मध्यप्रदेश के सागर जिले के देवरी विकासखण्ड में एक गाँव है समनापुर जादो. यहां की प्राथमिक शाला के विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से शिक्षा दी जा रही है. शाला में बच्चे एलसीडी और लेपटॉप के जरिये शिक्षा हासिल कर रहे हैं. जिले के इस पहले डिजिटल विद्यालय में बच्चे अंग्रेजी भाषा, कर्सिव हेण्ड-रायटिंग में लिखना सीख रहे हैं. नये और रोचक तरीके से वे गणित के गुणा, भाग, जोड़, घटाना बहुत अच्छे से समझकर सीख रहे हैं.डिजिटल माध्यम की मदद से बच्चे पहाड़ा, गिनती, स्पेलिंग, कविताएं आदि बड़ी आसानी से याद कर लेते हैं. जिला प्रशासन के अधिकारी जब शाला में पहुंँचे तो तीसरी कक्षा के छात्र सत्येन्द्र ने जिस फुर्ती से 19 का पहाड़ा सुनाया, वे दंग रह गये.डिजिटल शिक्षा के माध्यम से गाँव में शिक्षा का स्तर बढ़ा है.इस शाला में कई ऐसे बच्चे हैं, जिन्होंने प्रायवेट स्कूल छोड़कर इस शाला में प्रवेश लिया है.यह शाला जिले में मॉडल के रूप में पहचान स्थापित कर रही है.शाला की सफलता से उत्साहित होकर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग जिले में इस प्रकार की एक और शाला जल्दी ही शुरू करने की कार्यवाही कर रहा है.स्वच्छता में बगदा गाँव बना मिसाल:- दतिया जिले में भाण्डेर विकासखण्ड से 15 किलोमीटर दूर है गाँव बगदा.स्वच्छता अभियान से इस गाँव की तस्वीर ही बदल गई है.सभी गलियों में सी.सी. सड़क है.नाली और सड़कें बिलकुल साफ-सुथरी हैं.पूरे गाँव में शौचालय बने हुए हैं, जिनमें स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है.कुछ समय पहले बाहर जाने वाले ग्रामीणों को शौचालय के इस्तेमाल की आदत भी पड़ गई है. गाँव के करन सिंह, भगवत सिंह, मुन्नालाल, अरविंद आदि कहते हैं कि अब हमें हमारा गाँव बहुत अच्छा लगता है.बच्चे भी सफाई से रहना सीख रहे हैं.इससे बीमारियों में भी कमी आयी है.पहले गाँव में घुसते ही गली में कीचड़, घूरा और कूड़ा-कचरा दिखता था. स्वच्छता अभियान के बाद हमारी गलियाँ इतनी साफ हो गई हैं कि ऐसा लगता है मानो हम किसी शहरी कस्बे में घूम रहे हैं.

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