मंगलवार, 6 फ़रवरी 2018

रोजगार के अवसर देने में नाकाम रही भाजपा सरकार

आम आदमी पार्टी की युवा शक्ति ने आरोप लगाया कि प्रदेश की भाजपा सरकार रोजगार देने में नाकाम रही है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पकोड़े तलने को लेकर दिए बयान की भी निंदा की है.
आम आदमी पार्टी की युवा शक्ति के प्रदेश संयोजक और प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य निशांत गंगवानी ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि देश में साल 2013-14 में बेरोजगारी की दर 4.9 प्रतिशत थी, जो साल वित्त वर्ष 2015-16 में बढ़कर 5 प्रतिशत हो गई है. चालू वित्त वर्ष में यह और बढेÞ की आशंका है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी के हालात और भी खराब हैं. प्रदेश की भाजपा सरकार के पास बेरोजगार युवकों के लिए न तो कोई नीति है न ही प्रदेश सरकार की नीयत है कि वह रोजगार सृजन करे.
उन्होंने कहा कि प्रदेश ही नहीं देश में भी रोजगार के हालात बेहद खराब हैं. उसके बावजूद प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष युवाओं को पकौड़ा तलने की सलाह देते हैं, यह शर्मनाक है. उन्होंने बताया कि इंडिया स्पैंड की मई 2017 की रिपोर्ट बताती है कि उत्पादन, व्यापार, निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य, सूचना प्राद्यौगिकी, परिवहन, होटल जैसे प्रमुख क्षेत्रों में जुलाई 2011 से दिसम्बर 2013 के बीच 12 लाख 8 हजार रोजगार उत्पन्न हुए, जो जुलाई 2014 से दिसम्बर 2016  के बीच घटकर महज 6 लाख 41 हजार रह गए.यानी दो साल में रोजगार के अवसरों में 50 फीसदी की गिरावट आई है. यह चिंताजनक है और इसके लिए भाजपा सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं. 
उन्होंने कहा कि जब पढ़ा-लिखा युवा मेहनती युवा नौकरी के अभाव में कोई स्वरोजगार करता है, तो उसे भाजपा सरकार अपनी उपलब्धि की तरह दशार्ती है, यह शर्मनाक है. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार नीतियों में बदलाव कर जो गिने चुने रोजगार के अवसर हैं, उन्हें भी छीन रही है. पटवारी की भर्ती में पहले योग्यता दसवीं पास होती थी, जिसे बढ़ाकर ग्रेजुएट कर दी गई. इससे एक बड़े वर्ग को इस अवसर से वंचित कर दिया गया. इतना ही नहीं महज 9235 पदों के लिए 12 लाख से भी अधिक आवेदन आए. इनमें भी 3 लाख आवेदक ऐसे थे, जिनकी योग्यता पोस्ट ग्रेजुएशन या उससे अधिक थी.20000 आवेदकों के पास पीएचडी की डिग्री थी. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हालात कितने विकट हैं. जाहिर है कि युवा अपनी योग्यता से कमतर पदों पर भी काम करने को तैयार हैं. यह अप्रत्यक्ष बेरोजगारी का अनूठा उदाहरण है.  उन्होंने बताया कि इससे पहले ग्वालियर हाई कोर्ट में चपरासी के 57 पदों के लिए जिसका वेतन महज 7500 रुपए था, उस पर 60 हजार से अधिक आवेदन आए. इसके लिए एमबीए, इंजीनियरिंग और पीएचडी के छात्रों ने भी आवेदन दिया.



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