एक दिन ही महिला दिवस क्यों हो. जब कोई भी दिन महिला के बिना घर, समाज और राष्ट्र नहीं चल सकता तो हर दिन महिला के सम्मान का क्यों न हो. ये तो अमेरिका में हुए आन्दोलन के चलते 8 मार्च को महिला दिवस मनाते हैं. अमेरिका और रूस में महिलाओं को अपने सम्मान और अधिकार के लिए लड़ाई लड़नी पड़ी, लेकिन भारत में आदिकाल से महिलाओं को देवी माना जाता है. यहां यत्र नार्यस्तु रमन्ते तत्र देवता का भाव है. यह बात आज मुख्यमंत्री शिवराज ने महिला दिवस पर भोपाल में आयोजित महिला सम्मेलन में कहीं. सम्मेलन की अध्यक्षता महिला बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस ने की. वही राज्य मंत्री ललिता यादव कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि रही. उन्होंने कहा कि हमारे देश की रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और लोकसभा स्पीकर भी महिला हैं. हमारे देश में तो हमेशा से महिलाओं को सम्मान मिला है, देवता भी संकट की दशा में शक्ति की शरण ली है.भारत के विशिष्ट पदों पर आज हमारी माताएं-बहनें विराजमान हैं और पद की गरीमा को बढ़ाते हुए बड़े व महत्वपूर्ण फैसले ले कर हम सभी को गौरवान्वित कर रही हैं.
उन्होंने कहा कि हमने स्थानीय निकाय चुनाव में बहनों को 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की, आज मुझे गर्व है कि निकायों में 56 प्रतिशत महिलाएं प्रतिनिधित्व कर रही हैं, मेरी बहनों ने मेरे फैसले को सही साबित कर दिया. महिलाओं ने अपने उत्कृष्ट कार्य से सिद्ध किया है कि वे देश या प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को चलाने का सामर्थ्य रखती हैं. वन विभाग को छोड़कर सभी सरकारी नौकरी में 33 प्रतिशत और शिक्षक की भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण बेटियों को दिया जा रहा है. हाकी की नेशनल टीम में हमारी 6 बेटियों का चयन हुआ और अपने उत्कृष्ट खेल से देश-प्रदेश का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गौरव बढ़ाने का काम किया. सम्मेलन से पहले मुख्यमंत्री ने भोपाल में जवाहर बाल भवन परिसर में नवनिर्मित कामकाजी महिला वसति गृह 'स्वयंसिद्धा' का लोकार्पण किया और इसका अवलोकन किया. उन्होंने इस मौके पर लगी प्रदर्शनी भी देखी. इसके बाद आत्मनिर्भर महिला चालक को आॅटोरिक्शा की चाबी सौंपी.
महिला कोष की स्थापना की जाएगी
महिलाओं के लिए घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में महिला कोष की स्थापना की जाएगी और अविवाहित बहनों को 50 साल की उम्र की होने पर पेंशन की सुविधा प्रदान की जाएगी. गर्भवती श्रमिक महिलाओं को पोषण आहार के लिए 4 हजार रुपए अलग से दिए जाएंगे, साथ ही प्रसव के बाद प्रसूता के खाते में 12,500 रुपए जमा कराया जाएगा. हाई कोर्ट में 30 प्रतिशत महिलाएं शासकीय अधिवक्ता के रूप में रहें. इस दिशा में भी हम प्रयास कर रहे हैं. मध्यप्रदेश की धरती पर हमने तय किया है कि मासूम बेटियों के साथ रेप करने वाले दुराचारियों को फांसी के फंदे पर लटकाने का विधेयक बनाकर माननीय राष्ट्रपति जी को भेज दिया है. ऐसे नराधम को जिÞंदा रहने का अधिकार नहीं है
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