जेल में बंद हो जाने से किसी के कानूनी अधिकार कम नही हो जाते. जेल में निरूद्ध बंदियो को भी पूर्व के समान संवैधानिक अधिकारो यथा नि:शुल्क अधिवक्ता नियुक्ति, मुलाकात का अधिकार, उपचार का अधिकार, पढ़ने-लिखने का अधिकार, मनोरंजन का अधिकार, उपचार का अधिकार के साथ-साथ अन्य अधिकार यथावत रहते है. केन्द्रीय जेल बड़वानी में लगे विधिक साक्षरता शिविर में उपस्थित बंदियो को संबोधित करते हुये उक्त जानकारी जिला सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रामेश्वर कोठे ने दी. इस अवसर पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रट एसआर सीनम ने भी बंदियो को बताया कि वे किस प्रकार प्लीबारेगेनिंग के प्रावधान का उपयोग कर दण्डित मामलों में भी समझौता आधार पर अपने प्रकरणो का निराकरण करा सकते है. इस अवसर पर जिला प्राधिकरण के नव नियुक्ति सचिव हेमंत जोशी ने भी बंदियो को प्रकरणों में अपील प्रावधान के अधिकार को सहज भाषा में समझाया. जिसमें बदी उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में अपील हेतु प्रक्रिया जिला स्तर से ही कर सकते है. वही जिला विधिक सहायता अधिकारी रेखा द्विवेदी ने भी बंदियो को नि:शुल्क विधिक सहायता व नि:शुल्क अधिवक्ता योजना, लीगल एड क्लीनिक एवं पैरालीगल वालेंटियर्स की उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया. शिविर के दौरान बंदियो के प्रश्नो-जिज्ञासाओं का भी समाधान न्यायाधीशो द्वारा किया गया.

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