अब सिंधिया से मुकाबला होगा शिवराज का
चित्रकूट उपचुनाव में मिली हार के बाद अब भाजपा के लिए मुंगावली में होने वाला उपचुनाव चिंता का विषय बन गया है. भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व भी चित्रकूट में मिली हार को लेकर प्रदेश संगठन से खफा नजर आने लगा है. राष्ट्रीय नेतृत्व में हार के कारणों की जानकारी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान से मांगी है. वहीं कांग्रेस भी मुंगावली में होने वाले उपचुनाव को लेकर गंभीर हो गई है. जीत से उत्साहित कांग्रेस ने यहां पर रणनीति से लेकर प्रत्याशी चयन तक सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर विश्वास जताने का फैसला कर लिया है.
चित्रकूट में भाजपा को मिली करारी हार के बाद प्रदेश भाजपा का संगठन और सत्ता दोनों ही चिंतित हो उठे हैं. संगठन जहां पदाधिकारियों और स्थानीय कार्यकर्ताओं की कसावट करने का मन बना रहा है, वहीं मंत्रियों को भी जिम्मेदारी सौंपकर वहां की समस्याएं चुनाव की घोषणा होने के पूर्व ही निपटाने को कहा है. करीब एक दर्जन मंत्रियों को मुख्यमंत्री शिवराजसिंंह चौहान ने वहां सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं. हाल ही में ऊर्जा मंत्री पारस जैन मुंगावली विधानसभा क्षेत्र का दौरा कर आए हैं. जैन ने वहां किसानों की समस्याओं पर जोर दिया. वे किसानों की समस्याओं को समझ कर आए हैं और जल्द ही उसे निपटाने के लिए मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे. जैन के अलावा अन्य मंत्रियों ने भी अब वहां सक्रियता दिखानी शुरु कर दी है. भाजपा संगठन और सरकार दोनों के लिए मुंगावली में होने वाला उपचुनाव प्रतिष्ठा बन गया है, इसके पीछे मुख्य कारण हैं कि भिंड जिले की अटेर विधानसभा के बाद सतना जिले की चित्रकूट विधानसभा सीट पर मिली हार है. इस हार के बाद भाजपा का राष्ट्रीय संगठन भी प्रदेश संगठन पर कसावट करने की तैयारी कर रहा है. हाल ही में चित्रकूट में मिली हार के कारणों की जानकारी राष्ट्रीय संगठन ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान से मांगी है.
शिवराज बनाम सिंधिया के बीच होगा मुकाबला
अशोक नगर जिले की मुंगावली विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव कांग्रेस की ओर से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए प्रतिष्ठा बना हुआ है. सिंधिया वैसे तो यहां पर महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा के निधन के बाद से ही सक्रिय हैं, मगर अब उन्होंने यहां और सक्रियता दिखानी शुरु कर दी है. वे पूर्व में ही मुंगावली विधानसभा क्षेत्र में 29 सेक्टर प्रभारी नियुक्त कर वहां की प्रतिदिन जानकारी हासिल कर रहे हैं और युवा कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर रहे हैं. सिंधिया के लिए यह मुकाबला इसलिए भी कड़ा है, क्योंकि यहां पर भाजपा दो उपचुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री शिवराजसिंंह चौहान को ही सामने रखकर चुनाव लड़ेगी और इस बार मुख्यमंत्री चुनाव पूर्व वहां की समस्याओं को जल्द ही निपटाने का प्रयास करेंगे. मुख्यमंत्री यहां पर दो उपचुनाव में मिली हार को जीत में बदलना चाहते हैं, वहीं सिंधिया पूरी ताक से कांग्रेस की इस सीट को बचाने के लिए सक्रिय हैं.
दोनों ही दलों में दावेदारों ने शुरु की दावेदारी
मुंगावली उपचुनाव को लेकर टिकट के दावेदार भी सक्रिय हो गए हैं. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों की ओर से दावेदारों ने अपने आकाओं के माध्यम से टिकट की दावेदारी शुरु कर दी है. भाजपा में यादवेन्द्र सिंह यादव, जगन्नाथसिंह, प्रतापभान सिंह यादव और मलकीत सिंंह यादव के नाम अभी सामने आए हैं.यादवेन्द्र सिंह यादव भाजपा के पूर्व विधायक राव देशराज सिंंह के पुत्र हैं. भाजपा यहां पर देशराजसिंह यादव की पत्नी साहब बाई के नाम पर भी विचार कर रही है. वहीं कांग्रेस में नरेन्द्र सिंह अमरौद, प्रद्युम्नसिंह दांगी, डा.के.पी.यादव, बिजेन्द्र सिंह के अलावा स्वर्गीय महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा के भाई के.के.सिंह के नाम भी सामने आए हैं.
