गुरू गोविंदसिंह की 350वीं जयंति पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं. इसी क्रम में मध्यप्रदेश के बुरहानपुर के तिलक हॉल में आयोजित कार्यक्रम में हिन्दवी स्वराज व खालसा से एक अखण्ड व समरस भारत, विषय पर भारतीय शिक्षा मण्डल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर ने संबोधित किया. कार्यक्रम में प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस ने उपस्थित नागरिकों का आव्हान किया कि, अपने बच्चों को छत्रपति शिवाजी एवं गुरू गोविंदसिंह के जीवन दर्शन तथा उनके त्याग और बलिदान के बारे में बताएं. कार्यक्रम का शुभारंभ छत्रपति शिवाजी एवं गुरू गोविंदसिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर एवं दीप प्रज्जवलित कर किया गया. महिला एवं बाल विकास मंत्री चिटनिस ने गुरू गोविंदसिंह की 350 वीं जयंति को समारोहपूर्वक मनाने तथा इसके लिये पृथक से बजट आवंटन का प्रावधान किये जाने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार प्रकट किया. उन्होंने कहा कि शिवाजी और गुरू गोविंदसिंह जी का जीवन जाति, देश व धर्म की परिधि में नहीं बांधा जा सकता. शिवाजी का राज्य छोटा सा था, लेकिन उनका सोच बहुत बड़ा था. कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता कानिटकर ने संबोधित करते हुए छत्रपति शिवाजी एवं गुरू गोविंदसिंह के जीवन दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि दोनों ही महापुरूषों ने नागरिकों को कर्तव्यो बोध का एहसास कराया तथा नागरिकों में बलिदान की भावना जागृत की. उन्होंने कहा कि शिवाजी की गोरिल्ला युद्ध नीति अमेरिका की सेना को प्रशिक्षण के दौरान पढ़ाई जाती हैं. उन्होंने कहा कि शिवाजी ने अपनी छोटी सी सेना के साथ कई बडे़-बडे़ युद्ध जीते. शिवाजी ने मात्र 14 वर्ष की उम्र में पहला किला तोरणदुर्ग जीता था. आज की माताओं को शिवाजी की माता जीजाबाई से सीख लेना चाहिए तथा अपने बच्चों को बहादुर एवं निडर बनाना चाहिए. श्री कानिटकर ने अपने संबोधन में बताया कि शिवाजी की सेना में उस समय की आधुनिकतम तकनीकों से युक्त अस्त्र-शस्त्र थे. मुकुल कानिटकर ने कहा कि शिवाजी ने अपनी अलग न्याय प्रणाली, विदेश नीति तथा अर्थ नीति लागू की थी. उन्होंने गुरू गोविंदसिंह जी द्वारा देश और धर्म की रक्षा के लिए किये गये सर्वस्व बलिदान के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि देश ने हमें क्या दिया, बल्कि यह सोचना चाहिए कि हमने देश को क्या दिया.

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