मध्यप्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक ऋषि शुक्ला के सीबीआई प्रमुख बनाए जाने पर कांग्रेस ने उनकी योग्यता पर सवाल खड़े किए हैं. सामान्य प्रशासन मंत्री डा. गोविंद सिंह ने शुक्ला की क्षमताओं पर सवाल उठाए और उन्हें अक्षम अधिकारी तक बता दिया. उन्होंने कहा कि व्यापमं घोटाले पर पर्दा डालने के लिए उनकी इस पद पर नियुक्ति की गई है. वहीं मंत्री के बयान पर भाजपा ने आपत्ति जताई है.डा. गोविंद सिंह ने कहा कि शुक्ला को सीबीआई की कमान देकर केन्द्र कांग्रेस पर दबाव डालने और भ्रष्टाचारी भाजपा नेताओं को संरक्षण देने की कोशिश कर रहा है. केन्द्र सरकार इस नियुक्ति के जरिए व्यापमं जैसे घोटाले पर पर्दा डालना चाहता है. डा. सिंह ने कहा कि शुक्ला के पुलिस महानिदेशक के कार्यकाल में राज्य में दलितों की हत्याएं हुई. इसके अलावा अन्य वर्गों पर भी अत्याचार होते रहे. किसानों को प्रताड़ित किया जाता रहा. वे अक्षम पुलिस अधिकारी साबित हुए, इसलिए राज्य सरकार ने उन्हें पुलिस महानिदेशक के पद से हटाकर पुलिस हाउसिंग का चैयरमेन बनाया था. केन्द्र सरकार ने भ्रष्टाचार के मामलों को दबाने के लिए शुक्ला को सीबीआई का निर्देशक बनाया है. डा. सिंह ने राज्य के व्यापमं घोटाले और ई-टेंडरिंग घोटाले को लेकर कहा कि शुक्ला की नियुक्ति के जरिए केन्द्र इन घोटालों पर पर्दा डालना चाहता है.
भाजपा ने जताई आपत्ति
भाजपा के प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने डा. गोविंद सिंह के बयान पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि सीबीआइृ निदेशक की नियुक्ति करने वाली समिति में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश भी होते हैं. इस तरह से मंत्री द्वारा नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े किए जाना और सीबीआई प्रमुख पर आरोप लगाना ठीक नहीं है.
वरिष्ठ आईपीएस ने मंत्री को लिया आड़े हाथ
डा. गोविंद सिंह के बयान पर जहां भाजपा ने आपत्ति जताई, वहीं वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने मंत्री को आड़े हाथ लिया है. आईपीएस अधिकारी मदन मोहन समर ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट के जरिए मंत्री को कुंठित मानसिकता वाला बताया. डीएसपी समर ने डा. सिंह की आलोचना करते हुए लिखा है कि ऋषि होना आसान नहीं. उनकी आलोचना एक मंत्री की कुंठित मानसिकता प्रदर्शित करती है. उन्होंने लिखा कि किसी घटना के लिए जब मुख्यमंत्री, मंत्री, विभागीय मंत्री और अधिकारी जिम्मेदार नहीं होता तो डीजीपी भी किसी घटना के लिए जिम्मेदार नहीं होता है. गोविंद सिंह जब प्रदेश के गृह मंत्री थे, तब भी कई जघन्य अपराध हुए. उन्होंने कहा कि वर्ष 1998 में मुलताई में 22 किसानों की मृत्यु का जिम्मेदार कौन था. मृतक किसानों दलित भी थे और पिछड़े भी थे. लिहाजा जिम्मेदार पदों पर रहने वाले व्यक्ति को कभी कुंठित नहीं होना चाहिए. यहां उल्लेखनीय है डीएसपी समर एक कवि भी हैं.
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