भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष अपराध बोध से ग्रसित होकर किसान परस्त भाजपा पर मिथ्या दोषारोपण कर स्वयं हास्य का पात्र बन रहे है. कदाचित कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ भूल रहे है कि तत्कालीन कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार ने 1997 में जब बैतूल जिले के किसान अतिवृष्टि से नष्ट फसल पर राहत की मांग कर रहे थे. दिग्विजय सिंह सरकार ने किसानों पर बर्बर गोली कांड कर 18 किसानों को मौत के घाट उतार कर किसानों पर 68 मामले थोप दिए थे.
शर्मा ने कहा कि प्रदेश में मंदसौर में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना की सूत्रधार स्वयं कांग्रेस थी और उसने अराजकता को प्रोत्साहन देकर अराजक तत्वों को औजार बनाया. भाजपा सरकार ने किसानोन्मुखी उदार नीतियों को अमलीजामा पहनाया है. यदि कांग्रेस को किसानों की चिंता होती तो किसानोन्मुखी कार्यक्रमों पर रचनात्मक सुझाव दिए होते तो प्रदेश की प्रगति के लिए सिर्फ सत्ता पक्ष ही नहीं विपक्ष की उत्तरदायी होता है.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसान पुत्र शिवराजसिंह चौहान सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप वास्तव में कांग्रेस का किसानों के साथ भद्दा मजाक है. प्रदेश में खेती के क्षेत्र में निरंतर हो रहा विकास कांग्रेस की आंख की किरकिरी बन चुका है. किसानों की बढ़ती आय कांग्रेस को रूचिकर नहीं लग रही है. वास्तव में दिग्विजय सिंह ने किसानों को अगड़े पिछड़ों में विभाजित कर सरकार ने किसानों, पशुपालकों के लिए प्रावधानित 7 प्रतिशत चरनोई भूमि बंदरबांट कर दिया जिससे प्रदेश में गौवंश के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है. गांवों में फशाद इस कदम बढे कि सामूहिक जुमार्ना लगाने की नौबत आ गयी थी. भाजपा शासन में गांव, गरीब, किसान, मजदूर अच्छे दिनों का अहसास कर रहे है. भाजपा सरकार की नीति की परिणति प्रदेश को मिले पांचवे कृषि कर्मण अवार्ड के रूप में हुई है.
शर्मा ने कहा कि जब कांग्रेस ने 1993 में सत्ता संभाली थी. मध्यप्रदेश भारत का चैथे नंबर पर कृषि उत्पादक राज्य था जो दिग्विजय सिंह सरकार में 13 वे नंबर पर पहुंच गया था. बीमारू राज्य बन गया था. भाजपा की 14 वर्ष की सरकार ने मध्यप्रदेश को बीमारू राज्य से देश का प्रगतिशील राज्य बना दिया है. जहां किसान की आय 2022 तक दोगुना हो जायेगी. कांग्रेस के शासन में नकली बीज, नकली खाद बेचने वाले माफिया के पौबारह थे. विधानसभा में स्वयं मंत्री ने स्वीकार किया था कि किसानों को उपलब्ध कराया गया डेढ लाख क्विंटल सोयाबीन बीज और साढ़े सात सौ क्विंटल कपास बीज नकली थी. फिर भी किसान राहत से वंचित रहे थे.
शर्मा ने कहा कि प्रदेश में मंदसौर में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना की सूत्रधार स्वयं कांग्रेस थी और उसने अराजकता को प्रोत्साहन देकर अराजक तत्वों को औजार बनाया. भाजपा सरकार ने किसानोन्मुखी उदार नीतियों को अमलीजामा पहनाया है. यदि कांग्रेस को किसानों की चिंता होती तो किसानोन्मुखी कार्यक्रमों पर रचनात्मक सुझाव दिए होते तो प्रदेश की प्रगति के लिए सिर्फ सत्ता पक्ष ही नहीं विपक्ष की उत्तरदायी होता है.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसान पुत्र शिवराजसिंह चौहान सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप वास्तव में कांग्रेस का किसानों के साथ भद्दा मजाक है. प्रदेश में खेती के क्षेत्र में निरंतर हो रहा विकास कांग्रेस की आंख की किरकिरी बन चुका है. किसानों की बढ़ती आय कांग्रेस को रूचिकर नहीं लग रही है. वास्तव में दिग्विजय सिंह ने किसानों को अगड़े पिछड़ों में विभाजित कर सरकार ने किसानों, पशुपालकों के लिए प्रावधानित 7 प्रतिशत चरनोई भूमि बंदरबांट कर दिया जिससे प्रदेश में गौवंश के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है. गांवों में फशाद इस कदम बढे कि सामूहिक जुमार्ना लगाने की नौबत आ गयी थी. भाजपा शासन में गांव, गरीब, किसान, मजदूर अच्छे दिनों का अहसास कर रहे है. भाजपा सरकार की नीति की परिणति प्रदेश को मिले पांचवे कृषि कर्मण अवार्ड के रूप में हुई है.
शर्मा ने कहा कि जब कांग्रेस ने 1993 में सत्ता संभाली थी. मध्यप्रदेश भारत का चैथे नंबर पर कृषि उत्पादक राज्य था जो दिग्विजय सिंह सरकार में 13 वे नंबर पर पहुंच गया था. बीमारू राज्य बन गया था. भाजपा की 14 वर्ष की सरकार ने मध्यप्रदेश को बीमारू राज्य से देश का प्रगतिशील राज्य बना दिया है. जहां किसान की आय 2022 तक दोगुना हो जायेगी. कांग्रेस के शासन में नकली बीज, नकली खाद बेचने वाले माफिया के पौबारह थे. विधानसभा में स्वयं मंत्री ने स्वीकार किया था कि किसानों को उपलब्ध कराया गया डेढ लाख क्विंटल सोयाबीन बीज और साढ़े सात सौ क्विंटल कपास बीज नकली थी. फिर भी किसान राहत से वंचित रहे थे.
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