मध्यप्रदेश में संघ के गढ़ माने जाने वाले मालवा अंचल में विधानसभा सभा की 50 सीटों पर घमासान मचना तय है. इस बार यहां पर कांगे्रस और भाजपा दोनों ही दलों के लिए नए क्षेत्रीय दल चिंता का कारण बन गए हैं. जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) और बहुजन संघर्ष दल ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है.
मालवा अंचल में इस बार क्षेत्रीय दलों की उपस्थिति ने भाजपा और कांग्रेस को चिंता में डाला है. मालवा वह अंचल रहा जहां भाजपा को हमेशा ही बढ़त हासिल हुई है. इसके पीछे संघ की मेहनत को माना जाता रहा है. यहां से कई संघ के नेता निकले, जिन्होंने मालवा को अपनी कर्म भूमि बनाया, मगर इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए यह अंचल ज्यादा परेशानी का कारण बन रहा है. इस अंचल में युवा से जुड़ेजय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) का खासा प्रभााव इस बार नजर आ रहा है. अजजा वर्ग के लिए आरक्षित 22 सीटों पर जयस का सीधा प्रभाव दिखाई दे रहा हे. इसके अलावा सामान्य वर्ग की 6 विधानसभा सीटों पर भी जयस ने प्रभाव बनाया है. साथ ही जयस ने इस बार 80 सीटों पर प्रत्याशी मैदान में उतारने का फैसला लिया है.
जयस के अलावा क्षेत्रीय दल बहुजन संघर्ष दल ने भी यहां पर पिछले चुनाव में उपस्थिति दर्ज कराई है. हालांकि जीत उसके खाते में नहीं गई, मगर 2013 के विधानसभा चुनाव में बहुजन संघर्ष दल ने इस अंचल की 21 सीटों पर अच्छे वोट पाए थे. इस दल का यह पहला चुनाव था, मगर इसके बाद बहुजन संघर्ष दल ने यहां पर अपनी पैठ जमाई और पांच साल की मेहनत के बाद करीब एक दर्जन सीटों पर उसने अपना प्रभाव जमाया है.
देंगे करारी टक्कर
जयस के संरक्षक डा. हीरालाल अलावा का कहना है कि इस बार हमारे युवा प्रत्याशी मैदान में होंगे. हमने जिन 80 विधानसभा सीटों पर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है, वहां पर हम करारी टक्कर देंगे. डा. अलावा ने बताया कि हम जल्द ही प्रत्याशियों की घोषणा करने वाले हैं.
परिणामों को करेंगे प्रभावित
बहुजन संघर्ष दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष फूलसिंह बरैया का कहना है कि हमने राज्य के ग्वालियर-चंबल अंचल के बाद मालवा में पैठ जमाई है. बरैया ने कहा कि बीते चुनाव में 21 विधानसभा क्षेत्रों में हमें केवल वोट मिले थे, मगर इस बार हम अधिकांश सीटों पर परिणामों को प्रभावित करेंगे और इस अंचल में खाता भी खोलेंगे.
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