राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान, भोपाल में चमगादड़ के खून और सीरम की जांच में ऐसा कुछ भी नहीं पाया गया है. सभी रिपोर्ट्स नेगेटिव आई हैं. इनमें बताया गया है कि यह वायरस फैलने की मुख्य वजह चमगादड़ नहीं हैँ.
केरल में इस वायरस की चपेट में आने की वजह से अभी तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं 20 लोग अस्पताल में भर्ती हैं. स्वास्थ्य और पशुपालन अधिकारी संक्रमण के संभावित स्रोतों की तलाश कर रहे हैं. जब अधिकारियों ने मूसा परिवार के कुएं में चमगादड़ को देखा तो उन्हें लगा था कि उन्हें स्रोत का पता लग गया. बता दें, चमगादड़ में एनआईवी(निपाह) वायरस प्राकृतिक तौर पर पाया जाता है, जिससे यह दूसरे जानवरों और इंसानों में जा सकता है. इसलिए अधिकारियों ने चमगादड़ का ब्लड सैंपल और सीरम देश की सबसे बड़ी पशु जांच लैब में भेजा था. लेकिन वहां पर ऐसे कोई परिणाम समाने नहीं आए.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक निपाह एक ऐसा वायरस है जो चमगादड़ों से इंसानों में फैलता है. यह जानवरों और इंसानों दोनों में गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है. इस वायरस का मुख्य स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ (फ्रूट बैट) हैं. इन्हें फ्लाइंग फॉक्स के नाम से भी जाना जाता है.
निपाह वायरस के लक्षण दिमागी बुखार की तरह ही हैं. बीमारी की शुरुआत सांस लेने में दिक्कत, चक्कर आना, तेज सिरदर्द और फिर बुखार से होती है है. इसके बाद बुखार दिमाग तक पहुंच जाता है, जिससे मरीज की मौत भी हो सकती है.
हालांकि, अब तक इस भयानक निपाह वायरस का कोई वैक्सीन नहीं बन पाया है. बचाव ही इसका एकमात्र इलाज है. इससे संक्रमित रोगी की उचित देखभाल और डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रखा जाना चाहिए.
केरल में इस वायरस की चपेट में आने की वजह से अभी तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं 20 लोग अस्पताल में भर्ती हैं. स्वास्थ्य और पशुपालन अधिकारी संक्रमण के संभावित स्रोतों की तलाश कर रहे हैं. जब अधिकारियों ने मूसा परिवार के कुएं में चमगादड़ को देखा तो उन्हें लगा था कि उन्हें स्रोत का पता लग गया. बता दें, चमगादड़ में एनआईवी(निपाह) वायरस प्राकृतिक तौर पर पाया जाता है, जिससे यह दूसरे जानवरों और इंसानों में जा सकता है. इसलिए अधिकारियों ने चमगादड़ का ब्लड सैंपल और सीरम देश की सबसे बड़ी पशु जांच लैब में भेजा था. लेकिन वहां पर ऐसे कोई परिणाम समाने नहीं आए.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक निपाह एक ऐसा वायरस है जो चमगादड़ों से इंसानों में फैलता है. यह जानवरों और इंसानों दोनों में गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है. इस वायरस का मुख्य स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ (फ्रूट बैट) हैं. इन्हें फ्लाइंग फॉक्स के नाम से भी जाना जाता है.
निपाह वायरस के लक्षण दिमागी बुखार की तरह ही हैं. बीमारी की शुरुआत सांस लेने में दिक्कत, चक्कर आना, तेज सिरदर्द और फिर बुखार से होती है है. इसके बाद बुखार दिमाग तक पहुंच जाता है, जिससे मरीज की मौत भी हो सकती है.
हालांकि, अब तक इस भयानक निपाह वायरस का कोई वैक्सीन नहीं बन पाया है. बचाव ही इसका एकमात्र इलाज है. इससे संक्रमित रोगी की उचित देखभाल और डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रखा जाना चाहिए.
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