सोमवार, 21 मई 2018

मात्र परीक्षा संचालन का केन्द्र बने विश्वविद्यालय

 रिक्त पदों के कारण गिर रहा शैक्षणिक स्तर, समय पर नहीं हो रहे काम
मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालय मात्र परीक्षा संचालन का केन्द्र बन कर रह गए हैं. पदों की रिक्तता के चलते न तो समय पर परीक्षा हो पाती है और न ही वार्षिक कैलेण्डर   पूरा किया जा रहा है. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इस समस्या को लेकर चेतावनी दी है कि अगर समय रहते रिक्त पदों की पूर्ति के अलावा छात्रों की लंबित मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा.
राज्य के विश्वविद्यालयों बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल, विक्रम विश्व विद्यालय उज्जैन, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर और अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा एवं रानी दुर्गावति विश्वविद्यालय जबलपुर में स्वीकृत पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं. इसके चलते शैक्षणिक कार्य और गैर शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहा है. विश्वविद्यालयों में समय पर वार्षिक कैलेण्डर का न तो पालन हो पा रहा है आरे न ही परीक्षा परिणाम ही समय पर आ रहे है. इसके कारण विद्यार्थियों को परेशान होना पड़ रहा है.
कहां कितने पर हैं रिक्त
राज्य के बलकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल में शैक्षणिक पद 96 स्वीकृत है, मगर इनमें से 41 पद रिक्त है, जबकि गैर शैक्षणिक पद 587 स्वीकृत है, जिनमें 161 पद रिक्त है. इसी तरह विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन में शैक्षणिक पद 161 स्वीकृत है, जबकि रिक्त पदों की संख्या 84 है. यहां पर गैर शैक्षणिक स्वीकृत पदों की संख्या 650 है, जिसमें से 266 पद रिक्त हैं. देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में शैक्षणिक पद 399 स्वीकृत है,जिनमें से 190 पद रिक्त है. इस विश्वविद्यालय में गैर शैक्षणिक स्वीकृत पद 958 हैं, जिनमें से 425 पद रिक्त है. इसी तरह रानी दुर्गावति विश्वविद्यालय जबलपुर में शैक्षणिक पद 156 स्वीकृत हैं, जिनमें से 110 पद रिक्त हैं. गैर शैक्षणिक पद इस विश्वविद्यालय में 650 हैं, जिसमें 50 पद रिक्त हैं. वहीं अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा में शैक्षणिक पद 75 स्वीकृत है, जिनमें 50 पद रिक्त है, जबकि गैर शैक्षणिक पद 384 स्वीकृत है, वहीं 132 पद इस विश्वविद्यालय में रिक्त हैं.
प्रवेश शुल्क वापस किया जाए
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने रिक्त पदों के अलावा विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया पर  भी सवाल खड़े किए हैं. अभाविप के प्रदेश मंत्री बंटी चौहान ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2018-19 में आनलाइन प्रवेश के लिए निर्देश दिए हैं. इसके तहत छात्र को एक बार प्रवेश लेने के बाद उनकी शुल्क वापस नहीं लौटाई जाएगी. जबकि छात्र का प्रवेश, प्रवेश परीक्षा के माध्यम से अगर दूसरे महाविद्यालय में होता है तो उसे पूरी फीस वापस लौटाया जाना चाहिए. फीस के पुराने नियम विधिवत रखे जाएं. इसके अलावा सभी महाविद्यालयों में स्थायी प्राचार्यों की नियुक्ति की जाए. यहां पर स्थायी प्राचार्य न होने से पढ़ाई पर सीधा असर  पड़ता है. उन्होंने बताया कि सभी विश्वविद्यालयों में स्थायी खेल निर्देशकों की नियुक्ति भी नहीं की गई है. हमने इन मांगों को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया को ज्ञापन भी दिया,मगर अब तक हमारी मांगे पूरी नहीं हुई है. उच्च शिक्षा विभाग अगर जल्द हमारी मांगों को पूरा नहीं करता तो हम विश्वविद्यालयों में आंदोलन करेंगे.

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