शुक्रवार, 9 मार्च 2018

मध्यप्रदेश के 47 जिलो में प्रभारी सीएमएचओ

 4 जिलो में ही हैं नियमित सीएमएचओ अधिकारी

मध्यप्रदेश के चिकित्सकों की कमी के चलते 51 में से 4 जिलों में ही नियमित सीएमएचओ के पद पर अधिकारी पदस्थ हैं. शेष 47 जिलों में प्रभारी सीएमएचओ पदस्थ हैं.
यह जानकारी आज राज्य विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री रुस्तमसिंह ने विधायक कमलेश्वर पटेल के प्रश्न के लिखित जवाब में दी. उन्होंने बताया कि अधिकारियों के कमी के कारण सीएमएचओ पद पर प्रभारी अधिकारी पदस्थ किए गए हैं. मंत्री ने बताया कि संयुक्त संचालक संवर्ग अंतर्गत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, संचालक राज्य प्रशिक्षण एवं प्रबंध संस्थान, प्राचार्य क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रशिक्षण केन्द्र सहित 73 पद एवं सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक के 57 पद स्वीकृत किए गए हैं. उक्त पदों पर क्षेत्रीय संचालक, कार्यालय एवं संचालनालय में संयुक्त संचालक के पद भी शामिल हैं. संयुक्त संचालक संवर्ग में कुल 130 पद स्वीकृत एवं वर्तमान में 26 अधिकारी उक्त संवर्ग में कार्यरत हैं. उक्त अधिकारियों की पदस्थापना संचालनालय, क्षेत्रीय संचालक कार्यालय एवं सीएमएचओ, सीएस पदों पर की जाती है. जिला स्तर पर 4 अधिकारी एवं शेष 22 अधिकारी क्षेत्रीय संचालक कार्यालयों, प्रशिक्षण केन्द्रों एवं संचालनालय स्वास्थ्य सेवा में पदस्थ हैं. 
मंत्री ने बताया कि कार्य में लापरवाही एवं अनियमितता के कारण राज्य के रीवा, विदिशा, होशंगाबाद एवं भोपाल के पूर्व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को निलंबित किया गया था. प्रशासनिक पद पर रहते हुए अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही प्रचलित हैं, जांच में दोषी पाए जाने पर उचित कार्यवाही की जाएगी.
सर्जरी और स्त्री रोग विशेषज्ञ के पद रिक्त
विधायक नथनशाह कवरेती के प्रश्न के लिखित जवाब में स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह ने बताया कि छिंदवाड़ा जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र जुन्नारदेव में विशेषज्ञ चिकित्सक के 3, चिकित्सा अधिकारी के 2 कुल 5 पद स्वीकृत हैं. यहां पर 1 मेडिकल विशेषज्ञ एवं 3 नियमित चिकित्सा अधिकारी पदस्थ हैं. सर्जरी एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ के पद रिक्त है. मंत्री ने बताया कि प्रदेश में विशेषज्ञों की कमी के चलते जिलों में पद रिक्त हैं. उन्होंने बताया कि प्रदेश में 3556 पद स्वीकृत हैं, जबकि 999 विशेषज्ञ ही प्रदेश में उपलब्ध हैं. 
नहर निर्माण पूर्ण नहीं
विधायक पंडित रमेश दुबे के प्रश्न के लिखित उत्तर में जल संसाधन मंत्री ने बताया कि पेंच व्यपवर्तन परियोजना चौरई की नहर का निर्माण पूर्ण नहीं हुआ है. निर्माणाधीन नहर से पहली बार सिंचाई करने पर नहर के समीप के कुछ खेतों में पानी निकलता है. ऐसे पानी को खेतों में नाली खोदकर निकाला जाने से भूमि दलदल होने, फसल न लगा पाने, फसल खराब होने जैसी स्थिति निर्मित हुई है.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें