शुक्रवार, 23 मार्च 2018

पत्रों के जरिए मुख्यमंत्री को घेर रहे हैं कांग्रेस नेता

 नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लिखे पत्र

प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने अब सरकार और मुख्यमंत्री को पत्रों के जरिए घेरना शुरु कर दिया है. आज नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अलग-अलग पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से जवाब मांगा है. अजयसिंह ने जहां लोक निर्माण मंत्री रामपालसिंंह के बहू प्रीति की आत्महत्या को लेकर यह पूछा है कि क्या प्रीति को मुख्यमंत्री अपनी भांजी मानते थे?, वहीं सांसद सिंधिया ने अपने संसदीय क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा को लेकर मुख्यमंत्री से जानना चाहा है कि क्या कारण है कि उनके क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के पत्रों का जवाब भी नहीं दिए जा रहे हैं.
मध्यप्रदेश में इन दिनों कांग्रेस ने भाजपा को घेरने की रणनीति पर काम तेज कर दिया है. कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पर सीधा हमला बोला जा रहा है. नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह ने लोक निर्माण मंत्री रामपालसिंह की बहू प्रीति द्वारा की गई आत्महत्या का मुद्दा उठाया और आज एक पत्र मुख्यमंत्री को लिखा है. उन्होंने मुख्यमंत्री से पत्र के जरिए कुछ सवाल किए हैं. वहीं सांसद ज्योतिरादित्य सिंंधिया ने अपने संसदीय क्षेत्र शिवपुरी में पानी की समस्या का मामला उठाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है. उन्होंने पत्र के जरिए अपने संसदीय क्षेत्र के जनप्रतिनिधयों द्वारा उठाए गए मुद्दों के अलावा मुख्यमंत्री को लिखे जाने वाले पत्रों के जवाब न मिलने की बात कही है.
मुख्यमंत्री बताएं प्रीति उनकी भांजी थी या नहीं
अजय सिंह 
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि बगैर किसी विषय का उल्लेख किए यह मैं पत्र बहुत ही अफसोस के साथ लिख रहा हूं. मुख्यमंत्री लंबे समय से संसदीय लोकतंत्र से जुड़े हैं. सांसद, विधायक और पिछले 12 साल से आप मुख्यमंत्री इस प्रदेश के हैं. इसलिए आपको पता है कि बजट सत्र का क्या महत्व है,  लेकिन आपने इस सत्र की जिस तरह से अवहेलना की है, यहां तक कि जब आपकी ही सहमति से सदन को अलोकतांत्रिक तरीके से समाप्त किया गया तब भी आप सदन में मौजूद नहीं थे, अफसोस है. सिंह ने पत्र में लिखा कि बजट सत्र के दौरान एक महत्वपूर्ण मुद्दा बार-बार सामने आ रहा था, वह महिलाओं के विरूद्ध लगातार बढ़ रहे अपराधों का. आपने निर्भयाकांड, उसके बाद भोपाल में घटित शक्तिकांड के बाद जो दहाड़ लगाई थी, उसका कोई असर नहीं हुआ. इस बीच सबसे गंभीर घटना घटी आपके मंत्रिमंडल के सदस्य और आपके निकटतम साथी रामपाल सिंह और उनके परिवारजनों के दबाव में उदयपुरा की प्रीति रघुवंशी द्वारा आत्महत्या किया जाना. इस मुद्दे पर हम लगातार 20-21 मार्च को सदन में स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा कराना चाहते थे. आप लगातार विधानसभा आए, लेकिन आपने सदन के अंदर आना मुनासिब नहीं समझा. 
पत्र में लिखा कि मुख्यमंत्री ने महिला अपराधों को लेकर आपने कई आदेश और निर्देश दिए. हाल ही में आपने कहा कि महिला अपराधियों के खिलाफ इतने सख्ती से पेश आओ की उनकी रूह कांप जाए, आपकी पुलिस इसका कैसे उपयोग कर रही है इसका जिक्र तो मैं बाद में करूंगा, लेकिन पहले मैं आपसे जानना चाहता हूं कि क्या प्रीति रघुवंशी इस प्रदेश की नागरिक है?, क्या उसे आप अपनी बेटी या भांजी मानते थे? अगर हां, तो क्या उसके साथ और उसके परिवार के साथ जो अन्याय हुआ उसे न्याय दिलाने की जिम्मेदारी आपकी नहीं है. 
नेता प्रतिपक्ष ने उठाए सवाल
* नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुझे दु:ख है यह कहते हुए कि महिलाओं के नाम पर आप सिर्फ पाखंड कर रहे हैं. अगर ऐसा नहीं है तो फिर मंत्री रामपाल सिंह उनके पुत्र और परिवारजनों पर सारे सबूतों और प्रीति रघुवंशी के पिता, माता और भाई द्वारा लिखित में शिकायत करने के बाद भी एफआईआर क्यों दर्ज नहीं हुई. 
* सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि मामले की हम जांच करवा रहे हैं, तब फिर छात्रा आरती राय द्वारा आत्महत्या करने के मामले में जांच के पहले दानिश नाम के युवक पर उसकी मां की शिकायत पर क्यों एफआईआर दर्ज हुई, उसे गिरफ्तार किया गया. दो कानून कैसे लागू हो सकते हैं प्रदेश में. 
* प्रीति के पिता ने अपने लिखित आवेदन में मंत्री रामपाल सिंह और उसके परिजनों को प्रीति की आत्महत्या का जिम्मेदार बताया है. वह परिवार हमसे (कांग्रेस) कह रहा है कि आप हमारे साथ हो तो हम आगे बढ़ेंगे, क्योंकि रामपाल सिंह परिवार ने हमारे पूरे परिवार में दरार पैदा कर दी और हमें लगातार धमकाया जा रहा है. 
* क्या इस प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के नाते एक लड़की के मामा होने के नाते जो कि आप कहते हो की मैं हूं, आपको प्रीति रघुवंशी के परिवार से जाकर नहीं मिलना चाहिए था. उन्हें दिलासा नहीं देना चाहिए और यह नहीं कहना चाहिए कि मैं हूं, तुम मत डरो जो सच हो पुलिस को बताओ.
 क्यों ने दे रहे जनप्रतिनिधियों के पत्रों का जवाब?
ज्योतिरादित्य सिंंधिया 
शिवपुरी शहर की लंबित पानी की समस्या के स्थायी समाधान हेतु मड़ीखेड़ा से पानी की लाइन डालने हेतु मैंने व्यक्तिगत प्रयास करके पूर्व शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी  से यूपीए सरकार की योजना यूआईडीएसएसएमटी के अंतर्गत मार्च 2008 में मंजूर करवाया था. इस योजना का क्रियांवयन मध्यप्रदेश सरकार को करना था, लेकिन दुर्भाग्य से आज 10 वर्ष व्यतीत हो जाने के बावजूद भी इसका कार्य अपूर्ण है. पूर्व में भी मैंने कई पत्र, 28 जून 2015, 4 अगस्त 2015 एवं 24 अक्टूबर 2015, इस योजना के सबंध में आपको लिखे है, मगर आज तक मेरे एक भी पत्र का आपसे कोई विवरणात्मक जवाब नहीं मिला है.
शिवपुरी जिला कांग्रेस कमेटी के हमारे पूर्व अध्यक्ष एवं कोलारस के पूर्व विधायक स्वर्गीय रामसिंह यादव के नेतृत्व में कांग्रेस के एक प्रतिनिधि मंडल ने भी 3 जुलाई 2015 को भोपाल आपसे भेंटकर इस योजना को शीध्र पूर्ण कराने की मांग की थी, उस समय आपने उनको विश्वास दिलाया था कि इस योजना के क्रियांवयन में आने वाली समस्त बाधाओं को दूर करके, छह माह के भीतर शिवपुरी की जनता को पानी उपलब्ध कराया जाएगा. मगर क्या कारण है कि आपके आश्वासन के 6 माह तो क्या ढ़ाई वर्ष बाद भी योजना अपूर्ण है व अभी भी यह तय नहीं है कि शिवपुरी की जनता के घरों में इस योजना के माध्यम से पानी कब तक पहुंचेगा? ढ़ाई वर्ष में तो नई योजना शुरू करके पूर्ण की जा सकती थी.
गर्मियों के महीने में पीने के पानी की कमी से शहर त्राहि-त्राहि मच जाती है, और इसी कारण शिवपुरी शहर की ढ़ाई लाख आबादी बेसब्री से मड़ीखेड़ा के पानी का इंतजार कर रही है. इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन से शिवपुरी व आसपास क्षेत्र को अत्यंत लाभ मिलेगा, लेकिन दुर्भाग्य से आज 10 वर्ष गुजर जाने के बावजूद भी उक्त योजना पूरी नहीं हो पाईे मुझे कहते हुए खेद है कि कार्य में ऐसी देरी एक घोर लापरवाही है, जिसका खामियाजा शहर की समस्त जनता उठा रही है. इसके बावजूद, राज्य सरकार जानबूझकर इस योजना की अनदेखी कर रही है.
सिंधिया ने मांगे इनके जवाब
* इस योजना में हुई इतनी देरी और खराब गुणवत्ता के बावजूद जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की जा रही है? 
* दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है?
*  पाइप एवं अन्य सामग्री लगाने  से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं की गई? 
•* आप बिजली लाइन की समस्या का स्थाई समाधान निकालने के लिए वन विभाग से तत्काल अनुमति क्यों नहीं लेते? 
* 10 साल से चले आ रही इस योजना की शीघ्र समाप्ति पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा? 
* एक ओर, शहर में पीने का पानी नहीं उपलब्ध कराया जा रहा है, दूसरी ओर, नगर पालिका को बोरिंग की अनुमति नहीं दी जा रही, तो आखिर  शहर के नागरिकों को पानी कहां से मिलेगा? 
•* क्या कारण है कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि के पत्रों के जवाब भी नहीं दिए जा रहे है?

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