भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता डा. दीपक विजयवर्गीय ने कहा कि एक ओर कांग्रेस एनडीए सरकार पर आरोप लगाती है कि केन्द्र भ्रष्टाचार घोटालों के प्रति गंभीर नहीं है. वहीं जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के चिरंजीव पर केन्द्रीय जांच एजेंसी मनीलाड्रिंग, घूस और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्यवाही करती है तो जांच एजेंसी और केन्द्र सरकार कांग्रेस की कोप भाजन बन चुकी है. मामला 2007 का है. उन्होंने कहा कि पी. चिदंबरम के पुत्र कीर्ति चिदंबरम ने एफआईपीवी के नियमों का उल्लंघन किया. फलस्वरूप ईसीआईआर प्रिवेन्सन आफ मनीलाड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ. उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने कुछ मीडिया घरानों के साथ हिस्सेदारी की और उन्हें वे सुविधाएं नियमों के विपरीत दिलाई जो कानून की उल्लंघन करती है. ऐसा इसलिए संभव हुआ कि उनके पिता पी. चिदंबरम केन्द्र के वित्त मंत्री थे जिससे पूरी मयार्दा विहीनता के साथ नियमों का उल्लंघन होता रहा. उन्होंने कहा कि कीर्ति चिदंबरम के विरूद्ध सीबीआई ने कानून के अनुसार कार्यवाही की है जिसे कांग्रेस दबाव की राजनीति बताकर सच्चाई का गला घोट रही है. जनता को याद है कि वित्त मंत्री और केन्द्रीय मंत्री के रौब में ही कीर्ति की माताजी नलिनी चिदंबरम ने पं. बंगाल की एक फर्म से अपने सुलूक का इस्तेमाल करने के एवज में करोड़ रूपए वसूले थे. बाद में जब पोल खुली तो इस रकम को वकील की फीस बता दिया गया लेकिन आश्चर्यजनक यह है कि ऐसा कौन सा वकील हो गया जो कोलकाता तक पेश होने का एक करोड़ वसूलता है. डॉ. विजयवर्गीय ने कहा कि कांग्रेस स्यापा करने के बजाए संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करें और न्याय व्यवस्था में भरोसा जताए. यदि कीर्ति बेगुनाह है तो उन्हें डरने की आवश्यकता नहीं है. यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि जनता ने भ्रष्टाचार की सजा के रूप में कांग्रेस को सत्ता से बेदखल किया है और नरेन्द्र मोदी पर भरोसा जताया है कि न खायेंगे न खाने देंगे, अपनी प्रतिबद्धता पर खरे उतरेंगे.

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