सोमवार, 28 मई 2018

किसानों के पसीने का पूरा मूल्य मिले, यही मध्यप्रदेश सरकार का संकल्प

मध्यप्रदेश की खेती देश में हमेशा सर्वश्रेष्ठ बनी रहे, इस दिशा में हम कार्य कर रहे हैं. प्रधानमंत्री का सपना है कि सन 2022 तक प्रत्येक किसान की आय दोगुनी हो जाये. इस दिशा में हम सतत आगे बढ़ रहे हैं. इस कार्य में मध्यप्रदेश का किसान भी अपना सहयोग प्रदान कर रहा है. जिसके कारण आज प्रदेश में हर फसल का भरपूर उत्पादन हो रहा है.
प्रदेश के मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चैहान ने  इन्दौर में आयोजित मध्यप्रदेश श्रेष्ठ कृषि क्रान्ति कार्यक्रम में उपस्थित किसानों को सम्बोधित करते हुए उक्त बाते कही.   कार्यक्रम में उपस्थित किसानों को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे अच्छी तरह से जानते हैं कि मध्यप्रदेश को विकास के रास्ते पर ले जाना है तो सबसे ज्यादा ध्यान खेती पर देना होगा. इस दिशा में उन्होंने पिछले 12 साल में प्रयास करते हुए सिंचित क्षेत्र को  7 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर आज 40 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा दिया है. अब आगे इसे बढ़ाकर 80 लाख हेक्टेयर करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं. इसलिये नदी जोड़ो जैसे कार्य किये जा रहे हैं. वहीं किसानों को सिंचाई हेतु निर्धारित समय पर भरपूर बिजली मिले, इसके लिये फीडर सेपरेशन का कार्य भी किया गया है. साथ ही किसानों को शून्य प्रतिशत पर ऋण, किसान समृद्धि योजना के तहत बोनस की राशि, बीज बदलने की व्यवस्था, एडवान्स खाद उठाने पर लगने वाले ब्याज को शून्य करना, भावान्तर भुगतान जैसे प्रयोग करना, लहसून, चने, मसूर की खरीदी का भी मूल्य निर्धारित करने जैसे कार्य किये गये हैं. यह सब कार्य किसानों को उनके पसीने का वाजीब दाम दिलवाने के लिये किये गये हैं.    किसानों की तालियों के गड़गड़ाहट के बीच मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूँ बेचने वाले किसान  भूल गये थे, किन्तु उन्होंने याद रख कर 200 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बोनस की राशि इस वर्ष दिलवाई है. अब इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूँ बेचने वाले किसानों को 265 रुपए प्रति क्विंटल बोनस की राशि दिलवाई जायेगी.    मुख्यमंत्री ने बताया कि आज मध्यप्रदेश में हर फसल का भरपूर उत्पादन हो रहा है. इसके कारण कुछ परेशानियाँ भी किसानों को आ रही है. उनकी फसल का वाजीब दाम मिले इसके लिये अब प्रदेश की सरकार उन्हें बतायेगी कि वे अपने खेत में क्या लगायें, जिससे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित होने वाले फसल मूल्य का उन्हें भरपूर लाभ मिल सके.

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