गुरुवार, 8 मार्च 2018

नर्मदा, एकात्म यात्रा पर खर्च किए 2811 लाख

मध्यप्रदेश में निकाली गई नर्मदा और एकात्म यात्रा पर सरकार ने 2811 लाख रुपए खर्च किए हैं. नर्मदा यात्रा में मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद ने सहयोगी के रुप में काम किया है.
यह जानकारी आज राज्य विधानसभा में कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी के प्रश्न के लिखित जवाब में वन मंत्री डा. गौरीशंकर शैजवार ने दी. मंत्री ने बताया कि नर्मदा यात्रा पर 1837.28 लाख एवं एकात्म यात्रा पर 973.93 लाख रुपए खर्च किए गए. दोनों यात्राओं पर कुल खर्च 2811.21 लाख रुपए हुआ है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2016-17 में आयोजित नर्मदा यात्रा के मूल बजट से राशि 900.75 लाख रुपए, 500 लाख रुपए पुनर्विनियोजन मद से एवं 2017-18 ें 1600 लाख रुपए मूल बजट से इस तरह कुल 3000.75 लाख रुपए प्राप्त हुए. वर्ष 2017-18 में एकात्म यात्रा के लिए आकस्मिता निधि से 1047.67 लाख रुपए प्राप्त किए. मंत्री ने बताया कि शैव महोत्सव योजना विभाग से संबंधित नहीं है. उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल परेड मैदान से मुख्यमंत्री शिवराजसिंंह चौहान ने नमामि  देवी नर्मदे यात्रा की घोषणा की है.
उपयंत्रियों को दी पदोन्नति
विधायक हिना लिखीराम कावरे के प्रश्न के लिखित जवाब में पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव ने बताया कि ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अंतर्गत पत्राचार पाठ्यक्रम के माध्यम से सिविल इंजीनियरिंग की बीई डिग्री प्राप्त करने वाले 48 उपयंत्रियों को पदोन्नति दी गई है.मंत्री ने बताया कि ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के उपयंत्रियों की 2006 से अब तक कुल 4 डीपीसी की गई है. अमान्य डिग्री के आधार पर पदोन्नति को लेकर मंत्री ने बताया कि इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के परिप्रेक्ष्य में योग्य जांच कर यथोचित निर्णय लिया जाएगा.
नीलाम की रेत खदानें
विधायक जतन उइके के प्रश्न के लिखित जवाब में खनिज मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बताया कि छिंदवाड़ा जिले के पांढुर्णा विधानसभा क्षेत्र के सौंसर विधानसभा क्षेत्र में सभी रेत खदानें नीलमा की गई हैं. उन्होंने बताया कि क्षेत्र में ऐसी कोई नदियां नहीं हैं, जहां पर रेत होने से जिला प्रशासन को इसकी खदान घोषित करने में विलंब हुआ हो.
नहीं बदला आयोग का नाम
विधायक हिना लिखीराम कावरे के प्रश्न के लिखित जवाब में वन मंत्री डा. गौरीशंकर बिसेन ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा योजना आयोग का नाम बदलकर नीति आयोग किए जाने के बाद मध्यप्रदेश में अभी योजना आयोग का नाम परिवर्तित नहीं किया गया है. उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है. नीतिगत विषय होने कारण इसकी समय-सीमा निर्धारित करना संभव नहीं है. एक अन्य प्रश्न के जवाब में उन्होंने बताया कि विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजनांतर्गत शासकीय भवनों के मरम्मत के लिए अधिकतम एक लाख रुपए खर्च करने का प्रावधान किया गया है.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें