मध्यप्रदेश में हार के बाद भी सक्रियता को देख संगठन ने लिया फैसला
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अब भाजपा उत्तरप्रदेश में सक्रिय करने जा रही है. वे उत्तरप्रदेश में सेक्टर संयोजकों को चुनावी मैनेजमेंट के गुर सिखाने जा रहे हैं. चौहान को उत्तरप्रदेश के हरदोई और बिजनौर में दो दिनों तक रहेंगे और वहां के कार्यकर्ताओं को संघर्ष के दौर में पीछे न हटने के गुर सिखाएंगे.मध्यप्रदेश में भाजपा को मिली हार के बाद राष्ट्रीय नेतृत्व में शिवराजप सिंह चौहान को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद की कमान सौंप कर यह संकेत दे दिया था कि चौहान अब राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रहेंगे, लेकिन शिवराज सिंह मध्यप्रदेश में लगातार अपने दौरों से सक्रियता दिखा रहे हैं. शिवराज के दौरों में जब यह देखा कि अब भी उनकी लोकप्रियता जनता और कार्यकर्ता के बीच है, तो संगठन ने उन्हें उत्तरप्रदेश चुनाव में सक्रिय करने का फैसला लिया है. शिवराज सिंह चौहान को उत्तरप्रदेश के हरदोई और बिजनौर भेजा जा रहा है. यहां पर वे सेक्टर संयोजकों को चुनाव के गुर सिखाएंगे. शिवराज सिंह चौहान कल 4 फरवरी से उत्तरप्रदेश के दौरे पर रहेंगे, इस दौरान वे वहां के कार्यकर्ताओं के बीच लोकसभा चुनाव को संघर्ष के दौर पीछे न हटने की बात भी कहेंगे. सेक्टर संयोजकों को चुनाव जीतने के फंडे भी बताएंगे और किस रणनीति पर काम करना है यह भी बताएंगे. चौहान 4 को हरदोई और 5 फरवरी को बिजनौर में रहकर सेक्टर संयोजकों को यह प्रशिक्षण देंगे.
यहां उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में भाजपा को विधानसभा में मिली हार के बाद शिवराज सिंह चौहान लगतार अपने दौरे कर रहे हैं. हालांकि संगठन द्वारा उनके दौरों में रुचि नहीं दिखाई दी. मगर जब बात राष्ट्रीय स्तर पर पहुंची और यह जानकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को मिली कि शिवराज सिंह के लगातार हो रहे दौरों में जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच आज भी उनकी लोकप्रियता बरकरार है, इसके चलते उन्हें यह कार्य सौंपने का फैसला राष्ट्रीय संगठन ने लिया है. सूत्रों की माने तो राष्ट्रीय संगठन लोकसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान को दूर रखना चाहता है, इसलिए भी उन्हें उत्तरप्रदेश में सक्रिय किया जा रहा है.
वरिष्ठ नेताओं ने लिया था हासिए पर
मध्यप्रदेश में भाजपा को मिली हार के बाद शिवराज सिंह चौहान को प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं ने हासिए पर लिया था और उन्हें हार के लिए जिम्मेदार भी ठहराया था. वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा तो शिवराज को लेकर यहां तक कह गए थे कि हार के लिए शिवराज ही जिम्मेदार हैं. इसके बाद संगठन में भी उन्हें लेकर नाराजगी नजर आई थी. वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी के चलते चुनाव में मिली हार के बाद जब वे आभार यात्रा निकालने जा रहे थे तो संगठन ने उसकी अनुमति नहीं दी थी. इसके बाद शिवराज लगातार अपने दौरे कर रहे हैं, इसमें भी संगठन की अनुमति नहीं थी, मगर उन्होंने दौरे कर जनता के बीच फिर अपनी लोकप्रियता को बढ़ाने का काम किया.
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