राजधानी भोपाल में गैंगरेप मामले में महिला आयोग ने आज अपनी सुनवाई के दौरान सुल्तानिया चिकित्सालय के अधीक्षक और मेडिकल करने वाली डाक्टरों को फटकार लगाई. आयोग इस मामले में मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने वाली दोनों डाक्टरों के रजिस्ट्रेशन रद्द करने की अनुशंसा की.महिला अयोग में आज मंगलवार को हुई सुनवाई में आयोग की अध्यक्ष लता वानखेड़े और सदस्य सूर्या चौहान ने सुल्तानिया अस्पताल के अधीक्षक डा. करण पीपरे को जमकर फटकार लगाई. आयोग ने कहा कि जिम्मेदारी वाले पद पर रहते हुए डाक्टरों की रिपोर्ट में गड़बड़ी को कैसे नजरअंदाज कर दिया गया. इस पर अधीक्षक डा. पीपरे ने अपनी सफाई में कहा कि मुझे महिला आयोग ने बुलाया था, इसलिए मैं सुनवाई में दोनों डॉक्टरों के साथ आया हूं. रिपोर्ट से सीधे तौर पर मेरा कोई संबंध नहीं है, डॉक्टरों ने रिपोर्ट बनाकर हास्पिटल के डीन को दी थी. सुनवाई के दौरान अधीक्षक डा. पीपरे के साथ विक्टिम की मेडिकल रिपोर्ट बनाने दोनों डॉक्टर खुशबू और डॉक्टर संयोगिता भी पहुंची थी.
उल्लेखनीय है कि राजधानी में गैंगरेप पीड़िता का पहला मेडिकल परीक्षण सुल्तानिया अस्पताल में किया गया था. वहां पर जिस महिला डॉक्टर ने विक्टिम का चेकअप किया था, उसने अपनी रिपोर्ट में गैंगरेप के बजाय आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाने की बात का जिक्र किया था. इसे लेकर बवाल मच गया था, जिस पर विक्टिम का दूसरी बार मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें गैंगरेप की पुष्टि हुई. दूसरी रिपोर्ट में चार आरोपियों द्वारा रेप किए जाने की बात कही गई है. मामले में हंगामा हुआ तो सुल्तानिया अस्पताल के अधीक्षक डाक्टर करण पीपरे ने सफाई दी कि ये लिखने में गलती हुई है, जिससे अर्थ का अनर्थ हो गया है.
रफ कापी सही थी, फाइनल रिपोर्ट बनी गलत
आयोग के सामने दोनों डाक्टरों ने अपना पक्ष रखा. आयोग में दोनों डॉक्टर्स ने अपना पक्षा रखा. इस दौरान डा. संयोगिता ने कहा कि, मेडिकल जांच पीजी सेकंड ईयर की स्टूडेंट (जूनियर डाक्टर) डा. खुशबू ने बनाई थी. उन्होंने मुझे पहले एक रफ कापी दिखाई थी, जो की सही थी. मेरे ओके करने के बाद उन्होंने फाइनल रिपोर्ट तैयार की, जिसमें यह गलती हुई है. डा. खुशबू ने भी डॉ. संयोगिता के जवाब को सही मानते हुए समर्थन दिया.
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