रविवार, 14 अक्टूबर 2018

रुठों को मनाने के बजाए जुझारु युवाओं पर कांग्रेस को भरोसा



मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने रुठे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को मनाने के बजाए प्रदेश के जुझारु युवाओं को पार्टी में शामिल करने का अभियान तेज किया है. इसके तहत किसान नेता केदार शंकर सिरोही, अनुसूचित जाति वर्ग के देवाशीष जरारिया और किसान एवं आदिवासियों के बीच चर्चित चेहरा अर्जुन आर्य को पार्टी में शामिल किया है. कांग्रेस की नजर अब भील आदिवासियों का नेतृत्व कर रहे डा. हीरालाल अलावा पर टिकी है.
मध्यप्रदेश कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालने के बाद कमलनाथ ने पूर्व मंत्री इंद्रजीत सिंंह पटेल की अध्यक्षता में कांग्रेस का घर वापसी अभियान चलाया था. इस अभियान का मकसद था कि 2003 के बाद से जो कांग्रेस नेता नाराज होकर भाजपा और अन्य दलों में शामिल हुए, उनकी घर वापसी कराई जाए. इस अभियान के तहत छोटे नेताओं ने रुचि दिखाई और उनकी घर वापसी भी हुई, मगर कांग्रेस छोड़कर गए वरिष्ठ नेताओं ने समिति के सामने वापसी के लिए न तो आवेदन दिया और न ही वापसी के लिए वरिष्ठ नेताओं के बीच रुचि दिखाई. अभियान के तहत 100 से भी कम नेताओं की घर वापसी हुई. कांग्रेस को भरोसा था कि सांसद डा. भागीरथ प्रसाद, युवा नेता चौधरी राकेश सिंह, सांसद उदय प्रताप सिंह आदि नेताओं की घर वापसी होगी, मगर ऐसा नहीं हुआ.
घर वापसी की विफलता को देख कांग्रेस नेता चिंतित नहीं हुए, बल्कि उन्होंने प्रदेश के नए और युवा चेहरों की तलाश की जो अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों के बीच उनके अधिकारों के लिए संघर्ष कर शिवराज सरकार की चिंता के कारण बन गए थे. इन नेताओं को कांग्रेस ने धीरे-धीरे कर अपनाना शुरु कर दिया. इसमें सबसे पहले सफलता कांग्रेस को अनुसूचित जाति वर्ग के लिए संघर्ष कर रहे युवा नेता देवाशीष जरारिया के रुप में मिली.  इसके बाद किसान नेता केदार शंकर सिरोही और फिर किसानों और आदिवासियों के बीच उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले अर्जुन आर्य को कांग्रेस ने अपने पाले में ला खड़ा किया. अब कांग्रेस की नजर मालवा-निमाड़ में भील आदिवासियों का नेतृत्व कर रहे डा. हीरालाल अलावा पर टिकी है.  कांग्रेस प्रदेश के इन चार युवाओं के जरिए भाजपा के खिलाफ बने माहौल का फायदा उठाकर भाजपा को शिकस्त देना चाह रही है. 
वोट बंदी अभियान से मिली पहचान

मध्यप्रदेश के हरदा जिले में केदार शंकर सिरोही किसानों की फसल बीमा मुआवजा सहित अन्य मांगों को लेकर आम किसान यूनियन के माध्यम से आंदोलन चलाकर शिवराज सरकार के लिए परेशानी बन गए थे. सिरोही ने जल्द ही नरसिंहपुर जिले में गन्ना किसानों के बीच अपनी पैठ जमाई और फिर मालवा-निमाड़ में किसान आंदोलन को जन्म दिया. इसके बाद वे सरकार के लिए मुसीबत बनते गए. इस बीच कांग्रेस की नजर उन पर टिकी और उन्हें कांग्रेस में शामिल करने का प्रयास तेज हुआ. सिरोही को कांग्रेस में सदस्यता दिलाकर उन्हें किसान खेत मजदूर कांग्रेस का कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. अब वे अपनी सक्रियता दिखाकर कांग्रेस के पक्ष में किसानों को लाने में जुटे हैं.
सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को बसपा से जोड़ा

