मध्यप्रदेश के मुंगावली-कोलारस उपचुनाव में मिली जीत के बाद अब कांग्रेस दोगुनी ताकत के साथ मैदान में है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की इस जीत के बाद यह तय हो गया कि प्रदेश से अब भाजपा की विदाई तय है. उन्होंने कहा कि आज देश में असहिष्णुता का माहौल है. राजधानी भोपाल में जीत के बाद सासंद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यह बात आज राजधानी में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही. सिंधिया ने कहा कि यह जीत केवल कांग्रेस की जीत नहीं है, यह जनता की जीत है. उन्होंने कहा जनता का भरोसा कांग्रेस पर बढ़ रहा है, अटेर, मुंगावली कोलारस उपचुनाव जीत बाद तय हो गया कि प्रदेश से भाजपा की विदाई तय हो गई है. कांग्रेस की एकजुटता के सवाल पर सासंद ने कहा कि सासंद कमलनाथ, प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, सासंद कांतिलाल भूरिया और प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया सबने मिलकर कांग्रेस की जीत के लिए एकजुट होकर काम किया है. उन्होंने कहा कि साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा, इस मुद्दे पर सिंधिया ने कहा कि कांग्रेस आलाकमान को तय करना है, मुझे जो भी जिम्मेदारी मिलेगी मैं उसे ईमानदारी से निभाऊंगा. ये मेरा धर्म है. उपचुनाव में कम हुए वोटों के अंतर पर सिंधिया ने कहा कि आखिरी 3 दिनों में मुंगावली कोलारस विधानसक्षा क्षेत्रों में पैसों की नदियां बही हैं. 25 हजार मुंगावली और 15 हजार कोलारस में फर्जी मतदाता पकड़ाए थे. यह भाजपा के धनबल और बाहुबल पर जनता के जनबल की जीत है. वहीं पूर्व वनमंत्री सरताज सिंह की भाजपा पर नाराजगी पर सिंधिया ने कहा कि सरताज की परेशानी को देखकर जनता की परेशानी को समझा जा सकता है। हम विधानसभा चुनावों के लिए विजन डॉक्यूमेंट तैयार करेंगे जिसमें हर वर्ग का ध्यान रखा जाएगा.देश में असहिष्णुता का है माहौल
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति तोड़े जाने के संबंध में पूछे सवाल के जवाब में कहा कि राजग-भाजपा के चार साल के शासनकाल में असहिष्णुता बढ़ रही है. देश की संस्कृति और सभ्यता को खंडित करने का प्रयास हो रहा है. पूर्व केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि जब भाजपा के नेता आपत्तिजनक बयान देते हैं, तब प्रधानमंत्री और अन्य मंत्री चुप्पी साध लेते हैं. जब विपक्ष इस पर आपत्ति उठाता है तो ये बयान आता है कि उनके कहने का तात्पर्य यह नहीं, ये था. वहां भी खेद प्रकट नहीं किया जाता. उन्होंने भजपा के कई नेताओं के बयान का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि ये भारत की धर्मनिरपेक्षता और उदारवादी विचारधारा को खंडित करने की एक सोची समझी साजिश है। ये विचारधारा इस देश में नहीं चल पाएगी.
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