इसे प्रतिबंधात्मक नोटिस बताकर यह संदेश दे रही है कि नोटिस केवल इसलिए जारी किए गए हैं ताकि लोग कानून को अपने हाथ में न लें. कांग्रेस ने सरकार के इस कदम को प्रदेश में अराजकता फैलाने वाला बताया है.
मध्यप्रदेश में 22 राज्यों के किसान संगठनों के साथ 1 जून से शुरु हो रहे गांव बंद आंदोलन को लेकर सरकार की चिंता बढ़ती जा रही है. सरकार ने आंदोलन को लेकर सुरक्षा के हर इंतजाम किए हैं. लगातार पुलिस महानिदेशक ऋषिकुमार शुक्ला और राज्य के मुख्य सचिव बी.पी.सिंह खुद जिलों से सुरक्षा की जानकारी ले रहे हैं. सरकार को अब तक मिले फीड बेक के बाद सरकार ने यह प्रयास किया है कि दलित आंदोलन और पिछले किसान आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा जैसी स्थिति निर्मित न हो. सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों खासकर मालवा के जिलों में इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है. सरकार द्वारा उठाए जा रहे सुरक्षा के कदमों को लेकर विरोध भी शुरु हो गय है. किसान संगठनों के अलावा कांग्रेस द्वारा इसका खासा विरोध किया जा रहा है. राष्ट्रीय मजदूर किसान महासभा के अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा कक्काजी ने सरकार द्वारा लोगों से भराए जा रहे बांडों का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा यह दमनकारी नीति के तहत किया जा रहा है. सरकार को इसे बंद करना चाहिए. इसके गंभीर परिणाम होंगे. कक्काजी ने कहा कि अगर सरकार ने इस दमनकारी नीति को नहीं रोका तो इससे खफा होकर किसान विद्रोह भी कर सकता है.
वहीं कांग्रेस ने इस मुद्दे पर विरोध जताया है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि किसान आंदोलन और राहुल गांधी की सभा मे किसानों को जाने से रोकने के लिए पूरी सरकार मैदान में है, यदि सरकार ने किसानों के हित मे काम किए है तो बौखलाहट क्यों है. उन्होंने कहा कि 80 साल के बुजुर्ग किसान से भी बांड भरवाया जा रहा है. गोली से मृत किसान के भाई को भी नोटिस दिया गया है. हजारों किसानों को ,व्यापारियों को भी शांति भंग के नोटिस दिए गए हैं. सरकार का यह कदम उचित नहीं है. सरकार खुद अराजकता का माहौल बना रही है. सरकार के इस कदम से माहौल बिगड़ भी सकता है.
तैनात की 89 कंपनिया, 5 हजार जवान
प्रदेश सरकार आंदोलन के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति नियंत्रित रहे, इसके लिए पूरे प्रदेश में विशेष रूप से उन स्थानों पर जहां किसान आंदोलन की खबरें मिल रही थी. वहां पर पुलिस और जिला प्रशासन को किसानों के साथ सीधा संवाद करने और उनकी परेशानियों को दूर करने का काम किया जा रहा है. इसके अलावा सरकार ने किसान आंदोलन से निपटने के लिए एसएएफ की 89 कंपनियां और लगभग 5000 जवानों को विभिन्न स्थानों पर तैनात किया गया है. पुलिस बल को डंडे, हेलमेट, बॉडी, ट्राली और कार्बोनेट शील्ड की व्यवस्था की गई है. ताकि सुरक्षा बल अपनी सुरक्षा करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से किसानों के आंदोलन का नियंत्रित कर सके.
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