रविवार, 12 नवंबर 2017

चित्रकूट में नहीं खिला कमल

 उपचुनाव में भाजपा की लगातार दूसरी हार, कांग्रेस में उत्साह
राम की नगरी चित्रकूट में भाजपा अपना कमल नहीं खिला सकी. खूब मेहनत के बाद भी भाजपा को यहां पर हार का सामना करना पड़ी. कांग्रेस ने यह सीट जीतकर कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार किया है,वहीं 2018 के विधानसभा चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर तैयारी में जुटने के संकेत दिए हैं.
चित्रकूट में हुए उपचुनाव के परिणामों में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा. कांग्रेस यहां पर अपनी परंपरागत सीट को बचाने में कामयाब रही है. भाजपा की ओर से वैसे तो प्रत्याशी चयन के बाद ही यहां पर विवाद की स्थिति निर्मित हो गई थी, मगर भाजपा ने इस बार भी मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के चेहरे को मैदान में रखा, मगर अटेर विधानसभा क्षेत्र की भांति भाजपा एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा. मुख्यमंत्री शिवराजसिंह के अलावा चित्रकूट में भाजपा की ओर से उत्तरप्रदेशके उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी चुनाव प्रचार में खूब मेहनत की, मगर उनकी मेहनत रंग नहीं लाई. इस सीट को जीतने के लिए दोनों ही दलों ने खूब मेहनत की थी. भाजपा की ओर से सदा की तरह पूरा संगठन मैदान में था, तो कांग्रेस की ओर से इस बार कमान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजयसिंंह ने संभाली थी. अजयसिंह अपने समर्थक प्रत्याशी निलांशु चतुर्वेदी को जीतने के लिए पूरे समय क्षेत्र में रहकर रणनीति बनाते रहे. वहीं वरिष्ठ नेता कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी सभाएं लेकर क्षेत्र में कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाया साथ ही कार्यकर्ताओं में एकता का संदेश दिया. कांग्रेस में जीत का श्रेय अजयसिंह को मिलेगा. उन्होंने यहां पर न केवल प्रत्याशी चयन में अह्म भूमिका का निर्वाह किया था, बल्कि मेहनत करके उन्होंने कांग्रेस की इस परंपरागत सीट को अपने पास ही रखा.  चुनाव प्रचार के दौरान ही यह स्पष्ट था कि यहां पर जीत की प्रतिष्ठा भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष अजयसिंंह का सवाल है. आज परिणाम आने के बाद यह तय हो गया कि अजयसिंह अपनी प्रतिष्ठा को बचाने में कामयाब हो गए.
जिस गांव में रुके मुख्यमंत्री वहां हारी भाजपा
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह 29 सभाएं, 11 रोड शो किए और 3 दिन चित्रकूट में रुके. मुख्यमंत्री  जिस तुर्रा गांव में आदिवासी के घर पर रुके, उसी गांव से भाजपा हार गई. भाजपा इस सीट को इतनी अहम मान रही थी कि उसने मैदान में 29 मंत्री सहित संगठन के दिग्गज नेताओं की फौज मैदान में उतार दिए थे. खुद उत्तरप्रदेश के ओबीसी चेहरा व उपमुख्यमंत्री  केशवप्रसाद मौर्य रोड शो में उतरे, लेकिन इनका भी जादू नहीं चला. केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी चुनाव प्रचार के लिए आए थे. भाजपा नेताओं ने 750 से ज्यादा सभाएं भी की पर वे जनता के दिल में उतर नहीं पाए.
मतदाता को समझ नहीं आई योजनाओं की दुहाई
योजनाओं की दुहाई, विकास की बात उपचुनाव में भाजपा ने प्रत्याशी को पीछे तथा प्रदेश व केन्द्र की योजनाओं को आगे रखा. जहां स्टार प्रचारक योजनाओं की दुहाई देकर चित्रकूट के विकास की बात करते नजर आए तो वहीं भाजपा संगठन सशक्त चित्रकूट बनाने तथा चित्रकूट का समुचित विकास करने का संकल्प भी दोहराया. पिछड़ेपन एवं कुपोषण से जूझ रहे चित्रकूटवासियों के यह बात भी समझ में नहीं आई.
कांग्रेस ने मनाया जश्न
चित्रकूट विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को मतगणना शुरु होने के साथ ही बढ़त मिलती रही. इसके बाद प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पर चहल-पहल भी बढ़ती गई. कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की संख्या में हुए इजाफे के साथ ही प्रदेश कार्यालय पर जश्न भी मनता रहा. कार्यकर्ताओं ने ढ़ोल पर जमकर नृत्य किया और मिठाई वितरित करते रहे. 

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