संविदा कर्मचारी अब नहीं निकाले जाएंगे
राज्य सरकार ने चुनावी साल में आज फिर कर्मचारियों को साधने का फैसला लिया है. इस फैसले के तहत सरकार ने अध्याकों को शिक्षा विभाग में संविलियन करने का फैसला लिया है. सरकार के इस फैसले से 2 लाख 37 हजार अध्यापकों को फायदा मिलेगा. इसके अलावा संविदा कर्मचारियों को नहीं निकालने का भी फैसला किया है. साथ ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया जो कर्मचारियों की वेतन विसंगति की मांगों को सुनेगी.
राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने यह फैसला लिया. फैसले की जानकारी राज्य सरकार के प्रवक्ता और जनसंपर्क मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए दी. उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने अध्यापकों को शिक्षा विभाग संविलियन करने का फैसला लिया है. सरकार के इस फैसले का लाभ प्रदेश के 2 लाख 37 हजार अध्यापकों को मिलेगा. उन्होंने बताया कि इनमें स्थानीय निकायों द्वारा नियुक्त और वर्तमान में कार्यरत लगभग 1 लाख 84 हजार स्कूल शिक्षा विभाग के हैं. इसी तरह 53 हजार अध्यापक जनजातीय कार्य विभाग के हैं. मंत्री ने बताया कि अब अध्यापकों को सरकारी कर्मचारी माना जाएगा और 1 जुलाई से अध्यापकों को सातवें वेतनमान का फायदा दिया जाएगा.
नहीं हटाए जाएंगे संविदा कर्मचारी
जनसंपर्क मंत्री ने बताया कि संविदा कर्मचारियों अब हटाया नहीं जाएगा. अब प्रदेश के संविदा कर्मचारियों को सरकार की नियमित भर्ती में बीस प्रतिशत का लाभ मिलेगा. संविदा कर्मचारियों के हित में किये सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 2 लाख संविदा कर्मचारियों को लाभ मिलेगा. उन्होंने बताया कि संविदा पर कार्यरत सेवकों को ई.पी.एफ. और राष्ट्रीय पेंशन का लाभ यदि नहीं मिल रहा है तो उन्हें राष्ट्रीय पेंशन योजना का लाभ दिया जाएगा. यहीं नहीं 13 दिन का आकस्मिक अवकाश, 15 दिन अर्जित अवकाश तथा 10 दिन का लघुकृत अवकाश भी मिलेगा.
वेतन संबंधी मांगे सुनने के लिए बनाई कमेटी
वेतन विसंगति के संबंध में अनुशंसाओं पर आज उपयंत्री, वाणिज्यिकर निरीक्षक एवं कराधान सहायक, पुलिस विभाग के सहायक उप निरीक्षक एवं प्रधान आरक्षक, राजस्व निरीक्षक, कंपाउन्डर, मंत्रालय के अनुभाग अधिकारी एवं निज सचिव, सहायक जिला अभियोजन अधिकारी, उप जेलर, नापतौल निरीक्षक, उपपंजीयक आदि के ग्रेड वेतन में निर्णय लिया गया. वेतनमान संबंधी शेष मांगों पर विचार के लिए अपर मुख्य सचिव वित्त की अध्यक्षता समिति की गठन किया गया है. कैबिनेट के फैसले से लगभग 50 हजार शासकीय सेवक लाभांवित होंगे.
अब शिक्षकों का एक कैडर
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने पहले कर्मी कल्चर को समाप्त किया और शिक्षकों को अध्यापक बनाया. इस व्यवस्था में वे कहीं जिले के तो कहीं नगरीय निकायों के कर्मचारी थे. अब केबिनेट में यह फैसला लिया गया है कि अध्यापकों का संविलियन शिक्षा विभाग में कर शिक्षकों का एक कैडर कर दिया जाएगा. अब शिक्षकों का एक ही कैडर है और ये राज्य शासन के कर्मचारी हैं. यह नहीं होने के कारण वे कई सुविधाओं से वंचित थे.
