बुधवार, 15 नवंबर 2017

किसानों की खुदकुशी पर फिर तेज हुई सियासत

कांग्रेस ने घेरा सरकार को, कहा असंवेदनशील हैं शिवराज 
अरुण यादव
ज्योतिरादित्य सिंधिया 
 प्रदेश में दो किसानों द्वारा खुदकुशी किए जाने और एक किसान द्वारा फसल के उचित दाम न मिलने पर मंडी में फसल जला दिए जाने को लेकर सियासत गर्म हो उठी है. लगातार किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरने वाली कांग्रेस ने फिर से सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया है. साथ ही कहा है कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंंह चौहान किसानों के मुद्दों पर असंवेदनशील हैं. प्रदेश के दमोह और गुना जिलों में किसानों द्वारा खुदकुशी किए जाने और नीमच में एक किसान द्वारा मंडी में अपनी फसल जला दिए जाने के मामले पर कांग्रेस ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया है. कांग्रेस की ओर से सरकार पर किसानों के मुद्दों पर लगातार प्रहार किया जा रहा है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने आज ट्वीट कर कहा कि सरकार की किसान विरोधी नीतियों से परेशान और नाराज किसान अपनी खून पसीना बहाकर पैदा की फसल को आग के हवाले कर रहा है. लगातार अन्नदाता आत्महत्या कर रहा है. कृषि विकास और अवार्ड आंकड़ों की बाजीगरी हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को खुद को किसान पुत्र कहने पर भी सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसान अपनी फसल के उचित दाम न मिलने की वजह खून बहा रहा है फसल को आग लगा रहा है और लगातार अन्नदाता आत्महत्या कर रहा है. सरकार उसकी समस्या को समझ नहीं रही है. वहीं सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट कर सरकार को घेरा है. उन्होंने लिखा है कि प्रदेश में एक और दुखद आत्महत्या हुई है. बैंक और साहूकार का दबाव किसान पर है. सिंधिया ने कहा कि सरकार किसानों के प्रति असंवेदनशील है. किसानों की आत्महत्या वाली खबर का हवाला देते हुए उन्होंने लिखा कि 'ये है कृषि कर्मण का ढिंढोरा पीटने वाली मध्यप्रदेश सरकार की अपने किसानों के प्रति संवेदनशीलता' है. उल्लेखनीय है कि दमोह जिले के काकरा भोजपुर गांव के एक किसान ने सोमवार को कर्ज न चुका पाने के कारण कीटनाशक पी लिया था, वहीं गुना जिले के उकावद में भी कर्ज में डूबे किसान ने अपनी जान दे दी. ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना से सांसद हैं, लिहाजा वह पहले भी शिवराज सरकार पर उनके क्षेत्र की उपेक्षा करने का आरोप लगाते आए हैं. 
पंजीयन के जाल में किसानों को न फंसाएं 
अजय सिंह 
मुख्यमंत्री नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भावांतर योजना के भंवर जाल में फंसाकर अब पंजीयन के जाल में किसानों को न फंसाएं. उन्होंने कहा कि जिन भी किसानों के पास ऋण-पुस्तिका, खसरा खतोनी हो सरकार उसकी उपज खरीदे और उसे वाजिब मूल्य दे. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार की मंशा किसानों को लाभ पहुंचाने की नहीं बल्कि नए-नए भंवर जाल में फंसाकर अंतत: उसे अपनी फसल औने-पौने दाम पर बेंचने को मजबूर करना है. सिंह ने कहा कि बदलते फैसले से लगता है कि सरकार अभी तक तय नहीं कर पाई है कि उसे करना क्या है ? भ्रम और बार-बार निर्णयों में बदलाव से सरकार की मंशा किसानों को लाभ पहुंचाने की नहीं है. 
कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक से मांगा प्रतिवेदन 



मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने विदिशा जिले के ग्राम कराखेड़ी निवासी किसान विक्रम सिंह दांगी द्वारा कर्ज के बोझ से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खा लेने की घटना पर संज्ञान लिया है. आयोग ने इस सिलसिले में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक विदिशा से प्रतिवेदन तलब किया है. आयोग ने जानकारी चाही है कि मृतक ने कितनी राशि का कर्ज लिया था, उसकी ब्याज दर क्या थी, मृतक ने कितनी राशि का भुगतान कर दिया था और क्या कर्ज और ब्याजदर संबंधी किन्हीं वैधानिक प्रावधानों का उल्लंधन हुआ है.

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