गुरुवार, 24 मई 2018

बच्चों के नाम पर मांगे वोट

  बच्चों के मुद्दे पर हुए विमर्श में कहा राजनेताओं ने
राजनीतिक दलों को बच्चों के मुद्दों पर वोट मांगना चाहिए. बच्चों के नाम पर वोट न मांगकर उनकी समस्याओं को चुनावी एजेंडे में शामिल किया जाना चाहिए. शिक्षा और स्वास्थ्य में निजीकरण को समाप्त किया जाना चाहिए, तभी बच्चों को शिक्षा मिलना आसान होगी. 
ये बातें आज राजधानी में चाइल्उ राइट्स आब्जर्वेटरी मध्यप्रदेश द्वारा राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों के साथ किए गए विमर्श में सामने आई. विमर्श में सभी ने माना कि आज बच्चों का मुद्दा अह्म है. विमर्श में  भारतीय जनता पार्टी की ओर से स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री दीपक जोशी ने कहा कि सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ की दिशा में उल्लेखनीय काम किए हैं जिससे इनसे संबंधित संकेतक बेहतर हुए हैं. जोशी ने आश्वस्त किया की इस कार्यक्रम के माध्यम से जो सुझाव मिलेंगे उन्हें बीजेपी के घोषणा पत्र में शामिल करेगी. लोकतांत्रिक समाजवादी दल के रघु ठाकुर ने कहा कि सभी वर्गों के लोगों को एक समान शिक्षा मिलना चाहिए.  कांग्रेस पार्टी के ओर से पूर्व मंत्री राजा पटेरिया ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ से बड़ा कोई व्यापार नहीं है. इन क्षेत्रों में निजीकरण पर सख्ती से रोक लगाई जाए. सीपीआई के सचिव शैलेन्द्र शैली ने सुझाव दिया कि शिक्षा और स्वास्थ का बजट बढ़ाया जाए और रिक्त पद भरे जाएं. 
 सीपीआईएम के बादल सरोज ने कहा कि बच्चों के नाम पर वोट नहीं मांगे जाते हैं, बच्चों को चुनावी एजेंडा में लाने और उस पर पालन करने की आवश्यकता है. आम आदमी पार्टी की प्रतिनिधि चितरूपा पालित ने कहा कि बालिकाओं के स्कूल दूर होने के कारण बालिकाएं पढ़ने नहीं जाती, उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश के कई हिस्सों में बेटियों को पैदा ही नहीं होने दिया जा रहा है. इस बारे में चेतना लाना भी हमारी जिम्मेदारी होना चाहिए. यूनिसेफ के संचार विशेषज्ञ अनिल गुलाटी ने कहा कि इस बार राजनैतिक दलों को चुनाव में बच्चों के मुद्दों पर वोट मांगे.
राजनीतिक दलों को भेजेंगे सुझाव
 चाइल्ड राइट्स आब्जर्बेटरी की अध्यक्ष निर्मला बुच ने कहा कि बच्चों के मुद्दों को राजनैतिक दलों, सरकार  और समाज की प्राथमिकताओं में लाना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि आज के कार्यक्रम में प्राप्त सुझावों को राजनैतिक दलों को घोषणा पत्र में शामिल करने के लिए भेजा जाएगा और राजनैतिक दल  इस संबंध में जो सहयोग चाहेंगे वह चाइल्ड राइट्स आॅब्जर्वेटरी द्वारा दिया जाएगा. चुनाव के पश्चात हम सब मिलकर बच्चों से जुड़े मुद्दों की माइक्रो और मेक्रो लेवल पर निगरानी करेंगे, ताकि किए गए वादों का सफल क्रियान्वयन हो और प्रदेश बच्चों के संबंध में बेहतर बने.
एक माह में प्रति हजार 32 नवजात शिशुओं की होती है मौत
यूनिसेफ की स्वास्थ विशेषज्ञ डॉ. वंदना भाटिया ने प्रदेश में स्वास्थ के मुद्दों पर चर्चा करते हुए बताया कि प्रदेश में जन्म से एक माह के अंदर 32 प्रति हजार नवजात शिशुओं और जन्म से एक वर्ष के अंदर 47 प्रति हजार शिशुओं की मौत हो जाती है. डॉक्टर भाटिया ने यह भी बताया कि जन्म से एक घंटे के अन्दर नवजात शिशु को मां का दूध मिलने और सम्पूर्ण टीकाकरण में सुधार के लिए और भी अधिक प्रयास जरूरी हैं साथ ही नवजात शिशु मृत्यु दर पर नियंत्रण के लिए मातृ सुरक्षा देखभाल भी आवश्यक है. यह ऐसे मुद्दे हैं जिन पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है.

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