राज्य सरकार ने चुनावी साल में आज फिर कर्मचारियों को साधने का फैसला लिया है. इस फैसले के तहत सरकार ने अध्याकों को शिक्षा विभाग में संविलियन करने का फैसला लिया है. सरकार के इस फैसले से 2 लाख 37 हजार अध्यापकों को फायदा मिलेगा. इसके अलावा संविदा कर्मचारियों को नहीं निकालने का भी फैसला किया है. साथ ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया जो कर्मचारियों की वेतन विसंगति की मांगों को सुनेगी.
राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने यह फैसला लिया. फैसले की जानकारी राज्य सरकार के प्रवक्ता और जनसंपर्क मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए दी. उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने अध्यापकों को शिक्षा विभाग संविलियन करने का फैसला लिया है. सरकार के इस फैसले का लाभ प्रदेश के 2 लाख 37 हजार अध्यापकों को मिलेगा. उन्होंने बताया कि इनमें स्थानीय निकायों द्वारा नियुक्त और वर्तमान में कार्यरत लगभग 1 लाख 84 हजार स्कूल शिक्षा विभाग के हैं. इसी तरह 53 हजार अध्यापक जनजातीय कार्य विभाग के हैं. मंत्री ने बताया कि अब अध्यापकों को सरकारी कर्मचारी माना जाएगा और 1 जुलाई से अध्यापकों को सातवें वेतनमान का फायदा दिया जाएगा.
नहीं हटाए जाएंगे संविदा कर्मचारी
जनसंपर्क मंत्री ने बताया कि संविदा कर्मचारियों अब हटाया नहीं जाएगा. अब प्रदेश के संविदा कर्मचारियों को सरकार की नियमित भर्ती में बीस प्रतिशत का लाभ मिलेगा. संविदा कर्मचारियों के हित में किये सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 2 लाख संविदा कर्मचारियों को लाभ मिलेगा. उन्होंने बताया कि संविदा पर कार्यरत सेवकों को ई.पी.एफ. और राष्ट्रीय पेंशन का लाभ यदि नहीं मिल रहा है तो उन्हें राष्ट्रीय पेंशन योजना का लाभ दिया जाएगा. यहीं नहीं 13 दिन का आकस्मिक अवकाश, 15 दिन अर्जित अवकाश तथा 10 दिन का लघुकृत अवकाश भी मिलेगा.
वेतन संबंधी मांगे सुनने के लिए बनाई कमेटी
वेतन विसंगति के संबंध में अनुशंसाओं पर आज उपयंत्री, वाणिज्यिकर निरीक्षक एवं कराधान सहायक, पुलिस विभाग के सहायक उप निरीक्षक एवं प्रधान आरक्षक, राजस्व निरीक्षक, कंपाउन्डर, मंत्रालय के अनुभाग अधिकारी एवं निज सचिव, सहायक जिला अभियोजन अधिकारी, उप जेलर, नापतौल निरीक्षक, उपपंजीयक आदि के ग्रेड वेतन में निर्णय लिया गया. वेतनमान संबंधी शेष मांगों पर विचार के लिए अपर मुख्य सचिव वित्त की अध्यक्षता समिति की गठन किया गया है. कैबिनेट के फैसले से लगभग 50 हजार शासकीय सेवक लाभांवित होंगे.
अब शिक्षकों का एक कैडर
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने पहले कर्मी कल्चर को समाप्त किया और शिक्षकों को अध्यापक बनाया. इस व्यवस्था में वे कहीं जिले के तो कहीं नगरीय निकायों के कर्मचारी थे. अब केबिनेट में यह फैसला लिया गया है कि अध्यापकों का संविलियन शिक्षा विभाग में कर शिक्षकों का एक कैडर कर दिया जाएगा. अब शिक्षकों का एक ही कैडर है और ये राज्य शासन के कर्मचारी हैं. यह नहीं होने के कारण वे कई सुविधाओं से वंचित थे.
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