शनिवार, 3 फ़रवरी 2018

पर्यावरण संरक्षण के कार्य को आजीविका के साथ जोड़ना जरुरी

  वर्तमान के समय की यह महती आवश्यकता है कि हम पर्यावरण संरक्षण के कार्य को आजीविका के साथ जोड़े. किसी भी कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए स्थानीय लोगो की स्वीकार्यता तथा सहभागिता आवश्यक है. उक्त बातें आर. परशुराम, आयुक्त म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग ने भूदृश्य बहाली पर आयोजित कार्यशाला में कही.  परशुराम ने कहा कि इस कार्यशाला के आयोजन का उद्देश्य है कि हमें अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर जो कदम उठाए गए है उसकी जानकारी प्राप्त हो सके तथा उन उपायों का उपयोग स्थानीय समस्याओं के निवारण के लिए किस प्रकार किया जा सकता है. हमें आज समस्याओं के पास स्वयं पहुँचने की आवश्यकता है तथा उनके निराकरण में स्थानीय जनसमुदाय की प्रत्येक स्तर आयोजन, क्रियान्वयन तथा अनुश्रवण में भागीदारी आवश्यक है.  परशुराम ने कहा कि कई शासकीय योजनाएं संचालित है जिनमें बेहतर समन्वय की आवश्यकता है. योजनाओं का क्रियान्वयन इस प्रकार सुनिश्चित हो जिससे स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ सीधे प्राप्त हो सके. लोगो को अल्प समय में भी आजीविका के संसाधन उपलब्ध हो सके.        मुख्य कार्यपालन अधिकारी म.प्र. राज्य आजीविका मिशन एल. एम. बेलवाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के कार्य में बेहतर काम के लिए लोगों की बीच स्वीकार्यता आवश्यक है. लोग किसी कार्यक्रम में तब तक सीधें सम्मिलित नहीं होते जब तक उन्हे लाभ प्राप्त न हो. आजीविका मिशन के माध्यम से यह स्थापित हुआ है कि लोगो की सहभागिता से योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से किया जा सकता है. उन्होने कहा कि सीधी जिले में 5200 स्वसहायता समूह कार्यरत है जिसमें 63000 महिलाएं जुड़ी है. उन्होंने कहा कि आजीविका मिशन के माध्यम से जिले की सभी गॉवो के गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली महिलाओं को जोड़ने का प्रयास करेंगे तथा उनके माध्यम से इस कार्यक्रम के विषय में जागरूकता फैलाने का प्रयास करेंगे.   जिला पंचायत अध्यक्ष अभ्युदय सिंह ने कहा कि भूदृष्य बहाली के लिए शासन द्वारा बहुत सी योजनाएं संचालित है लेकिन लोगो की सहभागिता कम होने से उनका बेहतर क्रियान्वयन नही  हो पा रहा है. इस कार्य का आजीविका से जोड़ने से लोगों की सहभागिता बढ़ेगी तथा बेहतर क्रियान्वयन हो सकेगी.

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