सोमवार, 5 मार्च 2018

जो सरकार विकलांगों की नहीं सुने उसे सत्ता से हटाएं

आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक और राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक अग्रवाल आंबेडकर पार्क पहुंचे और यहां उन्होंने निशक्त जनों की ओर से आयोजित विकलांग महापंचायत में शिरकत की. इस दौरान प्रदेश भर से आए दिव्यांगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जो सरकार प्रदेश के विकलांगों की आवाज को नहीं सुन सकती है, उसे सत्ता में रहने का कोई हक नहीं है.  उन्होंने कहा कि चुनावी साल में सत्ता में बैठे लोगों के कान थोड़ा खुल जाते हैं. इसीलिए आज हर व्यक्ति अपनी आवाज उठा रहा है. लेकिन यह बेहद दुखद है कि आप लोगों को भी अपनी पीढ़ा जाहिर करने के लिए इतनी दूर तक आना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि किसी ने कहा कि इस मंच से राजनीति की बात नहीं करनी चाहिए. मेरा मानना है कि इस मंच से सिर्फ और सिर्फ राजनीति की बात करनी चाहिए. राजनीति ही हमारे नमक, बिजली, बच्चों की शिक्षा, पेंशन, रोजगार तक को तय करती है. तो निश्चित रूप से राजनीति की बात होनी चाहिए. 
उन्होंने कहा कि आप लोग जो लड़ाई लड़ रहे हैं यह आपकी अपनी लड़ाई नहीं है, यह इस देश को बचाने की लड़ाई है. अंग्रेज चले गए लेकिन हमें आजादी नहीं मिली है. हमारे स्वतंत्रता सैनानियों ने जो सपना देखा था कि सभी के लिए रोटी, कपड़ा, मकान, बिजली, रोजगार मिलेंगे, लेकिन आज जो हालात हैं, उसमें मध्यप्रदेश में 45 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं. 70 प्रतिशत बच्चों में खून की कमी है. बिजली सबसे महंगी है. 40 लाख परिवारों को एक किमी दूर से पानी लाना पड़ता है. 2500 स्कूल बंद कर दिए गए हैं. स्वास्थ्य पर सीएजी की रिपोर्ट कहती है जितनी जरूरत है, उसके आधे ही अस्पताल हैं, उनमें से भी आधे में डॉक्टर नहीं है. 5 किसान रोज आत्महत्या कर रहे हैं. तो ऐसे हालात में बिना लड़ाई के कुछ मिलने वाला नहीं. इस प्रदेश, देश और संविधान को बचाने के लिए लड़ाई लड़े के अलावा कोई रास्ता नहीं है. उन्होंने महापंचायत में वादा किया कि दिल्ली की तरह 2500 रुपए की न्यूनतम पेंशन दी जाएगी. उन्होंने कहा कि मैं यह यह नहीं कहता कि क्या करेंगे, हम कहना चाहते हैं कि अगली सरकार आम आदमी पार्टी की होगी और इसमें सभी सरकारी पद भर दिए जाएंगे. इसके अलावा प्रतिनिधित्व लोकतंत्र के तहत हर स्तर पर पंचायत से विधानसभा तक दिव्यांगों को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा.  अग्रवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी आंदोलन से निकली पार्टी है. मैं खुद 4 साल पहले ही राजनीति में आया. उसके पहले 24 साल तक विभिन्न तरह की लड़ाई लड़ी. उन्होंने कहा कि हमने और अरविंद केजरीवाल ने भी निशक्त जनों की मांगों को भी उठाया. इसीलिए जब दिल्ली में सरकार बनी तो जो पहला काम किया गया वह था कि निशक्त जनों की पेंशन को 2500 रुपए कर दिया गया. उन्होंने कहा कि आपकी जो मांगें हैं, वह हमारी भी मांगें रही हैं. 
उन्होंने कहा कि आप लोग शिवराज सिंह चौहान के लिए केक लाए हैं, यह बहुत अच्छा है. आज प्रदेश भर में मुख्यमंत्री के होर्डिंग लगे हैं. इनमें बधाइयां दी गई हैं. इनमें से एक एक होर्डिंग पर 10-10 हजार रुपए खर्च किए गए हैं और दिव्यांग पेंशन के नाम पर महज 300 रुपए दिए जाते हैं. यानी 10 रुपए रोज. मुख्यमंत्री जी का यह कैसा मजाक है. कोई व्यक्ति 10 रुपए में कैसे अपना रोज का जीवन चला सकता है. इसलिए मैं कहता हूं कि आज शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री के रूप में अपना अंतिम जन्मदिन मना रहे हैं.  उन्होंने बताया कि पिछले दिनों मुझे जेल भेज दिया गया. इसकी वजह थी कि मैंने प्रदेश के 2 लाख करोड़ के बिजली घोटालों को उठाया था, पुलिस प्रताड?ा के कारण आत्महत्या करने वाली एक महिला को न्याय की बात उठाई थी. तो 17 दिन जेल में रखा गया. उन्होंने बताया कि जेल में उन्होंने संविधान पढ़ा और संविधान में सरकार अभिभावक है. एक अभिभावक के तौर पर हमारे परिवार में सारे बच्चों में जो बच्चा दिव्यांग है, जो निशक्त है, उस पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता है. उसको सबसे ज्यादा सुविधाएं दी जाती हैं. उसे सबसे ज्यादा प्यार दिया जाता है. तो फिर बतौर प्रदेश की सरकार को आप लोगों पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए था, क्योंकि संविधान में सरकार ही अभिभावक है. आपके लिए सबसे ज्यादा सुविधाएं होनी चाहिए थीं. लेकिन ऐसा नहीं है. उन्होंने कहा कि आप लोग बहुत जज्बे वाले लोग हैं, असली विकलांग तो शिवराज सिंह और उनकी सरकार है, जो मानसिक रूप से विकलांग हो चुकी है. जो यह नहीं समझ पा रही है कि उन्हें किसके लिए प्राथमिकता के तहत काम करना चाहिए. 






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