चित्रकूट उपचुनाव में मिली हार के बाद अब भाजपा के लिए मुंगावली में होने वाला उपचुनाव चिंता का विषय बन गया है. भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व भी चित्रकूट में मिली हार को लेकर प्रदेश संगठन से खफा नजर आने लगा है. राष्ट्रीय नेतृत्व में हार के कारणों की जानकारी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान से मांगी है. वहीं कांग्रेस भी मुंगावली में होने वाले उपचुनाव को लेकर गंभीर हो गई है. जीत से उत्साहित कांग्रेस ने यहां पर रणनीति से लेकर प्रत्याशी चयन तक सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर विश्वास जताने का फैसला कर लिया है.
चित्रकूट में भाजपा को मिली करारी हार के बाद प्रदेश भाजपा का संगठन और सत्ता दोनों ही चिंतित हो उठे हैं. संगठन जहां पदाधिकारियों और स्थानीय कार्यकर्ताओं की कसावट करने का मन बना रहा है, वहीं मंत्रियों को भी जिम्मेदारी सौंपकर वहां की समस्याएं चुनाव की घोषणा होने के पूर्व ही निपटाने को कहा है. करीब एक दर्जन मंत्रियों को मुख्यमंत्री शिवराजसिंंह चौहान ने वहां सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं. हाल ही में ऊर्जा मंत्री पारस जैन मुंगावली विधानसभा क्षेत्र का दौरा कर आए हैं. जैन ने वहां किसानों की समस्याओं पर जोर दिया. वे किसानों की समस्याओं को समझ कर आए हैं और जल्द ही उसे निपटाने के लिए मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे. जैन के अलावा अन्य मंत्रियों ने भी अब वहां सक्रियता दिखानी शुरु कर दी है. भाजपा संगठन और सरकार दोनों के लिए मुंगावली में होने वाला उपचुनाव प्रतिष्ठा बन गया है, इसके पीछे मुख्य कारण हैं कि भिंड जिले की अटेर विधानसभा के बाद सतना जिले की चित्रकूट विधानसभा सीट पर मिली हार है. इस हार के बाद भाजपा का राष्ट्रीय संगठन भी प्रदेश संगठन पर कसावट करने की तैयारी कर रहा है. हाल ही में चित्रकूट में मिली हार के कारणों की जानकारी राष्ट्रीय संगठन ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान से मांगी है.
शिवराज बनाम सिंधिया के बीच होगा मुकाबलाअशोक नगर जिले की मुंगावली विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव कांग्रेस की ओर से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए प्रतिष्ठा बना हुआ है. सिंधिया वैसे तो यहां पर महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा के निधन के बाद से ही सक्रिय हैं, मगर अब उन्होंने यहां और सक्रियता दिखानी शुरु कर दी है. वे पूर्व में ही मुंगावली विधानसभा क्षेत्र में 29 सेक्टर प्रभारी नियुक्त कर वहां की प्रतिदिन जानकारी हासिल कर रहे हैं और युवा कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर रहे हैं. सिंधिया के लिए यह मुकाबला इसलिए भी कड़ा है, क्योंकि यहां पर भाजपा दो उपचुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री शिवराजसिंंह चौहान को ही सामने रखकर चुनाव लड़ेगी और इस बार मुख्यमंत्री चुनाव पूर्व वहां की समस्याओं को जल्द ही निपटाने का प्रयास करेंगे. मुख्यमंत्री यहां पर दो उपचुनाव में मिली हार को जीत में बदलना चाहते हैं, वहीं सिंधिया पूरी ताक से कांग्रेस की इस सीट को बचाने के लिए सक्रिय हैं.
दोनों ही दलों में दावेदारों ने शुरु की दावेदारी
मुंगावली उपचुनाव को लेकर टिकट के दावेदार भी सक्रिय हो गए हैं. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों की ओर से दावेदारों ने अपने आकाओं के माध्यम से टिकट की दावेदारी शुरु कर दी है. भाजपा में यादवेन्द्र सिंह यादव, जगन्नाथसिंह, प्रतापभान सिंह यादव और मलकीत सिंंह यादव के नाम अभी सामने आए हैं.यादवेन्द्र सिंह यादव भाजपा के पूर्व विधायक राव देशराज सिंंह के पुत्र हैं. भाजपा यहां पर देशराजसिंह यादव की पत्नी साहब बाई के नाम पर भी विचार कर रही है. वहीं कांग्रेस में नरेन्द्र सिंह अमरौद, प्रद्युम्नसिंह दांगी, डा.के.पी.यादव, बिजेन्द्र सिंह के अलावा स्वर्गीय महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा के भाई के.के.सिंह के नाम भी सामने आए हैं.

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