सोमवार, 5 मार्च 2018
सभी क्षेत्रों में मयार्दाएं टूट रही हैं : गुप्ता
सभी क्षेत्रों में मयार्दाएं टूट रही हैं. विचार की भी और बाजार की भी. इसके बाद भी कोई भी बाजार विचारों को सिर्फ प्रभावित कर सकता है, दबा नहीं सकता. राजस्व, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने यह बात माधव राव सप्रे स्मृति समाचार-पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान में भुवन भूषण देवलिया स्मृति व्याख्यान-माला में कही. व्याख्यान का विषय था 'विचार यात्रा से बाजार यात्रा तक. गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में विचार और बाजार के बीच सामंजस्य कायम करने की जरूरत है. यह विषय चिंतन का है, चिंता का नहीं. उन्होंने कहा कि विश्वससनीयता का संकट चहुंओर है, उसमें पत्रकारिता भी अछूती नहीं है. गुप्ता ने कहा कि विश्वसनीयता बनाये रखना जरूरी है. गुप्ता ने ग्वालियर के पत्रकार अनिल पटेरिया को भुवन भूषण देवलिया स्मृति सम्मान से सम्मानित किया. सम्मान के रूप में 11 हजार रुपए, प्रशस्ति-पत्र और शॉल-श्रीफल भेंट किया गया. उन्होंने स्मरिका का भी विमोचन किया. वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश दुबे ने कहा कि देवलिया ऐसे गुरु थे, जो सभी विद्यार्थियों को बेहतर प्रशिक्षण देते थे, लेकिन किसी एकलव्य का अंगूठा नहीं माँगते थे. उन्होंने मीडिया पर बाजार की निर्भरता और उसके प्रभावों के संबंध में भी विस्तार से चर्चा की. दुबे ने कहा कि जब तक चाय के ठेले और पान की दुकान है तब तक अखबार जरूर रहेंगे. उन्होंने विभिन्न आँकड़ों द्वारा प्रिंट मीडिया के महत्व को रेखांकित किया. वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार ने कहा कि टीआरपी को बाजार ने टूल की तरह इस्तेमाल किया है. वर्तमान में बाजार ही मीडिया की नीति तय करता है. सत्ता और धन्ना सेठ मिलकर मीडिया की भूमिका निर्धारित करते हैं. उन्होंने पोस्ट-ट्रुथ, पोस्ट-डेमोक्रेसी और पोस्ट-इन्वायरमेंट के बारे में भी बताया. वरिष्ठ पत्रकार विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि हम सुधरेंगे तो जग सुधरेगा. उन्होंने कहा कि पत्रकार को खुद तय करना है कि वह विचार को चुनता है या बाजार को. वरिष्ठ पत्रकार शिव अनुराग पटेरिया ने स्वागत भाषण दिया. उप संचालक जनसम्पर्क अशोक मनवानी ने आभार व्यक्त किया. गौरतलब है कि देवलिया डॉ. सर हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के पत्रकारिता और जन-संचार विभाग में विभागाध्यक्ष रहे. उनके पढ़ाये गये छात्र आज विभिन्न संस्थानों में उत्कृष्ट पत्रकारिता कर रहे हैं.
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