ग्वालियर के रहने वाले देवाशीष जरारिया दिल्ली में रहकर आईएएस की तैयारी में जुटे थे. इस बीच उन्होंने अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों की समस्याओं को लेकर फेसबुक और ट्वीटर के जरिए अभियान चलाया और बसपा के पक्ष में बड़ी संख्या में युवाओं को जोड़ा.  उन्होंने अपनी बात भी न्यूज चैनलों पर डिबेट के जरिए लोगों तक पहुंचाई और अनुसूचित जाति वर्ग की समस्याओं को सामने लाए. देवाशीष अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों के साथ आदिवासियों के उत्थान की बात कहते है. वे डा. हीरालाल अलावा को अपना अच्छा दोस्त मानते हैं. देवाशीष जरारिया मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति, जनजाति कर्मचारी संगठन (अजाक्स) के महासचिव डा. पी.सी. जाटव के बेटे हैं.
दिग्विजय मिलने पहुंचे थे जेल
अर्जुन आर्य भी कालेज के समय से ही राजनीति में सक्रियता दिखा रहे हैं. सपा के अखिलेश यादव से उनकी मित्रता भी अध्ययनकाल के समय ही हुई और दो बार खातेगांव विधानसभा सीट से उन्होंने  सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा. इस बार उन्होंने बुधनी विधानसभा क्षेत्र को अपनी कर्मभूमि बनाकर यहां पर लंबे समय से आदिवासियों और किसानों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. नसरुल्लागंज में किसान आंदोलन के दौरान जब उन्हें जेल भेज दिया तब अचानक पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की नजर में वे आए.  इसके बाद राजनीतिक क्षेत्र में कांग्रेस में आकर काम करने के लिए उन्हें मनाया गया. हालांकि अखिलेश यादव ने सपा के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश सिंह को भेजकर अर्जुन की जमानत कराई थी और फिर उन्हें बुधनी से सपा का टिकट दिया था, मगर अर्जुन ने टिकट ससम्मान लौटा दिया था. अब वे कांग्रेस में शामिल हो गए हैं.
आदिवासी युवाओं के बीच बनाई अपनी पैठ
पेशे से एम्स दिल्ली में चिकित्सक रहे डा. हीरालाल अलावा ने भी नौकरी करते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से भील समुदाय के युवाओं को जोड़ा और आदिवासी युवा पंचायत की. इसके बाद नौकरी छोड़ी और मध्यप्रदेश में आदिवासियों के बीच सक्रिय हो गए. उन्होंने राजस्थान और झारखंड में जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) के माध्यम से आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं. डा. अलावा ने प्रदेश में 80 विधानसभा क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार मैदान में उतारने की घोषणा की है. कांगे्रस अब इस नेता को कांग्रेस में शामिल होने के लिए तैयार कर रही है. अगर वे कांग्रेस में शामिल नहीं होते हैं तो कांग्रेस मालवा अंचल में अनुसूचित जाति वर्ग की सीटों पर उनके साथ गठबंधन कर सकती है.
डा. आनंद राय ने मिलवाया था दिग्विजय सिंह से 

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की भूमिका इन नेताओं को कांग्रेस में शामिल करने के लिए रही.   इन सबको को कांग्रेस के पक्ष में लाने की कवायद व्यापमं घोटाले का पदार्फाश करने वाले व्हिसल ब्लोअर डा. आनंद राय ने की. डा. राय ने पिछले दिनों इंदौर में अपने निवास पर मध्यप्रदेश की राजनीतिक क्षितिज पर चमकने वाले तीन युवाओं आदिवासी नेता डा. हीरालाल अलावा, बुदनी में सक्रिय अर्जुन आर्य और देवाशीष जरारिया की मुलाकात कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह से कराई. दिग्विजय सिंह ने उसी दिन डा. आनंद राय सहित इन तीनों युवाओं को भी कांग्रेस में आने का न्यौता दिया. इसके बाद एक-एक कर दो नेताओं ने कांग्रेस का दामन थाम लिया. केदार शंकर सिरोही किसान नेता के रुप में अपनी छवि बना चुके थे.  दिग्विजय सिंह से  नर्मदा यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात हुई थी. इस मुलाकात में सिरोही को कांग्रेस में आकर किसानों की लड़ाई लड़ने को सिंह ने प्रेरित किया था.

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