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| ज्योति धुर्वे |
मध्यप्रदेश के बैतूल संसदीय क्षेत्र की सांसद ज्योति धुर्वे पर जाति प्रमाण पत्र को लेकर उनकी सदस्यता का खतरा बढ़ गया है. उनके प्रमाण पत्र को छानबीन समिति ने फर्जी माना है. इससे उनकी सदस्यता पर खतरे में आ सकती है.
आदिम जाति कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव एस.एन. मिश्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला हुआ. इस बैठक में आदिम जाति कल्याण आयुक्त दीपाली रस्तोगी भी थीं. समिति ने सांसद की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया. समिति की यह अनुशंसा रिपोर्ट अब मुख्य सचिव एस.आर.मोहंती को भेजी जाएगी. इसके बाद समिति के फैसले पर प्रमाण पत्र को रद्द किए जाने के निर्देश दिए जाएंगे.
सांसद धुर्वे अनुसूचित जनजाति सीट बैतूल से सांसद हैं, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामले की छानबीन उच्च स्तरीय समिति द्वारा की गई थी. सांसद ज्योति धुर्वे की जाति को लेकर पिछले दस साल से विवाद की स्थिति चल रही है. छानबीन समिति ने इसके पहले 3 मई 2017 को निर्णय में जाति प्रमाण पत्र निरस्ती के आदेश दिए थे. इस पर सांसद ने पुनर्विचार याचिका दायर कर दी थी, जिस पर भाजपा सरकार के दौरान दो बार सुनवाई टाल दी गई.
उल्लेखनीय है कि सांसद धुर्वे के खिलाफ यह शिकायत बैतूल के एडवोकट शंकर पेंदाम ने वर्ष 2009 में की थी. शिकायत में उनके गोंड जनजाति के प्रमाण पत्र को चुनौती दी गई थी. बालाघाट के तिरोड़ी गांव में जन्मी ज्योति धुर्वे की प्राथमिक शिक्षा रायपुर में हुई. जांच में यह सामने आया था कि उन्होंने पहले अपना जाति प्रमाण पत्र रायपुर से बनवाया था. इसके बाद उन्होंने बैतूल के प्रेम सिंह धुर्वे से विवाह कर पति की जाति (अजजा) का प्रमाण पत्र जिले के भैंसदेही से बनवा लिया.
फैसले से बढ़ गई मुश्किलें
गौरतलब है कि 3 मई 2017 को समिति ने उनके संदेहास्पद जाति प्रमाण पत्र को निरस्त कर जांच रिपोर्ट प्रमुख सचिव आदिवासी विकास को भेज दी थी. उस समय जांच में पाया गया था कि ज्योति धुर्वे का जाति प्रमाण पत्र 1984 में रायपुर के आदिवासी विभाग के संयोजक से बनवाया गया था. इसी प्रमाण पत्र को बैतूल की ग्राम पंचायत चिल्कापुर के सत्यापन के आधार पर तत्कालीन भैंसदेही तहसीलदार ने जारी कर दिया था. बताया जा रहा है कि सांसद ने छानबीन समिति के सामने अपनी जाति को लेकर जितने भी साक्ष्य प्रस्तुत किए, वे पिता के परिवार और पिता की वंशावली के अनुरूप नहीं पाए गए हैं. सारे प्रमाण मातृ पक्ष से प्रस्तुत किए गए. समिति की इस जांच और निर्णय के बाद सांसद की मुश्किलें फिर बढ़ गई हैं.

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