गुरुवार, 7 फ़रवरी 2019

आयकर आयुक्त ने उठाए बेरोजगारी भत्ते पर सवाल, कहा आलस की फौज

एक तरह मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार बेरोजगारों का ेबेरोजगारी भत्ता देने के लिए रोजगार कार्यालयों में बेरोजगारों का पंजीयन करा रही है, वहीं दूसरी और इस योजना को लेकर पढ़ा-लिखा वर्ग सावल भी खड़े कर रहा है. ऐसा ही सवाल मध्यप्रदेश के आयकर खड़ा किया हैं. उनका मानना है कि सरकार इस तरह से आलसियों की फौज खड़ी कर रही है. 
मध्यप्रदेश के आयकर आयुक्त आर.के. पालीवार ने ये सवाल सोशल मीडिया पर उठाए हैं. उन्होंने लिखा है कि आजकल महाचुनाव की पूर्व संध्या पर हर तरफ लोक लुभावन आयोजनों की मायावी बहार आई है, जिसमें किसानों, व्यापारियों, सरकारी कर्मचारियों के साथ साथ बेरोजगारों के लिए भी नित नए नए वादों की बौछार हो रही हैं. उन्होंने कहा कि हम सब जानते हैं कि पिछले सत्तर सालों में किस तरह आरक्षण के लाभ के लिए विभिन्न जातियों में खुद को एक दूसरे से ज्यादा पिछड़ा साबित करने की होड़ मची हुई है. इस परिप्रेक्ष्य में हमारे समाज के एक बड़े भाग के लिए यह भी संभव है कि बेरोजगारी भत्ते के लिए भी अच्छे खासे रोजगार करने वाले लोग भी खुद को बेरोजगार साबित करने की कोशिश करने लगें.
उन्होंने कहा कि गांधी ने आलस को भारतीय समाज का बड़ा दोष बताया था. बेरोजगारी भत्ता एक तरह से आलस को पुरस्कृत करने का नकारात्मक उपक्रम भी साबित हो सकता है.  जब तक बेरोजगारी के सही पैमाने तय नहीं हो जाते तब तक हडबड़ी में बेरोजगारी भत्ते की घोषणा बहुत जल्दबाजी में लिया गया एक बेहद प्रतिगामी कदम साबित हो सकता है.
यहां उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार द्वारा राज्य के बेरोजगारों को बेरोजगार भत्ता देने की घोषणा विधानसभा चुनाव के दौरान की थी, इस घोषणा पर अमल करते हुए सरकार द्वारा बेरोजगारों का पंजीयन कराया जा रहा है. बेरोजगारी भत्ते के होे रहे बड़ी संख्या में पंजीयन को लेकर आयकर आयुक्त ने ये सवाल खड़े किए हैं.
 थोड़े पढ़े लिखे मेहनत से चुराते हैं जी
पालिवाल ने लिखा कि गरीब और बेरोजगार लोगों को रोजगार देने के लिए मनरेगा, जैसी सुविचारित योजनाओं का अपना महत्व है लेकिन यह भी एक कड़वा सच है कि इस योजना के लिए भी बहुत से इलाकों में श्रम करने वाले मजदूर नही मिल रहे हैं. इससे साफ जाहिर है कि देश में काम करने वालों के लिए रोजगार की कमी नहीं है, लेकिन आलसी और थोड़े पढ़े लिखे लोग खेती बाड़ी और मेहनत मशक्कत के कामों से जी चुराते हैं, जिससे देश में वास्तव से कहीं ज्यादा बेरोजगारी दिखाई देती है. ऐसी स्थिति में भत्ते मिलने की स्थिति में यह निश्चित है कि रातों रात भत्ता पाने के लिए बेरोजगार लोगों की एक बड़ी फौज खड़ी हो जाएगी.

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