शुक्रवार, 9 मार्च 2018

मां, मातृ-भूमि और मातृ-भाषा का कोई विकल्प नहीं

उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया ने कहा है कि मां, मातृभूमि और मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं हो सकता. पवैया 'हिन्दी भाषा में तकनीकी, चिकित्सा एवं वैज्ञानिक लेखन, अनुवाद एवं प्रकाशन' विषयक दो दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे. कार्यशाला अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय और मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के तत्वावधान में हुई.
 पवैया ने कहा कि हिन्दी छोटी भाषा नहीं है, इसमें बहुता समायी है. कार्यशाला से निकलने वाले निष्कर्षों को आगे ले जाना होगा. निरंतर हर तीन माह में पुन: विचार-मंथन कर इसे आगे बढ़ाना होगा. भाषा का व्यक्ति पर बहुत प्रभाव पढ़ता है. भाषा के जरिये विचारधारा को प्रवाहित किया जा सकता है. राज-भाषा या मातृ-भाषा के जरिये जनमानस में परिवर्तन आता है. 
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि चिंतनीय विषय है कि आज पश्चिमी संस्कृति के सहारे आम आदमी जन्मदिन और शादी की वर्षगांठ मना कर खुशियां ढूंढ रहा है. समाज को बदलने के लिये किसी कानून अथवा डंडे की आवश्यकता नहीं होती. उन्होंने कहा कि शबरी के चार बेर खाकर भगवान श्री राम का पेट नहीं भरा; श्री राम ने सिर्फ समाज को बदलने और एक नई दिशा देने के लिये प्रतिकात्मक स्वरूप यह कार्य किया. पवैया ने कहा कि दुनिया में सकल घरेलू अनुपात उन 20 देशों का ज्यादा है, जिन्होंने अपनी मातृभाषा को आजादी के बाद अपनाया. उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को विकल्प देने कि आवश्यकता है. साक्षात्कार में हिन्दी भाषा में जवाब देने वाले बच्चों का चयन भी होना चाहिए. उनको हिन्दी भाषी होने पर भी रोजगार के अवसर मिलना चाहिए. पवैया ने कहा कि हिन्दी के लिए सकारात्मक पहल की जरूरत है. हिन्दी को हेय-दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए. कार्यशाला में वैज्ञानिक तकनीकी शब्दावली आयोग नई दिल्ली के अध्यक्ष अवनीश कुमार, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. नवीन चन्द्रा, हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रामदेव भारद्वाज और कुलसचिव डॉ. एस.के. पारे उपस्थित थे.

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