रविवार, 18 फ़रवरी 2018

आर्थिक नुकसान की आशंका से मुक्त हुए किसान

करण सिंह 
 मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले में ग्राम वानगेरा के किसान करण सिंह पिता राम सिंह सहित 3,549 किसानों ने भावांतर योजनांतर्गत एक से 30 नवम्बर की अवधि में अपनी फसल मण्डी में बेची. इन किसानों को 2 करोड़ 72 लाख 4 हजार 190 रुपये भावांतर भुगतान सीधे बैंक खातों में मिला. दिसम्बर माह में जिलों में 1,178 किसानों ने फसल बेची और 60 लाख 17 हजार 897 रुपये का भावांतर भुगतान अपने बैंक खातों में पाया. भावांतर भुगतान योजना लागू होने से प्रदेश में किसान आर्थिक नुकसान की आशंका से ही मुक्त हो गया है. किसान करण सिंह ने बताया कि हमने कभी सोचा नहीं था कि शासन की भावांतर भुगतान योजना से हमें इतना फायदा होगा. अब तो मण्डी में फसल कम भाव में बिकने पर भी शासन द्वारा समर्थन मूल्य के बराबर राशि मिल रही है. अब फसल का दाम बढ़े या घटे, किसान को तो समर्थन मूल्य के आधार पर ही उपज के दाम मिल रहे हैं. करण सिंह ने 70 क्विंटल सोयाबीन झाबुआ मंडी में व्यापारी को बेचा था. भावांतर योजना में पंजीयन होने से शासन द्वारा 13 हजार 120 रुपये बैंक खाते में जमा कर दिये गये. प्रदेश के किसान के लिये अब यह योजना आर्थिक सुरक्षा का कवच बन गई है.
राजाराम 
अत्याधुनिक खेती अपनाकर समृद्ध किसान बने राजाराम 
झाबुआ जिले में थांदला विकासखण्ड के ग्राम परवलिया के उन्नतशील किसान राजाराम पिता मोतीलाल पाटीदार खेती को व्यवसाय की तरह कर रहे हैं. इन्होंने खेती में आधुनिक कृषि उपकरण, सिंचाई के लिये ड्रिप पद्धति एवं उन्नत वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग कर खेती को लाभ का धंधा बना लिया है. परम्परागत खेती से इन्हें जितनी जमीन में मात्र 50-60 हजार रुपये वार्षिक कमाई होती थी, उसी से अब 7 से 8 लाख रुपए सालाना कमा रहे हैं. सोयाबीन, उड़द, मूंगफली, ज्वार जैसी परम्परागत खेती करने वाले किसान राजाराम पाटीदार ने जब ड्रिप पद्धति से टमाटर की खेती की तो अच्छा उत्पादन मिला. वैज्ञानिक तकनीकों और शासकीय अनुदान का भरपूर उपयोग कर समृद्ध किसान बन गए हैं राजाराम. किसान राजाराम पाटीदार का कहना है कि उनके पास सिंचाई के लिये कुआं एवं ट्यूबवेल है. इससे ड्रिप लगाकर खेत में मिर्ची, प्याज, टमाटर, लहसुन, भिण्डी इत्यादि फसल लगाते हैं. इससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है. ड्रिप इरीगेशन सिस्टम लगाने से पहले वह सिर्फ खरीफ की ही फसल कर पाते थे. खेत में कपास और सोयाबीन भी बोते थे, लेकिन सिंचाई के लिये पानी की कमी की वजह से उत्पादन कम हो पाता था. ड्रिप लगाने से टमाटर की खेती से अच्छी आमदनी हुई है. इस कमाई से राजाराम ने आवासीय भूमि का प्लाट, ट्रेक्टर एवं मोटर-साइकिल भी खरीद ली है.

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