नगरीय विकास मंत्री मायासिंह ने माना पेयजल स्रोतों के सूखने की मिल रही शिकायतें
मानसून की कमजोर आवक के चलते प्रदेश में पेयजल स्रोतों के सूखने की शिकायतें अभी से मिलने लगी है. इसे देखते हुए नगरीय प्रशासन विभाग संजीदा हुआ और जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी कि वे लोगों से पानी के अपव्यय को रोकने के लिए आग्रह करें. नगरीय विकास मंत्री मायासिंह ने आज राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में ये निर्देश दिए हैं. बैठक में उन्होंने कहा कि पानी के अपव्यय के प्रति आमजन को जागरूक बनाने के लिए नगरीय क्षेत्रों में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन जागरूकता हेतु विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने सभी जन-प्रतिनिधियों और सभी वरिष्ठ शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों से अनुरोध किया है कि सभी कार्यक्रमों में जल संरक्षण और पानी के महत्व तथा अपव्यय को रोकने के लिए चर्चा अवश्य करें.
मंत्री ने कहा है कि पेयजल की आपूर्ति शासन की प्राथमिकता है. आगामी गर्मी के मौसम में पेयजल संकट से निपटने के लिए प्रदेश के 378 नगरीय निकायों के लिए 122 करोड़ की कार्य योजना तैयार कर ली गई है. उन्होंने अधिकारियों को आज राज्य-स्तरीय समीक्षा बैठक में पेयजल आपूर्ति के प्रतिदिन समीक्षा करने के निर्देश दिये हैं. उन्होंने कहा कि पिछले 2 वर्षों से प्रदेश में मानसून की कमजोर आवक के कारण पेयजल स्त्रोत के सूखने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं. इसके लिए संचालनालय स्तर पर पेयजल आपूर्ति की नियमित समीक्षा करें. उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों द्वारा पूर्व में भेजे गये प्रस्तावों के आधार पर 122.2 करोड़ रुपए का प्रस्ताव आयुक्त सूखा राहत को भेजा गया है. सिंह ने कहा कि पेयजल आपूर्ति के लिये भारत सरकार से धन राशि आवंटन हेतु अनुरोध किया जा रहा है. नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ने कहा कि सभी निकाय अपने स्तर पर माइक्रो लेवल प्लान तैयार रखें, जिन स्थानों पर नवीन हैण्ड-पम्प, बोरिंग अथवा टेंकर द्वारा पानी की आपूर्ति की जानी है, उन स्थानों पर वार्ड और मोहल्ले अभी से चिन्हित किये जाएं. पानी की आपूर्ति सभी तरह की बसाहटों में की जाएगी. बैठक में बताया गया कि संचालनालय स्तर से 122 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार किया गया है, इसमें से नगर निगम को 66 करोड़ 60 लाख, नगर पालिकाओं को 32 करोड़ 2 लाख तथा नगर परिषद क्षेत्रों को 23 करोड़ 40 लाख रुपए की राशि दिया जाना प्रस्तावित है. इसके साथ ही 23 जिला कलेक्टरों द्वारा 120 निकायों में राहत मद से पेयजल परिवहन हेतु 19 करोड़ 40 लाख रुपए की राशि के प्रस्ताव प्राप्त हुए है. इसमें से 4 करोड़ 6 लाख रुपए की राशि आवंटित की जा चुकी है.
मानसून की कमजोर आवक के चलते प्रदेश में पेयजल स्रोतों के सूखने की शिकायतें अभी से मिलने लगी है. इसे देखते हुए नगरीय प्रशासन विभाग संजीदा हुआ और जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी कि वे लोगों से पानी के अपव्यय को रोकने के लिए आग्रह करें. नगरीय विकास मंत्री मायासिंह ने आज राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में ये निर्देश दिए हैं. बैठक में उन्होंने कहा कि पानी के अपव्यय के प्रति आमजन को जागरूक बनाने के लिए नगरीय क्षेत्रों में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन जागरूकता हेतु विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने सभी जन-प्रतिनिधियों और सभी वरिष्ठ शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों से अनुरोध किया है कि सभी कार्यक्रमों में जल संरक्षण और पानी के महत्व तथा अपव्यय को रोकने के लिए चर्चा अवश्य करें.
मंत्री ने कहा है कि पेयजल की आपूर्ति शासन की प्राथमिकता है. आगामी गर्मी के मौसम में पेयजल संकट से निपटने के लिए प्रदेश के 378 नगरीय निकायों के लिए 122 करोड़ की कार्य योजना तैयार कर ली गई है. उन्होंने अधिकारियों को आज राज्य-स्तरीय समीक्षा बैठक में पेयजल आपूर्ति के प्रतिदिन समीक्षा करने के निर्देश दिये हैं. उन्होंने कहा कि पिछले 2 वर्षों से प्रदेश में मानसून की कमजोर आवक के कारण पेयजल स्त्रोत के सूखने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं. इसके लिए संचालनालय स्तर पर पेयजल आपूर्ति की नियमित समीक्षा करें. उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों द्वारा पूर्व में भेजे गये प्रस्तावों के आधार पर 122.2 करोड़ रुपए का प्रस्ताव आयुक्त सूखा राहत को भेजा गया है. सिंह ने कहा कि पेयजल आपूर्ति के लिये भारत सरकार से धन राशि आवंटन हेतु अनुरोध किया जा रहा है. नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ने कहा कि सभी निकाय अपने स्तर पर माइक्रो लेवल प्लान तैयार रखें, जिन स्थानों पर नवीन हैण्ड-पम्प, बोरिंग अथवा टेंकर द्वारा पानी की आपूर्ति की जानी है, उन स्थानों पर वार्ड और मोहल्ले अभी से चिन्हित किये जाएं. पानी की आपूर्ति सभी तरह की बसाहटों में की जाएगी. बैठक में बताया गया कि संचालनालय स्तर से 122 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार किया गया है, इसमें से नगर निगम को 66 करोड़ 60 लाख, नगर पालिकाओं को 32 करोड़ 2 लाख तथा नगर परिषद क्षेत्रों को 23 करोड़ 40 लाख रुपए की राशि दिया जाना प्रस्तावित है. इसके साथ ही 23 जिला कलेक्टरों द्वारा 120 निकायों में राहत मद से पेयजल परिवहन हेतु 19 करोड़ 40 लाख रुपए की राशि के प्रस्ताव प्राप्त हुए है. इसमें से 4 करोड़ 6 लाख रुपए की राशि आवंटित की जा चुकी है.

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