2013 के चुनाव में 156 किसान बने थे विधायक
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में किसान, विधायक बने थे. राज्य की 230 विधानसभा सीटों के लिए 2013 के चुनाव में 156 उम्मीदवार ऐसे थे, जो किसानी के पेशे से जुड़े थे. किसान के अलावा उद्योग, चिकित्सा और वकालत जैसे पैसे से जुड़े लोग भी विधायक बने, मगर इनकी संख्या कम ही थी. इस चुनाव में दो गृहणियां भी विधायक बनी थी.
मध्यप्रदेश में विधानसभा में किसान चुनाव जीतकर विधानसभा तो पहुंच जाते हैं, मगर किसानों की समस्याओं को लेकर उनकी गंभीरता नजर नहीं आती है. किसान बीते लंबे समय से समस्याओं से जूझ रहा है, प्रदेश में किसान आत्महत्या का आंकड़ा बढ़ रहा है, लेकिन किसान से विधायक बने भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के विधायकों ने सरकार के सामने किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए.
वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में देखा जाए तो मध्यप्रदेश विधानसभा पहुंचे विधायकों में अधिकांश विधायक किसान थे. इनका व्यवसाय किसानी था, इसके बाद भी किसानों की समस्याओं को लेकर इनकी गंभीरता नजर नहीं आई. प्रदेश में मंदसौर गोली कांड के अलावा फसल बीमा और मुआवजे की मांग को लेकर प्रदेश के किसान आंदोलन करते रहे, मगर विधायकों ने दूरी बनाई. सत्ता पक्ष के विधायकों के अलावा विपक्षी दल कांग्रेस के विधायक भी मौन रहे, चुनावी साल में जरुर कांग्रेस सक्रिय हुई और सड़कों पर उतरकर किसानों के साथ आंदोलन किए. इस चुनाव में किसानों के निशाने पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के विधायक हैं. हरदा, नरसिंहपुर जिलों के किसानों ने तो इनके खिलाफ ‘वोट बंदी अभियान’ चलाया हुआ है.
किसान नेता को किया कांग्रेस में शामिल
आम किसान यूनियन के नेता केदार शंकर सिरोही ने जब भाजपा और कांग्रेस के विधायकों के खिलाफ ‘वोट बंदी अभियान’ चलाया और हरदा जिले के साथ-साथ मालवा में उन्होंने सक्रियता दिखाई तो सरकार की चिंता बढ़ी. कांग्रेस ने चुनावी साल में मौका देखा और केदार सिरोही को कांग्रेस में शामिल कर खेत मजदूर किसान कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया. अब सिरोही किसानों के बीच सिर्फ भाजपा के खिलाफ माहौल बना रहे हैं. कांग्रेस अब इस किसान नेता को हरदा या फिर मालवा अंचल से चुनाव लड़ाना चाह रही है.
उद्योग से जुडे लोग भी बने विधायक
पिछले चुनाव में किसानों के अलावा उद्योग, व्यापार से जुडे लोग भी विधायक बने थे. इस व्यवसाय से जुड़े 30 लोग विधायक बने थे. जबकि वकालत कर रहे 13 लोग भी विधायक बने थे. वहीं चिकित्सा से जुड़े 2, पत्रकारिता से जुड़े 2, स्कूल और होटल संचालक 4, ठेकेदारी व्यवसाय से जुड़े 3 लोग विधायक बने थे.वहीं 2 गृहणियां भी विधायक बनी थी. जबकि 18 ऐसे विधायक थे, जिन्होंने अपने पेशे का उल्लेख नहीं किया था.
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में किसान, विधायक बने थे. राज्य की 230 विधानसभा सीटों के लिए 2013 के चुनाव में 156 उम्मीदवार ऐसे थे, जो किसानी के पेशे से जुड़े थे. किसान के अलावा उद्योग, चिकित्सा और वकालत जैसे पैसे से जुड़े लोग भी विधायक बने, मगर इनकी संख्या कम ही थी. इस चुनाव में दो गृहणियां भी विधायक बनी थी.
मध्यप्रदेश में विधानसभा में किसान चुनाव जीतकर विधानसभा तो पहुंच जाते हैं, मगर किसानों की समस्याओं को लेकर उनकी गंभीरता नजर नहीं आती है. किसान बीते लंबे समय से समस्याओं से जूझ रहा है, प्रदेश में किसान आत्महत्या का आंकड़ा बढ़ रहा है, लेकिन किसान से विधायक बने भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के विधायकों ने सरकार के सामने किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए.
वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में देखा जाए तो मध्यप्रदेश विधानसभा पहुंचे विधायकों में अधिकांश विधायक किसान थे. इनका व्यवसाय किसानी था, इसके बाद भी किसानों की समस्याओं को लेकर इनकी गंभीरता नजर नहीं आई. प्रदेश में मंदसौर गोली कांड के अलावा फसल बीमा और मुआवजे की मांग को लेकर प्रदेश के किसान आंदोलन करते रहे, मगर विधायकों ने दूरी बनाई. सत्ता पक्ष के विधायकों के अलावा विपक्षी दल कांग्रेस के विधायक भी मौन रहे, चुनावी साल में जरुर कांग्रेस सक्रिय हुई और सड़कों पर उतरकर किसानों के साथ आंदोलन किए. इस चुनाव में किसानों के निशाने पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के विधायक हैं. हरदा, नरसिंहपुर जिलों के किसानों ने तो इनके खिलाफ ‘वोट बंदी अभियान’ चलाया हुआ है.
किसान नेता को किया कांग्रेस में शामिल
आम किसान यूनियन के नेता केदार शंकर सिरोही ने जब भाजपा और कांग्रेस के विधायकों के खिलाफ ‘वोट बंदी अभियान’ चलाया और हरदा जिले के साथ-साथ मालवा में उन्होंने सक्रियता दिखाई तो सरकार की चिंता बढ़ी. कांग्रेस ने चुनावी साल में मौका देखा और केदार सिरोही को कांग्रेस में शामिल कर खेत मजदूर किसान कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया. अब सिरोही किसानों के बीच सिर्फ भाजपा के खिलाफ माहौल बना रहे हैं. कांग्रेस अब इस किसान नेता को हरदा या फिर मालवा अंचल से चुनाव लड़ाना चाह रही है.
उद्योग से जुडे लोग भी बने विधायक
पिछले चुनाव में किसानों के अलावा उद्योग, व्यापार से जुडे लोग भी विधायक बने थे. इस व्यवसाय से जुड़े 30 लोग विधायक बने थे. जबकि वकालत कर रहे 13 लोग भी विधायक बने थे. वहीं चिकित्सा से जुड़े 2, पत्रकारिता से जुड़े 2, स्कूल और होटल संचालक 4, ठेकेदारी व्यवसाय से जुड़े 3 लोग विधायक बने थे.वहीं 2 गृहणियां भी विधायक बनी थी. जबकि 18 ऐसे विधायक थे, जिन्होंने अपने पेशे का उल्लेख नहीं किया था.
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