मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ अनुशासन के नाम पर सख्त नजर आ रहे हैं. प्रदेश कांगे्रस प्रभारी दीपक बावरिया से अभद्रता करने के मामले में उन्होंने अरुण यादव समर्थकों को निष्कासित कर दिया है. वहीं इस बात के संकेत दिए हैं कि पूर्व में निष्कासित नेताओं की वापसी भी पार्टी में तभी होगी, जब वे माफी मांगेंगे.
प्रदेश कांग्रेस चुनाव के पहले उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को दिखा रहा है, जो पूर्व में पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं. इन नेताओं और कार्यकर्ताओं को यह उम्मीद थी कि कमलनाथ के प्रदेश अध्यक्ष बनते ही उनकी पार्टी में वापसी हो जाएगी. मगर कमलनाथ ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और साफ संकेत दिए हैं कि पार्टी में अनुशासनहीनता बख्शी नहीं जाएगी. इसका ताजा उदाहरण भी उन्होंने अरुण यादव समर्थकों को निष्कासित करके दिया है. यादव समर्थकों ने रविवार को पार्टी कार्यालय में कांग्रेस के महासचिव और प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी दीपक बावरिया से अभद्रता कर दी थी. यादव समर्थक जिन नेताओं को निष्कासित किया है, उनमें महेश्वर ब्लाक के अध्यक्ष अर्जुनसिंह, नगर पालिका महेश्वर के अध्यक्ष हेमंत जैन, गिरिराज सर्राफ और शुभम व्यास है. ये नेता अपने समर्थकों के साथ भोपाल आए थे. उनकी शिकायत थी कि मंडलम और सेक्टर में जो पदाधिकारी एआईसीसी के प्रतिनिधि की मौजूदगी में बनाए गए थे, उन्हें बदल दिया गया है. इस शिकायत को वे प्रदेश प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया को बता रहे थे, तभी तीखी बहस के बीच बाबरिया की टिप्पणी से कार्यकर्ता भड़क गए थे. प्रदेश प्रभारी के साथ बहस को आधार बनाकर प्रदेश कांग्रेस के संगठन प्रभारी उपाध्यक्ष चंद्रप्रभाष शेखर ने चारों को निष्कासित कर दिया. ये नेता पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव के समर्थक बताए जाते हैं.
समिति करेगी जांच
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता और पेनलिस्ट में भाजपा समर्थित और कांग्रेस विरोधी गतिविधियों में लिप्त नेताओं के शामिल होने के आरोपों की जांच के लिए कांग्रेस ने चार सदस्यीय समिति बनाई है. इसमें प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मानक अग्रवाल, मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा, मृणाल पंत और अर्चना जायसवाल को शामिल किया गया है. समिति दस दिन में हरेक प्रवक्ताओं और पेनलिस्टों की निष्ठाओं की जांच कर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को रिपोर्ट सौंपेगी. इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस ने प्रवक्ता, पेनलिस्ट की सूची में शामिल नेताओं के सत्यापन के लिए समिति भी बना दी है जो दस दिन में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी.,
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