रविवार, 27 मई 2018

किसान को हालात से उबारना जरुरी

आम आदमी पार्टी का अनशन जारी
आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक आलोक अग्रवाल ने पार्टी के अनिश्चितकालीन अनशन के दूसरे दिन कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज किसान के जो हालात हैं, उससे किसानों को उबारने के लिए हम सभी को आगे आना होगा. उन्होंने कहा कि किसान के उपजाये अन्न से ही हमारा शरीर बनता है और इसलिए वह हमारे मां-बाप हैं. 
अनशन स्थल पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस वक्त किसान जो हमारे शरीर को बनाने वाले मां-बाप हैं, उन पर आपत्ति आई है, तो इसे हमें मिलकर ही टालना है. अगर आज हम यह नहीं करेंगे तो हम अपने आप को कभी माफ नहीं कर पाएंगे. आज जो हालात हैं, उसमें हर विरोध की आवाज को, चाहे वह कोई भी आवाज हो, उसे दबाने का प्रयास होता है. किसानों पर गोली चला दी जाती है, तो अन्य आवाजों को भी कुचल दिया जाता है. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में हम अपनी सबसे बड़ी कोशिश जो कर सकते हैं, वह यह है कि हम अपना जीवन दांव पर लगा सकते हैं. गांधीजी भी ऐसा किया करते थे. जब भी बहुत गंभीर स्थितियां बन जाती हैं, तो एक आम इंसान के लिए अनशन एक बड़ी ताकत होती है.  
उन्होंने कहा कि हमें अनशन का अर्थ भी समझना चाहिए. अनशन का मतलब क्या होता है. जो देश-प्रदेश में गड़बडिय़ां चल रही हैं, जो अन्याय हो रहा है. किसान मर रहा है. तो ऐसे हालात में हम अनशन कर इस कष्ट को अपने शरीर पर लेते हैं. यह अनशन सिर्फ सरकार के लिए नहीं होता. यह पूरे देश के लिए होता है. हम देशवासियों का अनशन के जरिये आह्वान करते हैं कि किसानों के, युवाओं के, बिजली के, आम आदमी के इन मुद्दों पर आप भी उठ खड़े हों. उन्होंने कहा कि जब सबकी आवाज मिलेगी, तो सरकार को सुनना ही पड़ेगा. 
उन्होंने कहा कि हम चार साथियों से हो सकता है, वह हम कर रहे हैं. इसमें शरीर को कष्ट तो होता है, लेकिन हमें यह भी समझना होगा कि इससे किसानों का कष्ट बहुत बड़ा है. हम जिस गर्मी में बैठ नहीं पाते हैं, उस गर्मी में किसान लाइन में लगा होता है, और मर रहा है. आप सोचिए कि जो किसान आत्महत्या कर रहा है, वह किस पीड़ा में होगा. जिसका परिवार भूखा है और उसे कर्ज देने वाला परेशान कर रहा है. ऐसे हालात में कुछ किसान रोज आत्महत्या कर रहे हैं और ऐसे लाखों किसान हैं, तो हालात से परेशान हैं. उन्होंने कहा कि आत्महत्या तो किसान के लिए अंतिम विकल्प है. कितने ही किसान इस कगार पर हैं. हमें इसे रोकना है. अपनी जान को दांव पर लगाकर इसे रोकना है. 
उन्होंने कहा कि जो लोग यह समझ रहे हैं कि यह कोई चुनावी स्टंट है, तो उनसे कहना चाहते हैं कि चुनाव तो अभी छह महीने दूर हैं. जिस गति से किसान आत्महत्या कर रहे हैं, उससे तो चुनाव तक 1000 किसान और आत्महत्या कर लेंगे, तो हम इसका इंतजार नहीं कर सकते हैं. इसलिए हम अनशन पर बैठे हैं. उन्होंने प्रदेश भर से आए कार्यकतार्ओं से अपील की कि पूरे प्रदेश की जनता तक किसानों के हालात को पहुंचाना होगा और इस जागृति को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा कर हम इस लड़ाई को प्रदेश व्यापी बनाएंगे. 




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