मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने वाली 108 एंबुलेंस के पहिए आज फिर से थम गए. प्रदेश भर में 600 एंबुलेंस के रुक जाने से मरीजों को समय से अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका. एंबुलेंस के कर्मचारी वेतन न मिलने से नाराज हैं. इनका कहना है कि उनका झगड़ा मरीजों और सरकार से नहीं, बल्कि कांट्रेक्टर कंपनी जिगित्सा से है.इमरजेंसी में 108 एंबुलेंस द्वारा हर रोज 300 से ज्यादा मरीजों को इमरजेंसी सेवाएं दे जाती है. इनके बंद होने से मरीजों को आज एंबुलेंस मुहैया नहीं हो पाई और उन्हें निजी वाहन या आटो से अस्पताल पहुंचना पड़ा. राजधानी में इन दिनों कुल 17 एंबुलेंस हैं जो चालू हालत में हैं और वो मरीजों को अस्पताल रेफर करने का काम करती है. इसके अलावा प्रदेश में कुल 600 एंबुलेंस हैं, जिससे हजारों की संख्या में मरीजों को त्वरित उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया जाता है. 108 एबुंलेंस के कर्मचारी नेता असलम खान ने बताया कि हमने हड़ताल नहीं की है, हमने काम बंद किया है. इसकी वजह है कि हमें वेतन ही नहीं मिल रहा है. इस हालात में हम कैसे काम करें.
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कंपनी द्वारा उन्हें दो माह से वेतन नहीं दिया जा रहा है. इस कारण उनकी आर्थिक स्थिति खराब है. पूर्व में भी कर्मचारियों को वेतन न दिए जाने को लेकर कर्मचारियों द्वारा हड़ताल की गई थी, इसके बाद समझौता हो गया था, मगर फिर से कंपनी ने कर्मचारियों के साथ वही रास्ता अख्तियार कर लिया है. कर्मचारियों ने कहा कि अभी उन्होंने काम बंद किया है, अगर जल्द ही वेतन नहीं मिला तो फिर से हड़ताल जैसे रुख हमें अपनाना होगा. उल्लेखनीय है कि प्रदेश में करीब 600 एंबुलेंस हैं, जिनमें 2840 कर्मचारी कार्यरत हैं. इन कर्मचारियों द्वारा लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है. कंपनी द्वारा उनकी मांग तो अब तक पूरी नहीं की गई, मगर अब उनका वेतन रोक दिया है.
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