किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा कीटनाशक की विशाक्तता के कारण अप्रत्याशित रूप से जिला यवतमाल (महाराष्ट्र) में किसानों की मृत्यु की होने की सूचना प्राप्त होने के बाद जिले के किसानो को कीटनाशक का सावधानियों के साथ सुरक्षित उपयोग करने की सलाह दी है. मुख्यत: आगेर्नोफास्फोरस समुह के कीटनाशकों का किसानो द्वारा मनमर्जी मिश्रण तैयार कर, सुरक्षा सावधानियों का ध्यान न देते हुए, हवा के बहाव के विपरित दिशा में छिड़काव किये जाने के कारण श्वसन के माध्यम से कीटनाशक अंश ग्रहण करने के फलस्वरूप विशाक्तता के कारण मृत्यु की होने के प्रकरण प्रकाश में आये हैं . कीटनाशक दुधारी तलवार हैं जो जहाँ कीटव्याधी से सुरक्षा हेतु लाभदायक हैं वहीं असावधानी से उपयोग किये जाने पर मानव, पशु एवं वातावरण के लिये नुकसानदेह भी हैं. जिले के किसान कीटनाशक के सुरक्षित उपयोग एवं आवश्यक सावधानियों रखे आर्थिक क्षति स्तर से अधिक कीट प्रकोप होने की स्थिति में ही अनुशंसित मात्रा में कीटनाशक का छिड़काव किया जावे. कीटनाशक का छिड़काव शरीर को ढककर, दस्ताने, चश्मा, जूते व मास्क पहनकर किया जाना चाहिये. कीटनाशकों से जहरीली गैस निकलती हैं. अत: दवा का घोल खुले एवं हवादार स्थान पर तैयार किया जावें. कीटनाशक छिड़काव के दौरान कृषक कुछ न खायें ओर न बीड़ी पियें, क्योंकि इससे शरीर में जहर जा सकता हैं. हमेशा कीटनाशक छिड़काव हवा की दिशा में करे एवं अपने आप को छिड़काव से सुरक्षित रखे. कीटनाशकों एवं इनके छिड़काव में उपयोग आने वाले यंत्रों आदि को बच्चों ओर पालतू पशुओं की पहुंच से दुर ताला बन्द कमरे में रखें. कीटनाशक खरीदते समय इनकी पैकिंग व वैद्यता अवधि की तारीख अवश्य देख लें.

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें