मध्यप्रदेश में चुनाव को लेकर भाजपा में एस्ट्रोसिटी एक्ट को लेकर हुए भय नजर आने लगा है. मध्यप्रदेश दौरे पर आए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने घोषणा पत्र बना रही समिति के अध्यक्ष विक्रम वर्मा से यह पूछ ही लिया कि पार्टी ने सवर्ण मतदाता के लिए घोषणा पत्र में क्या रखा है? शाह ने पदाधिकारियों से चर्चा की और चुनावी रणनीति को लेकर जानकारी भी ली.
भाजपा में सवर्ण समाज को लेकर चिंता ज्यादा नजर आने लगी है. सवर्ण समाज के आंदोलन का विरोध भी भाजपा को ज्यादा छेलना पड़ा था. इसे देखते हुए दो दिवसीय मध्यप्रदेश दौरे पर आए अमित शाह भी चिंतित नजर आए. शाह ने होशंगाबाद से रविवार की रात को भोपाल लौटने के बाद सीधे पार्टी कार्यालय पहुंचे. यहां पर उन्होंने राष्ट्रीय महामंत्री रामलाल, भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे, प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत सहित अन्य पदाधिकारियों से चर्चा की. इस चर्चा के दौरान घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष विक्रम वर्मा से उन्होंने पूछ लिया कि घोषणा पत्र में सवर्णो के लिए क्या रखा गया है. इस पर वर्मा कोई जवाब नहीं दे पाए, मगर शाह ने यह पूछकर साफ कर दिया कि अगर भाजपा ने सवर्ण समाज के लिए कुछ घोषणा नहीं की तो परेशानी हो सकती है. बताया जाता है कि पार्टी इसी माह घोषणा पत्र जारी कर देगी.
अगले माह घोषित होंगे प्रत्याशी
अमित शाह ने पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में मंत्री और विधायकों की ऐसी सीटों पर चर्चा हुई, जो फीडबैक में खतरे वाली आई हैं. भाजपा ने तीन प्रकार के सर्वे कराए हैं. इसमें निजी एजेंसी, संगठन और शाह का सर्वे है. जिन इलाकों में बहुत ज्यादा एंटी-इन्कम्बेंसी है, वहां वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी देना तय हुआ. 16 व 17 अक्तूबर को टिकटों के लिए जिलों में फिर रायशुमारी करना तय हुआ. बैठक में अधूरे काम जल्द पूरे करने व सोशल मीडिया पर प्रचार बढ़ाने के लिए भी कहा गया. दशहरे के बाद बड़ा जनसंपर्क अभियान चलेगा. घर-घर कार्यकर्ता पहुंचेंगे.
समीधा पहुंचे शाह, पदाधिकारियों की चर्चा
अमित शाह आज रीवा और सतना जाने के पूर्व संघ कार्यालय समीधा पहुंचे. यहां पर उन्होंने संघ पदाधिकारियों से चर्चा की. बताया जा रहा है कि संघ पदाधिकारियों ने चुनाव को लेकर शाह को फीडबेक दिया है. इसके अलावा उन्हें प्रदेश में भाजपा की स्थिति को लेकर भी जानकारी दी गई है. शाह के साथ प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत, प्रदेश भाजपा प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे भी थे.
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