चौथा सवाल करते हुए शिवराज, मोदी सरकार को घेरा कमलनाथ ने
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ आज मंगलवार को चौथा सवाल पूछते हुए प्रदेश की गरीबी व पिछड़ेपन को लेकर शिवराज सरकार का घेराव किया है. उन्होंने कहा कि 'वो ही फैला रहे हैं स्वर्णिम से समृद्धि का झूठ, जिन्होंने लिया मध्यप्रदेश को लूट 'मामाजी, क्या समृद्धि का नारा भाजपा नेताओं और मंत्रियों के लिए गढ़ा?
कमलनाथ ने आज शिवराज सरकार के अलावा मोदी सरकार को भी घेरा. उन्होंने पूछा कि मोदी सरकार ने राज्यों का संपत्ति सूचकांक जारी किया है, जिसमें प्रदेश के सिर्फ़ 15.8 प्रतिशत परिवार ही इसके दायरे में आते हैं. इतनी खराब स्थिति बड़े राज्यों में छत्तीसगढ़ और बिहार की है, जहां चंडीगढ़ के 78.5 प्रतिशत, पंजाब के 60.7 प्रतिशत, हिमाचल जैसे राज्य के 31 प्रतिशत परिवार संपन्न हैं. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की सितम्बर 2017 (एनएफएचएस) में जारी रिपोर्ट बताती है कि 2006 से 2016 के बीच मध्यप्रदेश में गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों की जनसंख्या 27 प्रतिशत बढ़ गई है. केंद्र के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा किए गए सर्वे (2016) में मध्यप्रदेश में सिर्फ 36 प्रतिशत लोग पक्के घरों में रहते है.
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में सिर्फ 23 प्रतिशत घरों में नल द्वारा पीने का पानी आता है. (शहरों में 51 प्रतिशत और गांवों मे 11 प्रतिशत) मध्यप्रदेश के सिर्फ 30 प्रतिशत लोग खाना बनाने के लिए स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करते है. मध्यप्रदेश में 57 प्रतिशत परिवार अभी भी खुले में शौच के लिए मजबूर हैं.
मोदी सरकार का नीति आयोग कहता है कि मध्यप्रदेश के 45 लाख 82 हजार 607 (40.33 प्रतिशत) ग्रामीण घरों में बिजली नहीं है. हैंडबुक आफ स्टेटिस्टिक्स (आर बी आई) के अनुसार यू पी और बिहार के बाद सबसे ज्यादा गरीब लोग मध्यप्रदेश में हैं. केंद्र की कृषि लागत और मूल्य आयोग की वर्ष 2018-19 की रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में कृषि मजदूरी सबसे कम, मात्र 210 रुपये है, बिहार में 251 रुपए प्रति दिन,आंध्रप्रदेश में 291 रुपए, महाराष्ट्र में 269 रुपए ,पश्चिम बंगाल में 232 रुपए कृषि मजदूर को मिलते हैं, पिछले 15 सालों से मध्यप्रदेश में सबसे कम मजदूरी मिलती है. प्रदेश में मनरेगा में दर्ज परिवार -68.25 लाख अर्थात मध्यप्रदेश की लगभग आधी आबादी मजदूरी के लिए बाध्य.
कितने परिवारों को मिली मजदूरी
* 2014-15 में 100 दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार-1,58,776.
* 2015-16 में 100दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार-2,25,502.
* 2016-17 में 100दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार-1,40,990.
* 2017-18 में 100 दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार - 1,34,724.
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ आज मंगलवार को चौथा सवाल पूछते हुए प्रदेश की गरीबी व पिछड़ेपन को लेकर शिवराज सरकार का घेराव किया है. उन्होंने कहा कि 'वो ही फैला रहे हैं स्वर्णिम से समृद्धि का झूठ, जिन्होंने लिया मध्यप्रदेश को लूट 'मामाजी, क्या समृद्धि का नारा भाजपा नेताओं और मंत्रियों के लिए गढ़ा?
कमलनाथ ने आज शिवराज सरकार के अलावा मोदी सरकार को भी घेरा. उन्होंने पूछा कि मोदी सरकार ने राज्यों का संपत्ति सूचकांक जारी किया है, जिसमें प्रदेश के सिर्फ़ 15.8 प्रतिशत परिवार ही इसके दायरे में आते हैं. इतनी खराब स्थिति बड़े राज्यों में छत्तीसगढ़ और बिहार की है, जहां चंडीगढ़ के 78.5 प्रतिशत, पंजाब के 60.7 प्रतिशत, हिमाचल जैसे राज्य के 31 प्रतिशत परिवार संपन्न हैं. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की सितम्बर 2017 (एनएफएचएस) में जारी रिपोर्ट बताती है कि 2006 से 2016 के बीच मध्यप्रदेश में गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों की जनसंख्या 27 प्रतिशत बढ़ गई है. केंद्र के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा किए गए सर्वे (2016) में मध्यप्रदेश में सिर्फ 36 प्रतिशत लोग पक्के घरों में रहते है.
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में सिर्फ 23 प्रतिशत घरों में नल द्वारा पीने का पानी आता है. (शहरों में 51 प्रतिशत और गांवों मे 11 प्रतिशत) मध्यप्रदेश के सिर्फ 30 प्रतिशत लोग खाना बनाने के लिए स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करते है. मध्यप्रदेश में 57 प्रतिशत परिवार अभी भी खुले में शौच के लिए मजबूर हैं.
मोदी सरकार का नीति आयोग कहता है कि मध्यप्रदेश के 45 लाख 82 हजार 607 (40.33 प्रतिशत) ग्रामीण घरों में बिजली नहीं है. हैंडबुक आफ स्टेटिस्टिक्स (आर बी आई) के अनुसार यू पी और बिहार के बाद सबसे ज्यादा गरीब लोग मध्यप्रदेश में हैं. केंद्र की कृषि लागत और मूल्य आयोग की वर्ष 2018-19 की रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में कृषि मजदूरी सबसे कम, मात्र 210 रुपये है, बिहार में 251 रुपए प्रति दिन,आंध्रप्रदेश में 291 रुपए, महाराष्ट्र में 269 रुपए ,पश्चिम बंगाल में 232 रुपए कृषि मजदूर को मिलते हैं, पिछले 15 सालों से मध्यप्रदेश में सबसे कम मजदूरी मिलती है. प्रदेश में मनरेगा में दर्ज परिवार -68.25 लाख अर्थात मध्यप्रदेश की लगभग आधी आबादी मजदूरी के लिए बाध्य.
कितने परिवारों को मिली मजदूरी
* 2014-15 में 100 दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार-1,58,776.
* 2015-16 में 100दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार-2,25,502.
* 2016-17 में 100दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार-1,40,990.
* 2017-18 में 100 दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार - 1,34,724.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें