बयान के बाद उठने लगे सवाल
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के परिवारवाद, वंशवाद को टिकट से दूर रखने के बयान के बाद भाजपा में राजनीति गर्मा गई है. टिकट की बांट जोह रहे नेता पुत्र कुछ हद तक चिंतित हुए हैं, मगर शाह टिकट बंटवारे के वक्त कद्दावर नेताओं के पुत्रों और परिजनों को किस तरह से टिकट से वंचित कर पाएंगे, यह कहना अभी मुश्किल है.
मध्यप्रदेश प्रवास पर आए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बयान के बाद भाजपा में विशेषकर नेता और मंत्री पुत्रों में जो टिकट के लिए दावेदारी कर रहे थे, में चिंता दिखाई दे रही है. हालांकि शाह का अभी बयान ही सामने आया है, उन्होंने इसे रोकने की बात कही है, मगर टिकट वितरण के वक्त मचने वाले घमासान के दौरान वे किस तरह से इसे रोक पाएंगे, यह कहना संभव नहीं है.
मध्यप्रदेश भाजपा में पिछला इतिहास देखा जाए तो परिवारवाद को लेकर कई बार इस तरह के बयान आए, मगर उस पर अमल नहीं हो पाया. इसका उदाहरण राजमाता सिंधिया की पुत्री खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया, राजमाता की भाभी नगरीय निकाय मंत्री माया सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के पुत्री शिक्षा राज्य मंत्री दीपक जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री वीरेन्द्र कुमार सखलेचा के पुत्र विधायक ओम प्रकाश सखलेचा, पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेन्द्र पटवा, भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश नारायण सारंग के पुत्र सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, पूर्व मंत्री लक्ष्मण गौड की पत्नी मालिनी गौड, पूर्व मंत्री तुकोजीराव पंवार की पत्नी गायत्री राजे पंवार, पूर्व विधायक राजेन्द्र दादू की पुत्री नेपानगर से विधायक मंजू दादू, पूर्व विधायक किशोरी लाल वर्मा के पुत्र खण्डवा से विधायक देवेन्द्र वर्मा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी के पुत्र अशोक रोहाणी है. इन नेता पुत्रों को टिकट से लेकर मंत्री बनाने तक भाजपा में विरोध हुआ, मगर इन्हें रोका नहीं जा सका.
ये नेता पुत्र, परिजन हैं कतार में
भाजपा में इस बार विधानसभा चुनाव के लिए आधा दर्जन मंत्री पुत्र मैदान में उतरने की तैयारी कर चुके थे, मगर टिकट वितरण के ऐन वक्त पहले शाह के बयान से निराशा हुई, मगर अभी यह कहा नहीं जा सकता कि संगठन इस पर अमल कर पाएगा. अधिकांश मंत्री संगठन में अपना वजनदारी रखते हैं, जिसके चलते वे लंबे समय से अपने पुत्रों के लिए जद्दोजहद कर मैदान तैयार कर चुके थे. ऐसे में इन्हें रोक पाना असंभव सा लगता है. मुख्यमंत्री शिवराजसिंंह चौहान खुद अपने पुत्र कार्तिकेय चौहान के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं. मुख्यमंत्री के अलावा मंत्रियों पदाधिकारियों में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के पुत्र देवेन्द्र प्रताप सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा अपने पुत्र तुष्मुल झा, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र आकाश विजयवर्गीय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के पुत्र हर्षवर्धन सिंह, वित्त मंत्री जयंत मलैया के पुत्र सिद्धार्थ मलैया, ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव के पुत्र अभिषेक भार्गव, जल संसाधन मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा के पुत्र सुकर्ण मिश्रा, वन मंत्री गौरीशंकर शैजवार के पुत्र मुदित शैजवार और कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन की पुत्री मौसम बिसेन हैं.
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के परिवारवाद, वंशवाद को टिकट से दूर रखने के बयान के बाद भाजपा में राजनीति गर्मा गई है. टिकट की बांट जोह रहे नेता पुत्र कुछ हद तक चिंतित हुए हैं, मगर शाह टिकट बंटवारे के वक्त कद्दावर नेताओं के पुत्रों और परिजनों को किस तरह से टिकट से वंचित कर पाएंगे, यह कहना अभी मुश्किल है.
मध्यप्रदेश प्रवास पर आए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बयान के बाद भाजपा में विशेषकर नेता और मंत्री पुत्रों में जो टिकट के लिए दावेदारी कर रहे थे, में चिंता दिखाई दे रही है. हालांकि शाह का अभी बयान ही सामने आया है, उन्होंने इसे रोकने की बात कही है, मगर टिकट वितरण के वक्त मचने वाले घमासान के दौरान वे किस तरह से इसे रोक पाएंगे, यह कहना संभव नहीं है.
मध्यप्रदेश भाजपा में पिछला इतिहास देखा जाए तो परिवारवाद को लेकर कई बार इस तरह के बयान आए, मगर उस पर अमल नहीं हो पाया. इसका उदाहरण राजमाता सिंधिया की पुत्री खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया, राजमाता की भाभी नगरीय निकाय मंत्री माया सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के पुत्री शिक्षा राज्य मंत्री दीपक जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री वीरेन्द्र कुमार सखलेचा के पुत्र विधायक ओम प्रकाश सखलेचा, पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेन्द्र पटवा, भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश नारायण सारंग के पुत्र सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, पूर्व मंत्री लक्ष्मण गौड की पत्नी मालिनी गौड, पूर्व मंत्री तुकोजीराव पंवार की पत्नी गायत्री राजे पंवार, पूर्व विधायक राजेन्द्र दादू की पुत्री नेपानगर से विधायक मंजू दादू, पूर्व विधायक किशोरी लाल वर्मा के पुत्र खण्डवा से विधायक देवेन्द्र वर्मा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी के पुत्र अशोक रोहाणी है. इन नेता पुत्रों को टिकट से लेकर मंत्री बनाने तक भाजपा में विरोध हुआ, मगर इन्हें रोका नहीं जा सका.
ये नेता पुत्र, परिजन हैं कतार में
भाजपा में इस बार विधानसभा चुनाव के लिए आधा दर्जन मंत्री पुत्र मैदान में उतरने की तैयारी कर चुके थे, मगर टिकट वितरण के ऐन वक्त पहले शाह के बयान से निराशा हुई, मगर अभी यह कहा नहीं जा सकता कि संगठन इस पर अमल कर पाएगा. अधिकांश मंत्री संगठन में अपना वजनदारी रखते हैं, जिसके चलते वे लंबे समय से अपने पुत्रों के लिए जद्दोजहद कर मैदान तैयार कर चुके थे. ऐसे में इन्हें रोक पाना असंभव सा लगता है. मुख्यमंत्री शिवराजसिंंह चौहान खुद अपने पुत्र कार्तिकेय चौहान के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं. मुख्यमंत्री के अलावा मंत्रियों पदाधिकारियों में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के पुत्र देवेन्द्र प्रताप सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा अपने पुत्र तुष्मुल झा, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र आकाश विजयवर्गीय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के पुत्र हर्षवर्धन सिंह, वित्त मंत्री जयंत मलैया के पुत्र सिद्धार्थ मलैया, ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव के पुत्र अभिषेक भार्गव, जल संसाधन मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा के पुत्र सुकर्ण मिश्रा, वन मंत्री गौरीशंकर शैजवार के पुत्र मुदित शैजवार और कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन की पुत्री मौसम बिसेन हैं.
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